मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है. हर साल लाखों लोग यहां बेहतर रोजगार और बेहतर जिंदगी की तलाश में आते हैं. लेकिन मानसून आते ही मुंबई की रफ्तार पर सवाल उठने लगते हैं. बारिश के दौरान जलभराव, ट्रैफिक जाम और लोकल ट्रेन सेवाओं पर असर जैसी समस्याएं अक्सर चर्चा में रहती हैं. एबीपी नेटवर्क के इंडिया@2047 कॉन्क्लेव में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने इन्हीं मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने मानसून की तैयारियों, अवैध निर्माण, बढ़ती आबादी, आवास संकट और मुंबई के भविष्य को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी.
अश्विनी भिड़े ने कहा कि अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि बारिश आते ही मुंबई ठहर जाती है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है. उन्होंने बताया कि पिछले साल मुंबई में 125 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई थी, लेकिन लोकल ट्रेन सेवाएं केवल कुछ घंटों के लिए प्रभावित हुई थीं.
उनके मुताबिक बसों के कुछ रूट बदले गए थे, लेकिन शहर का अधिकांश हिस्सा सामान्य रूप से चलता रहा. उन्होंने कहा कि बीएमसी ने कई इलाकों में पानी जमा होने की समस्या को कम करने के लिए बड़े जल भंडारण टैंक बनाए हैं. इसके अलावा जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति पहले की तुलना में काफी कम हुई है.
मुंबई की सबसे बड़ी चुनौती क्या है, इस सवाल पर अश्विनी भिड़े ने कहा कि कोई एक व्यक्ति किसी शहर की समस्याएं हल नहीं कर सकता. बीएमसी एक बड़ा संस्थान है जो करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़े कई जरूरी काम करता है.
उन्होंने कहा कि नागरिकों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना ही उनकी और उनकी पूरी टीम की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. चाहे सड़कें हों, फुटपाथ हों, कचरा प्रबंधन हो या फिर मानसून के दौरान राहत कार्य, हर क्षेत्र में सुधार करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है.
हर दिन हजारों टन कचरे का प्रबंधन बड़ी चुनौती
बीएमसी कमिश्नर ने बताया कि मुंबई जैसे महानगर में हर दिन करीब 7 से 8 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है. यह कचरा शहर के अलग-अलग हिस्सों से इकट्ठा किया जाता है और फिर उसे प्रोसेसिंग साइट तक पहुंचाया जाता है.
उन्होंने कहा कि यह काम सुनने में आसान लगता है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर इसे व्यवस्थित तरीके से करना बेहद चुनौतीपूर्ण है. इसके बावजूद बीएमसी लगातार इस व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है.
मानसून से निपटने के लिए क्या है बीएमसी की तैयारी?
मानसून की तैयारियों पर बोलते हुए अश्विनी भिड़े ने बताया कि बीएमसी ने इस बार भी कई स्तरों पर तैयारी की है. उन्होंने कहा कि शहर के प्रमुख और छोटे नालों की सफाई पूरी कर ली गई है. मुंबई में 8 बड़े पंपिंग स्टेशन और 35 से अधिक छोटे पंपिंग स्टेशन सक्रिय हैं. इसके अलावा 500 से ज्यादा हाई कैपेसिटी पंप लगाए गए हैं, जिन्हें आधुनिक आईओटी तकनीक से जोड़ा गया है.
इन पंपों की निगरानी कंट्रोल रूम से की जाती है. जैसे ही किसी इलाके में पानी जमा होने की स्थिति बनती है, वहां से पानी निकालने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जा सकती है.
'लो-लाइंग इलाकों में जलभराव रोकना संभव नहीं'
बीएमसी कमिश्नर ने माना कि मुंबई के कुछ निचले इलाकों में भारी बारिश और हाई टाइड के दौरान पानी भरना पूरी तरह रोका नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि समुद्र से घिरे शहर होने के कारण कुछ प्राकृतिक सीमाएं हैं. लेकिन बीएमसी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पानी जल्दी निकले और लोगों को कम से कम परेशानी हो.
खतरनाक इमारतों को लेकर भी सतर्कता
मुंबई में हर साल कई पुरानी और जर्जर इमारतें खतरा बनती हैं. इस पर अश्विनी भिड़े ने कहा कि बीएमसी लगातार ऐसी इमारतों की पहचान करती है. उन्होंने बताया कि सी-1 श्रेणी की इमारतों को सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है और उन्हें खाली कराना जरूरी होता है. हालांकि कई बार निवासी अदालत से स्थगन आदेश ले आते हैं, जिससे कार्रवाई में देरी होती है.
बीएमसी ऐसे मामलों में अदालत का रुख करती है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए जागरूक भी करती है. उनका कहना था कि मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.
अवैध निर्माण क्यों नहीं रुकते?
मुंबई में अवैध निर्माण और अतिक्रमण का मुद्दा हमेशा चर्चा में रहता है. इस पर बीएमसी कमिश्नर ने कहा कि यह सिर्फ मुंबई नहीं बल्कि लगभग हर बड़े शहर की समस्या है.
