... तो इन वजहों से चाहकर भी पतले नहीं हो पा रहे आप!
कैलोरी काउंटिंग से फंसते हैं मुसीबत में- कैलोरी काउंटिंग हमेशा सही नहीं होती. दिनभर कैलोरी काउंटिंग करना वैसे भी बहुत तनावपूर्ण है. बेशक ग्रोसरी पैकेट्स पर कैलोरी और बाकी इंफोर्मेशन लिखी होती है लेकिन वो भी तकरीबन लिखी होती है. आपकी 5 फीसदी एनर्जी इसी में निकल जाती है कि आप कितनी कैलोरी ले रहे हैं, आपको कितना वजन बढ़ा इत्यादि. आपकी जानकारी के लिए बता दें बहुत से प्रोडक्ट इस बात का दावा करते हैं कि उनके प्रोडक्ट में लो कैलोरी है, ये स्नैक्स हेल्दी हैं लेकिन असल में ऐसा बहुत ही कम होता है.
न्यूरोसाइंटिस्ट सैंड्रा आमोद्त ने कुछ ऐसे कारणों की लिस्ट बनाई है जिनके कारण वजन कम नहीं होता. सैंड्रा ने अपनी न्यू बुक ‘डायट्स मेक अस फैट’ में भी वेट लॉस के कुछ फैक्ट्स के बारे में बताया है. जानिए, इनमें से कुछ कारणों को.
मेटाबॉलिज्म में आता है बदलाव- जब हम वजन घटाते हैं तो मेटाबॉलिज्म डाउन हो जाता है. जब हम बच्चे होते हैं और कुछ भी खा लेते हैं उस समय मेटाबॉलिज्म सबसे बढि़या होता है. लेकिन लगातार खाने-पीने में आने वाले उतार-चढ़ावों के कारण मेटाबॉलिज्म गड़बढ़ हो जाता है.
डायट लंबे समय तक काम नहीं कर पाती- जो लोग डायटिंग के जरिए वजन कम करते हैं उनमें अधिकत्तर वजन वापिस बढ़ा लेते हैं. यूएस बेस्ड रेसिडेंशियल ईटिंग डिस्ऑर्डर ट्रीटमेंट प्रोग्राम मोन्टे निडो के मुताबिक, 95 फीसदी डायटिंग फेल हो जाती है और एक से 5 साल में लोग फिर से वजन घटा लेते हैं.
विलपॉवर भी हो जाती है खत्म- डायटिंग करने से इच्छाशक्ति भी कमजोर पड़ने लगती है. आप बार-बार अपना पसंदीदा फूड खाने से खुद को रोकते हैं लेकिन एक समय ऐसा आता है जब आप अपनी विल पॉवर खोने लगते हैं. इन सबसे बचने के लिए आपको सुबह-सवेरे दौड़ना चाहिए. इससे आपकी कैलोरी भी डाउन होंगी.
क्या आप बहुत समय से वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं? क्या आपने अपने मोटापे की वजह से डायट कंट्रोल कर ली है? क्या मोटापा कम करने की आपकी सभी कोशिश बेकार जा रही हैं? अगर हां, तो इसमें आपका दोष नहीं है. जी हां, आज हम आपको हेल्थिस्टा पर छपे कुछ ऐसे कारण बताने जा रहे हैं जिससे आपको पता चलेगा कि इतनी मेहनत के बाद भी आप वजन कम क्यों नहीं कर पा रहे?
अधिक तनाव लेते हैं- जब भी लोग डायटिंग करते हैं तो उन्हें काफी तनाव महसूस होता है और तनाव से वजन खुद-ब-खुद बढ़ने लगता है. दरअसल, डायटिंग के वक्त कुछ किलो वजन कम करने के लिए कैलोरीज की काउंटिंग करना, फूड डायरी मेंटेन करना, लो कार्ब्स फूड खाना काफी स्ट्रेसफुल हो जाता है. एक रिसर्च में ये भी पाया गया है कि कम कैलोरी खाने से स्ट्रेस हर्मोन प्रोड्यूस होता है और स्ट्रेस वजन बढ़ाता है.
दिमाग में कुछ ना कुछ चलता रहता है- आमतौर पर देखा गया है कि जब आप डायटिंग करते हैं तो आपको अपने आसपास यम्मी खाना दिखता है. इसमें आपकी गलती नहीं है बल्कि ये हार्मोंस की वजह से होता है. दरअसल, बॉडी से एक हार्मोन रिलीज होता है जिसे फैट हार्मोन, ओबेसिटी हार्मोन या स्टारवेशन हार्मोन के नाम से जाना जाता है. ये हार्मोन फैट सेल्स प्रोड्यूस करता है और ब्लड के जरिए ब्रेन तक ट्रैवल करता है. ये ब्रेन के एक हिस्से जिसे हाइपोथालामस कहते हैं, को बताता है कि आपके पास कितनी एनर्जी स्टोर है और शरीर को कितने खाने की आवश्यकता है. डायटिंग के कारण स्टोर एनर्जी का लेवल कम हो जाता है और इस हार्मोन का स्तर भी कम हो जाता है जिससे खाने की फोटो और खाना काफी यम्मी और स्वादिष्ट दिखाई पड़ने लगता है.
दिमाग को लगता है कि आप भूखे हो- बहुत से लोग सोचते हैं कि डायटिंग वजन कम करने का बेहतर आइडिया है. लेकिन दिमाग इस बात पर यकीन नहीं करता. ऐसे में हमें हमेशा भूख लगती रहती है. रॉक फैलर यूनिवर्सिटी ने एक रिसर्च की जिसमें ये पता लगाया कि क्या होता है जब मोटे लोग वजन कम करते हैं और कुछ ही समय में इनका वजन दोबारा बढ़ जाता है. नतीजों में पाया गया कि ऐसे लोग एक समय के बाद अपनी डायट हैबिट ब्रेक कर देते हैं और ऐसी चीजें खाते हैं जो उन्हें पसंद हैं और उनका वजन बढ़ाती हैं.