Nighttime Shopping Behavior: नींद न आने पर यूं ही करवट बदलने का दौर अब बदल चुका है. आजकल बहुत से लोग जैसे ही सोने में दिक्कत महसूस करते हैं, उनका हाथ सीधे फोन की तरफ बढ़ जाता है और कुछ ही मिनटों में वे ऑनलाइन शॉपिंग के पन्नों में खो जाते हैं. यह नई आदत धीरे-धीरे लोगों को तकनीक का गुलाम बना रही है. नींद को लेकर आजकल हर कोई परेशान है. कौन कितनी देर सोया, कौन सी ऐप नींद को बेहतर ट्रैक करती है, किसकी नींद कितने घंटे गहरी रही ये बातें रोजमर्रा की बातचीत बन चुकी हैं. लेकिन विडंबना यह है कि चर्चा जितनी बढ़ी है, अच्छी नींद उतनी ही कम होती जा रही है.

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क्या कहता है डाटा?

पिछले साल आए एक डाटा ने तो हैरान ही कर दिया. आधी रात से सुबह छह बजे के बीच की ऑनलाइन शॉपिंग 23 प्रतिशत बढ़ गई है. यानी लोग नींद आने का इंतजार करने के बजाय फोन पर सामान खरीदने लगते हैं. कई बार यह खरीदारी उन्हें सुबह याद भी नहीं रहती. दिलचस्प बात यह है कि रात में होने वाली इस खरीदारी में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. एक रिपोर्ट कहती है कि देर रात किए जाने वाले कुल खरीदारी में 66 प्रतिशत खरीदारी महिलाएं करती हैं. शायद इसलिए कि बेचैन रातों में फोन उठाना उन्हें सबसे आसान लगता है. लेकिन बात यहीं तक सीमित नहीं है. सोते समय फोन की स्क्रीन देखना नींद को और दूर कर देता है. स्क्रीन की नीली रोशनी उस हार्मोन को दबा देती है जो नींद लाने में मदद करता है. यानी राहत खोजने के चक्कर में लोग अपनी नींद और खराब कर बैठते हैं.

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लाइफस्टाइल पर पड़ता है असर

कई लोग नींद सुधारने के लिए स्लीप-ट्रैकिंग डिवाइस का सहारा लेते हैं. यह डिवाइस नींद को बेहतर बनाने से ज्यादा, कई बार लोगों की चिंता बढ़ा देता है. नींद को “अच्छा” या “खराब” बताने वाले आंकड़ों में उलझकर लोग असल में और बेराम हो जाते हैं. धीरे-धीरे यह आदत सिर्फ नींद ही नहीं बिगाड़ती, बल्कि हमारी दिनचर्या पर भी असर डाल देती है. रातों की बेवजह शॉपिंग हमारी जेब पर, दिमाग पर और नींद पर तीनों तरफ से बोझ बन जाती है. और हम समझ भी नहीं पाते कि कब तकनीक ने हमें अपनी लत का हिस्सा बना लिया. अगर इस चक्र से बाहर निकलना है, तो शुरुआत बस इतनी सी है, सोने के कमरे से फोन बाहर रख दें. नींद टूटे तो स्क्रीन नहीं, पानी का घूंट या कुछ गहरी सांसें मदद करेंगी. कदम छोटा है, लेकिन धीरे-धीरे रातें वापस शांत होने लगती हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.