वाराणसी: भारतीय संस्कृति और परंपरा की अमिट छाप सात समुंदर पार के विदेशियों को हमेशा अपनी तरफ आकर्षित करती है. भारतीय संस्कृति और परंपरा एक विदेशी जोड़े को ऐसी पसंद आई कि दोनों गंगा तट पर हिंदू परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार दोनों शादी के बंधन में बंध गए.
वाराणसी में एक विदेशी जोड़े ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अनुसार वैवाहिक परिणय सूत्र में बंधे. पांच बार भारत आ चुके रेयूनिया की लोंदिया और फ्रांस के मारिन पहली बार काशी घूमने आए. ये दोनों यहां की संस्कृति सभ्यता से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने दोबारा फिर से हिंदू रीति रिवाज से अपनी शादी करने का फैसला किया और आज दोनों ने गंगा घाट के किनारे शिवाला के एक गेस्ट हाउस में अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए.
इस विदेशी जोड़े का एक 14 महीने का बेटा भी है. लोद्रियां रेयूनियां के रहने वाले हैं और वह अपना बिजनेस करते हैं. रेयूनियां में काफी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं और वहां काली पूजा, शिव पूजा भी की जाती है. यह सारी खूबियां देखने के बाद जब वो भारत आए तो यहां की संस्कृति ने उनका मन मोह लिया. खासकर काशी में आकर वो काफी प्रभावित हुए और फिर यहीं पर हिंदू रीति रिवाज के अनुसार शादी करने की योजना बनाई.
भारतीय सभ्यता और संस्कृति ने विदेशी जोड़े को इतना प्रभावित किया कि वो भारतीय संस्कृति हिंदू रीति रिवाज के मुताबिक विवाह करके एक दूसरे के बंधन में बंध गए. 3 घंटे के वैवाहिक कार्यक्रम में सारे रीति रिवाज को बड़े अच्छे तरीके से किया गया जो एक भारतीय परंपरा के अनुसार हिंदू शादी में होते हैं. ताक पात, सिंदूर दान, फेरे और कन्यादान आदि जैसे मुख्य नियमों के अनुसार वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ. ये विदेशी प्रेमी जोड़े भारतीय संस्कृति के अनुसार शादी के बंधन में बनंधकर काफी खुश नजर आए. वाराणसी के शिवाला इलाके के एक गेस्ट हाउस में इस विदेशी जोड़े ने शादी की.
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