प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार का ध्येय वाक्य 'आत्मनिर्भर भारत' को माना है. इसके लिए केंद्र सरकार 'मेक इन इंडिया' और 'वोकल फॉर लोकल' जैसे उपक्रम लेकर भी आयी है. अभी बिल्कुल हाल ही में प्रधानमंत्री ने सेलिब्रिटीज से शादियां भी भारत में ही करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि शादी का बाजार भारत में बहुत बड़ा है और बाहर जाने से स्थानीय व्यापारियों को नुकसान होता है. मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पर जोर देने के के परिणाम भी दिखने लगे हैं. चालू वित्त वर्ष यानी 2023-24 के पहले सात महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर तक भारत ने 5 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के आईफोन का निर्यात किया है. यह निर्यात पिछले साल की इसी अवधि के दौरान 177 फीसदी बढ़ा है. 


'मेक इन इंडिया' की मच गयी है धूम 


भारत के लिए मोबाइल निर्यात के मामले में एक बड़ी खुशखबरी है. चालू वित्त वर्ष के पहले 7 महीने में 8 अरब डॉलर का कुल मोबाइल-स्मार्टफोन निर्यात हुआ है और इसमें अधिकांश हिस्सा आईफोन का है. अप्रैल से अक्टूबर के दौरान एपल ने भारत से 5 अरब डॉलर से ज्यादा कीमत के आईफोन का निर्यात किया है, यानी भारत में बने आईफोन जो निर्यात हुए, उनकी कीमत 5 अरब डॉलर थी. देश में बने आईफोन का निर्यात पिछले साल की इसी अवधि यानी अप्रैल से अक्टूबर 2022 की तुलना में 177% बढ़ गया है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्ण ने ट्वीट करके यह जानकारी दी. उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि सालाना आधार पर इस क्षेत्र में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. पिछले वित्तीय वर्ष में इसी अवधि में कुल मिलाकर 4.97 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था. अभी के आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल हर महीने औसतन एक अरब डॉलर के मोबाइल फोन का निर्यात किया जा रहा है.



आंकड़ों के मुताबिक एपल कंपनी ने आईफोन बनाने वाली तीन कंपनियों के जरिए भारत से अप्रैल से अक्टूबर 2022 में 1.8 अरब डॉलर कीमत के हैंडसेट का निर्यात किया था. भारत सरकार ने जब से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन या प्रोडक्शन लिंक्ड इनिशिएटिव (पीएलआई) योजना का शुभारंभ किया है, तब से ही मोबाइल फोन के निर्यात में खासी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. एपल ने इस योजना के तीसरे साल में भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई है, इसी वजह से देश से निर्यात होनेवाले स्मार्टफोन में आईफोन की हिस्सेदारी काफी बढ़ी हुई दिख रही है.


मौजूदा वित्त वर्ष यानी 2024 के पहले 7 महीनों में ही आइफोन की हिस्सेदारी कुल स्मार्टफोन में 62 फीसदी की रही और यह ऐतिहासिक उछाल है, क्योंकि पिछले वित्त वर्ष में देश से कुल निर्यात हुए स्मार्टफोन में आईफोन की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत थी. कुल 11 अरब डॉलर के स्मार्टफोन भारत ने पिछले साल निर्यात किए थे. आईफोन के अलावा मुख्य हिस्सेदारी सैमसंग और अन्य ब्रांड्स की रहती है. 



एपल सहित और स्मार्टफोन भी हैं कतार में


भारत सरकार ने जब 38,645 करोड़ रुपए की पीएलआई योजना की घोषणा की, तो एपल ने भारत में ही स्मार्टफोन बनाने पर काम करना शुरू किया और इस पर खासा जोर दिया. उसने इसके बाद ही देश से बड़े पैमाने पर आईफोन का निर्यात भी शुरू किया. भारत में ठेके पर तीन कंपनियां आईफोन बनाती हैं, जो मूलतः ताइवान की हैं. इन कंपनियों के नाम फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन हैं. फॉक्सकॉन ने हाल ही में गुजरात में भारी-भरकम निवेश किया है जबकि विस्ट्रॉन को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने खरीद लिया है.

 

फिलहाल भारत में नवीनतम आईफोन 15 के साथ ही इस सीरीज के 11 तक के फोन बनाए जाते हैं. एपल अपने आईफोन आपूर्तिकर्ताओं का पूरा नेटवर्क बनाता है, जिसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स पहली भारतीय कंपनी होनेवाली है. नवंबर 2023 की शुरुआत में टाटा ने विस्ट्रॉन की असेंबली लाइन में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली है. इसमें टाटा को 12.5 करोड़ डॉलर देने पड़े हैं, जिसके बाद टाटा ने अपनी खरीद को सार्वजनिक किया है. तीनों कंपनियों में फॉक्सकॉन भारत सहित वैश्विक बाजार के लिए आईफोन बनाती है, जबकि पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन के बनाए अधिकांश आईफोन का भारत से निर्यात पिछले वित्त वर्ष में किया गया था.

 

आगे की राह

 

देश में स्मार्टफोन का निर्माण और निर्यात लगातार बढ़ रहा है. यह मेक इन इंडिया और सरकार के प्रयासों से संभव हो पा रहा है. पिछले साल यानी 2022-23 में भारत से स्मार्टफोन का निर्यात लगभग दोगुना रहा था. इस साल यानी 2023-24 में यानी अब तक का जितना निर्यात हुआ है, वह पिछले वित्त वर्ष का 72 फीसदी पहुंच चुका है. पिछले वित्त वर्ष में 11.1 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था. एपल ने पिछले पूरे साल में 5 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि इस वित्त वर्ष में अभी 7 महीनों में ही कंपनी ने यह आंकड़ा पा लिया है.

 

पीएलआई योजना के तहत एपल को वित्त वर्ष 2027 तक अपने 20 प्रतिशत आईफोन भारत में ही बनाने होंगे. पिछले वित्त वर्ष यानी 2023 में कंपनी ने जितने आईफोन भारत में बनाए थे, वह उसकी कुल क्षमता का 7 प्रतिशत ही था. इनमें से भी 60-70 प्रतिशत निर्यात के काम आ जाता है. भारत ने मेक इन इंडिया के तहत जो प्रयास कुछ वर्ष पहले शुरू किए थे, उनका परिणाम अब दिखने लगा है, चाहे वह सामरिक क्षमता हो, युद्ध के अस्रास्त्र हों या फिर मोबाइल फोन का बाजार. भारत के कदम बढ़ रहे हैं और वह अब लगातार प्रगति-पथ पर है.