यूपी में छठ पूजा की धूम, वाराणसी और इलाहाबाद में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
इनकी रोशनी से ही प्रकृति में जीवन चक्र चलता है. इनकी किरणों से ही धरती में प्राण का संचार होता है. सूर्य षष्टी या छठ व्रत इन्हीं आदित्य सूर्य भगवान को समर्पित है.
इस त्यौहार की यहां बड़ी मान्यता है. इस महापर्व में देवी षष्ठी माता एवं भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए स्त्री और पुरूष दोनों ही व्रत रखते हैं.
इस त्यौहार को बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश एवं भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.
ऐसा कहा जाता है कि आज के दिन भगवान से मांगी हुई हर मुराद पूरी होती है. इसके लिए सिर्फ मन में सच्ची श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए.
मान्यता के अनुसार भगवान सूर्य जिन्हें आदित्य भी कहा जाता है पृथ्वी पर दिखने वाले प्रत्यक्ष देवताओं में से एक हैं.
छठ पर वाराणसी के घाट पर आस्था का जन सैलाब उमड़ पडा. गंगा की गोद में खड़े होकर हजारों हाथ डूबते हुए सूर्य को इस कामना के साथ विदा कर रहे थे कि कल एक नए तेज के साथ आएंगे और अपनी रौशनी से उनके घर को खुशियों से भर देंगे. इस पूजा में जल और सूर्य का महत्व है.
वाराणसी में विदेशी सैलानी भी छठ पूजा में बढ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं.
इस दौरान श्रद्धालुओं के मन में यही आस्था होती है कि भगवान सूर्य और छठी मैया उनके मन की मुरादे पूरी करें.
Varanasi Evening Chhath Puja 01
काशी के पावन घाटों पर इस पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ता है.
इसी क्रम में वाराणसी में भी भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर लाखों श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन किया.
इस महापर्व में सूर्य नारायण के साथ देवी षष्टी की पूजा भी होती है.
तमाम महिलाओं ने घर से घाट तक का सफ़र लेटकर ही तय किया.
कल सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ये व्रती महिलाएं व्रत का पारण करेंगी.
इनमें तमाम श्रद्धालु देश के दूसरे प्रान्तों से भी आये हुए थे.
संगम के विभिन्न घाटों पर हज़ारों महिलाएं पारंपरिक तौर पर हाथों में डाल लेकर पहुँची और पूजा-अर्चना व मगल गीत के बाद डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया.
महिलाओं के साथ ही घर के पुरुष भी घाटों पर आये हुए थे और उन्होंने भी पूजा में हिस्सा लिया.
इस दौरान गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम में हज़ारों महिलाओं ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर अपने पति-पुत्र व परिवार की सलामती और सुख-समृद्धि की कामना की.
उत्तर प्रदेश का सबसे ज़्यादा आबादी का जिला और संगम का धार्मिक महत्व होने की वजह से छठ पर इलाहाबाद में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
वाराणसी, इलाहाबाद समेत पूरे उत्तर प्रदेश में सूर्य उपासना का पर्व डाला छठ धूमधाम से मनाया गया.