आज के समय में पैसे खर्च करना पता ही नहीं लगता है. पहले लोग कैश निकालकर खर्च करते थे, इसलिए उन्हें अंदाजा रहता था कि जेब में कितने पैसे बचे हैं. लेकिन अब UPI की वजह से छोटे से छोटा पेमेंट भी कुछ सेकंड में हो जाता है. ऐसे में कई बार हमें पता ही नहीं चलता कि महीनेभर में कितना पैसा कहां खर्च हो गया. अगर आप भी महीने के आखिर में यही सोचते हैं कि सैलरी या कमाई आखिर गई कहां, तो खर्चों की एक सही लिस्ट बनाना आपके लिए काफी काम की हो सकती है. इसमें कैश और UPI दोनों तरह के खर्चों को शामिल करना चाहिए.

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कैश और UPI का हिसाब अलग रखें

सबसे पहले महीने की शुरुआत में एक ऐसी लिस्ट बनाएं, जिसमें कैश और UPI के खर्च अलग-अलग लिखे हों. जैसे सब्जी, दूध, चाय, ऑटो या छोटी खरीदारी के लिए किए गए कैश खर्च एक तरफ लिखें. वहीं मोबाइल रिचार्ज, ऑनलाइन शॉपिंग, बिल पेमेंट, खाना ऑर्डर करने या दूसरे UPI पेमेंट को अलग दर्ज करें. इससे महीने के अंत में आपको साफ पता चलेगा कि आपका पैसा किस माध्यम से और किन चीजों पर ज्यादा जा रहा है.

छोटे खर्चों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

कई बार हम बड़े खर्चों पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन 20, 50 या 100 रुपये जैसे छोटे खर्चों को लिखना जरूरी नहीं समझते. यही छोटी-छोटी रकम मिलकर महीने में बड़ा खर्च बन सकती है. इसलिए चाहे खर्च कितना भी छोटा हो, उसे लिस्ट में जरूर लिखें. अगर आप UPI से पेमेंट करते हैं तो अपने UPI ऐप की हिस्ट्री देखकर भी महीने के खर्चों को नोट कर सकते हैं. कैश के लिए फोन में एक छोटी नोट या डायरी का इस्तेमाल किया जा सकता है.

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खर्चों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटें

सिर्फ रकम लिखना ही काफी नहीं है. खर्च किस चीज पर हुआ, यह भी लिखें. इसके लिए खाने-पीने, यात्रा, घर का सामान, बिल, शॉपिंग, मनोरंजन और जरूरी खर्च जैसी कैटेगरी बना सकते हैं. महीने के अंत में इन सभी कैटेगरी का कुल खर्च निकालें. इससे आपको पता चलेगा कि सबसे ज्यादा पैसा किस जगह जा रहा है. अगर किसी गैर-जरूरी कैटेगरी में खर्च ज्यादा है तो अगले महीने उसमें कटौती की जा सकती है.

महीने के अंत में पूरी लिस्ट चेक करें

महीना खत्म होने पर एक बार बैठकर पूरी लिस्ट देखें. इसमें कैश और UPI दोनों के खर्च जोड़ें और अपनी कुल कमाई से उनकी तुलना करें. उदाहरण के लिए अगर आपकी कमाई 30 हजार रुपये है और खर्च 25 हजार रुपये हुआ है तो 5 हजार रुपये की बचत हुई. लेकिन अगर खर्च लगातार कमाई के आसपास पहुंच रहा है तो यह देखने की जरूरत है कि पैसा कहां ज्यादा जा रहा है. इस तरह महीने की आखिरी तारीख सिर्फ पैसे खत्म होने की तारीख नहीं रहेगी, बल्कि अगले महीने की प्लानिंग करने का मौका भी बनेगी.

बची रकम को पहले ही अलग कर दें

अगर आप चाहते हैं कि महीने के आखिर में पैसे बचें, तो बचत को आखिरी में बची रकम न समझें. कमाई आने के बाद ही एक तय रकम अलग कर दें. इसके बाद बाकी पैसे से महीने के खर्च चलाएं. खर्चों की लिस्ट देखकर आपको यह भी पता रहेगा कि कहां जरूरत से ज्यादा खर्च हो रहा है. धीरे-धीरे इस आदत से गैर-जरूरी खर्च कम किए जा सकते हैं और महीने के अंत में बचत की रकम भी बढ़ सकती है.

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