अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर पढ़ें उनकी पॉपुलर कविताएं- जो कल थे वो आज नहीं हैं जो आज हैं वो कल नहीं होंगे
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज जयंती है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था. इसी साल 16 अगस्त को 94 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया था. अटल बिहारी वाजपेयी 2009 से ही लंबी बीमारी से जूझ रहे थे और पिछले करीब 8-9 साल से राजनीति से दूर थे. आज उनकी जयंती के मौके पर आप यहां पढ़ें उनकी मशहूर कविताएं...और साथ ही उनकी वो लाइनें जो काफी मशहूर हैं.
''जो कल थे वो आज नहीं हैं जो आज हैं वो कल नहीं होंगे. होने न होने का क्रम इसी तरह चलता रहेगा. हम हैं हम रहेंगे, ये भ्रम भी सदा पलता रहेगा.''
टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर , पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर, झरे सब पीले पात, कोयल की कूक रात, प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूं. गीत नया गाता हूं.
बाधाएं आती हैं आएं घिरें प्रलय की घोर घटाएं, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा. क़दम मिलाकर चलना होगा.
जीवन की ढलने लगी सांझ, उमर घट गई डगर कट गई, जीवन की ढलने लगी सांझ. बदले हैं अर्थ शब्द हुए व्यर्थ शान्ति बिना खुशियाँ हैं बांझ. सपनों में मीत बिखरा संगीत ठिठक रहे पांव और झिझक रही झांझ. जीवन की ढलने लगी सांझ.