नम आंखों के साथ 'अम्मा' की एक झलक पाने के लिए उमड़ा जनसैलाब
जयललिता के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे से ढका गया है और पुरातात्विक महत्व वाली इमारत राजाजी हॉल की सीढ़ियों पर रखा गया है.
लोग जयललिता की एक झलक पाने के लिए अपनी सहूलियत के अनुसार खिड़कियों, दरवाजों और राजाजी हॉल के पास बने सरकारी सुपर स्पेशियल्टी अस्पतालों के सायबानों और निजी इमारतों पर एकत्र हैं.
चेन्नई के राजाजी हॉल के करीब जो जनसैलाब उमड़ा है, इसकी मिसाल भारत के राजनीतिक इतिहास में जरूर मिलती हैं, लेकिन उसे उंगलियों पर गिना जा सकता है.
तड़के जयललिता का पार्थिव शरीर उनके आवास पोएस गार्डन से राजाजी हॉल लाया गया. तब से यहां लोगों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है. इस स्थान पर पर्याप्त संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया है, लेकिन उसे भी भीड़ को नियंत्रित करने में कठिनाई हो रही है.
पुलिस को किसी भी प्रकार की अनहोनी रोकने के लिए ‘हल्के बल’ का भी प्रयोग करना पड़ रहा है. शोक में डूबे लोगों को लोहे की बाड़ से घिरी दो कतारों के जरिये जयललिता के पार्थिव शरीर के पास तक जाने देने का इंतजाम किया गया है.
लाखों लोग अपनी अम्मा के निधन के शोक में चेन्नई की सकड़ों पर हैं. हर आंख नम है, हर जबान पर जिक्र सिर्फ अम्मा का है. हाथ उठाकर, दामन फैलाकर और कलेजा पीट-पीटकर अम्मा के ग़म में खुद का बुरा हाल बना रखा है.
जयललिता की मौत एक ऐसी मौत है जिस पर पूरा तमिलनाडु मातम में है, हर तरफ शोक की लहर है. लोगों का जनसैलाब अपने लोकप्रिय नेता जिसे वो प्यार से अम्मा कहते हैं. उनके अंतिम दर्शन के लिए राजाजी हॉल के पास इकट्ठा हैं.
शहर के बीचोंबीच, अन्ना सलाई के करीब स्थित राजाजी हॉल में उदासी और दुख के माहौल के बीच, नम आंखें लिए लोग अम्मा की आखिरी झलक पाने के लिए पहुंच रहे हैं.
बता दें कि जयललिता का सोमवार रात 11.30 बजे निधन हो गया था. इसके बाद पूरे तमिलनाडु में शोक की लहर दौड़ गई.
अम्मा के निधन पर रोती हुई महिलाओं सहित भावुक समर्थक पुलिस की ओर से लगाये गये अवरोधक तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. यह लोग उस स्थान तक पहुंचने की कोशिश में हैं, जहां से वह अपनी पसंदीदा हरी साड़ी में लिपटी ‘‘पुराची थलैवी’ को देख सकें.
धर्म, जाति और उम्र की सीमाओं से परे लोग बड़ी संख्या में अपनी प्यारी और श्रद्धेय नेता जे जयललिता को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंच रहे हैं. शहर में सार्वजनिक परिवहन के साधन नहीं चल रहे हैं और ऐसे में लोगों को लंबी दूरी तक पैदल चलने में भी परहेज नहीं है.
जयललिता के निधन के बाद शहर-शहर, गांव-गांव, गलियां-गलियां और डगर-डगर में मातम के सन्नाटे ने अपना कब्जा जमा रखा है.
जिधर नजर दौड़ाए, हर तरफ चीख है, पुकार है, लोगों का रो-रो कर बुरा हाल है.