उन्होंने कहा कि जमीन की कमी और महंगी भूमि कीमतों के कारण लोग रहने और रोजगार के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशते हैं. इसी वजह से कई बार अवैध निर्माण और अतिक्रमण सामने आते हैं.
अश्विनी भिड़े ने बताया कि बीएमसी के 26 वार्डों में लगातार ऐसी संरचनाओं के खिलाफ कार्रवाई होती रहती है. लेकिन यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है.
'हॉकर्स और झुग्गियों का मुद्दा सिर्फ कानून नहीं'
बीएमसी कमिश्नर ने कहा कि सड़क किनारे दुकान लगाने वाले हॉकर्स और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग भी शहर की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं. उनका कहना था कि जब तक इन लोगों के लिए उचित विकल्प नहीं तैयार किए जाते, तब तक केवल कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता. इसलिए सरकार और स्थानीय प्रशासन विभिन्न योजनाओं के जरिए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं.
मुंबई की बढ़ती आबादी को लेकर पूछे गए सवाल पर अश्विनी भिड़े ने कहा कि शहर का भविष्य केवल प्रशासन नहीं तय करता, बल्कि अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा भी इसे प्रभावित करती है.
उन्होंने कहा कि मुंबई अब सिर्फ एक औद्योगिक शहर नहीं रह गया है. यह वित्तीय सेवाओं, मनोरंजन, आतिथ्य और सूचना-प्रौद्योगिकी गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन चुका है. अश्विनी भिड़े के अनुसार सरकार अब केवल मुंबई शहर नहीं बल्कि पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) को ध्यान में रखकर विकास योजनाएं बना रही है.
उन्होंने बताया कि नीति आयोग की मदद से एमएमआर के लिए ग्रोथ हब योजना तैयार की गई है. इसका उद्देश्य महाराष्ट्र को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करना है.
उन्होंने कहा कि वर्तमान में एमएमआर का आर्थिक योगदान करीब 160 अरब डॉलर है, जिसे बढ़ाकर 300 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
अटल सेतु और तीसरी मुंबई का विजन
बीएमसी कमिश्नर ने कहा कि अटल सेतु जैसे बड़े प्रोजेक्ट मुंबई के बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे. उनके मुताबिक ट्रांस हार्बर लिंक बनने के बाद मुंबई के बाहर के क्षेत्रों तक पहुंच आसान हुई है. इन इलाकों में नए विकास केंद्र तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें लोग भविष्य की "तीसरी मुंबई" के रूप में देख रहे हैं.
उन्होंने कहा कि बेहतर परिवहन सुविधाओं के कारण लोग मुंबई से कुछ दूरी पर रहकर भी आर्थिक अवसरों का लाभ उठा सकेंगे.
मुंबई में घर खरीदना क्यों मुश्किल है?
आवास के मुद्दे पर अश्विनी भिड़े ने कहा कि मुंबई में घरों की ऊंची कीमतों का सबसे बड़ा कारण जमीन की कीमत है. उन्होंने कहा कि निर्माण लागत लगभग हर शहर में समान होती है, लेकिन मुंबई में जमीन बेहद महंगी है. यही वजह है कि यहां मकानों की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाती हैं.
झुग्गी पुनर्विकास से बदली तस्वीर
उन्होंने बताया कि दो दशक पहले मुंबई की करीब 70 से 75 प्रतिशत आबादी झुग्गियों में रहती थी. अब यह आंकड़ा घटकर लगभग 50 प्रतिशत रह गया है. इसका श्रेय स्लम पुनर्वास योजनाओं को जाता है, जिनके तहत लाखों लोगों को नए घर मिले हैं. सरकार अब क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल पर ज्यादा जोर दे रही है ताकि बड़े स्तर पर पुनर्विकास किया जा सके.
अश्विनी भिड़े ने कहा कि मुंबई महानगर क्षेत्र में 10 लाख से ज्यादा नए घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इनमें स्लम पुनर्वास परियोजनाएं, म्हाडा योजनाएं और किफायती आवास योजनाएं शामिल हैं. उनका मानना है कि बड़े क्लस्टर आधारित विकास मॉडल से बेहतर सड़कें, सार्वजनिक सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा भी विकसित होगा.
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बीएमसी कमिश्नर ने कहा कि मुंबई कभी पूरी तरह तैयार हो जाने वाला शहर नहीं है. यह एक जीवंत और लगातार बदलने वाला महानगर है. उन्होंने कहा कि जहां-जहां मेट्रो पहुंच रही है, वहां पुनर्विकास की रफ्तार बढ़ रही है. दक्षिण मुंबई से लेकर उपनगरों तक नए आवास, नई तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के साथ बदलाव दिखाई दे रहा है.
उनका कहना था कि किसी भी शहर की असली पहचान उसके निरंतर विकास में होती है. मुंबई भी उसी दिशा में आगे बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इसकी तस्वीर और ज्यादा आधुनिक तथा व्यवस्थित दिखाई देगी.
