बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी के बारे में ये दस दिलचस्प बातें नहीं जानते होंगे आप !

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को विवादों का स्वामी कहा जाता है. वह वन मैन आर्मी के नाम से भी मशहूर हैं. स्वामी अमेरिका से अर्थशास्त्र में पीएचडी हैं लेकिन वकालत की पढ़ाई किए बिना ही वो देश के बड़े-बड़े केस की वकालत कर चुके हैं.
स्वामी का कहना था कि वाजपेयी सरकार गिराने के समय सोनिया के साथ ये तय हुआ था कि स्वामी के नेतृत्व में एक गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी सरकार बनेगी लेकिन वाजपेयी सरकार गिरने के बाद सोनिया गांधी खुद अपनी सरकार बनाने की कोशिशों में लग गईं. स्वामी उसके बाद से सोनिया के खिलाफ हो गए.
स्वामी हाल ही में राज्यसभा गए हैं. राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों के कोटे से उन्हें राज्यसभा में एंट्री मिली है. 17 साल बाद स्वामी की संसद में वापसी हुई है.
2जी घोटाला, कोयला घोटाला और नेशनल हेरल्ड घोटाले में कांग्रेस को घसीटने वाले स्वामी ने आगूस्ता हेलिकॉप्टर घूसकांड को लेकर सीधे सोनिया गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
10 अगस्त 1976 को स्वामी इमरजेंसी के खिलाफ लोगों में हिम्मत जगाने के लिए संसद में घुसे. इसके लिए उन्होंने सिख पगड़ी बांधी और अपना हुलिया बदल लिया. उस समय डॉ स्वामी के नाम से वारंट जारी हो चुका था. इसके बाद स्वामी पुलिस को चकमा देते हुए नेपाल के रास्ते अमेरिका चले गए थे.
महज 24 साल की उम्र में उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली. स्वामी जब 27 साल के थे तब उन्होंने हार्वड में गणित पढ़ाना शुरू कर दिया था. वह आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर भी रहे.महज 24 साल की उम्र में उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली. स्वामी जब 27 साल के थे तब उन्होंने हार्वड में गणित पढ़ाना शुरू कर दिया था. वह आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर भी रहे.
लोकसभा में बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है लेकिन राज्यसभा में कांग्रेस की अगुवाई वाला विपक्ष बीजेपी पर भारी पड़ता रहा है. हेलिकॉप्टर घोटाले में स्वामी के बिछाए चक्रव्यूह ने बीजेपी को राज्यसभा में नई सांसें दे दीं हैं. सुब्रमण्यम स्वामी का निशाना सिर्फ एक ही शख्स पर है और वो हैं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी.
स्वामी राम मंदिर के लिए कई बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटा चुके हैं. इसी साल दिल्ली विश्वविद्यालय में राम जन्मभूमि पर एक सेमिनार (श्री राम जन्मभूमि मंदिर : उभरते परिदृश्य) में हिस्सा लिया. जिसका बहुत विरोध हुआ और इस मुद्दे पर फिर से राजनीति गरमा गई.
चीन के राष्ट्राध्यक्ष से पहली ही मुलाकात में उन्होंने तीर्थ यात्रा बहाल करने को कहा. डा. स्वामी से प्रभावित होकर डेंग श्याओपिंग ने फौरन सहमति दे दी. 1981 में कैलाश-मानसरोवर की यात्रा फिर से शुरू हुई और स्वामी ने तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे का नेतृत्व भी किया.
साल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी को सत्ता में आए महज 13 महीने ही हुए थे. स्वामी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री बनना चाहते थे पर कहते हैं लेकिन वाजपेयी इसके लिए तैयार नहीं थे. फिर क्या था. स्वामी ने वाजपेयी सरकार को जयललिता और सोनिया गांधी के साथ मिलकर ध्वस्त कर दिया.
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को विवादों का स्वामी कहा जाता है. वह वन मैन आर्मी के नाम से भी मशहूर हैं. स्वामी अमेरिका से अर्थशास्त्र में पीएचडी हैं लेकिन वकालत की पढ़ाई किए बिना ही वो देश के बड़े-बड़े केस की वकालत कर चुके हैं.