<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>Oxytocin Health Risks: RML में सब-स्टैंडर्ड ऑक्सीटोसिन की 2700 वायल फेल, जानें क्यों है यह दवा आपके लिए जानलेवा?</title><atom:link href="https://www.abplive.com/health/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Fri, 10 Jul 2026 13:10:12 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[Ginger Turmeric Tea: मानसून में सर्दी-खांसी से रहना है दूर? रोज पिएं अदरक-हल्दी की ये गर्म चाय]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-ginger-turmeric-tea-natural-remedy-for-cold-and-cough-during-monsoon-health-tips-3157530</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-ginger-turmeric-tea-natural-remedy-for-cold-and-cough-during-monsoon-health-tips-3157530#respond</comments><pubDate>Fri, 10 Jul 2026 01:05:05 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-ginger-turmeric-tea-natural-remedy-for-cold-and-cough-during-monsoon-health-tips-3157530</guid><description><![CDATA[Ginger Turmeric Tea: मानसून में सर्दी-खांसी से रहना है दूर? रोज पिएं अदरक-हल्दी की ये गर्म चाय]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/09/55f301b264ec6daed32b7472d3a4b87417836153652021120_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Delhi Health Report: दिल्ली में नवजात मौतें घटीं, लेकिन मातृ मृत्यु दर बढ़ी; सरकारी रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/delhi-state-indicator-framework-2025-report-neonatal-mortality-down-maternal-deaths-rise-3157255</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/delhi-state-indicator-framework-2025-report-neonatal-mortality-down-maternal-deaths-rise-3157255#respond</comments><pubDate>Thu, 9 Jul 2026 16:19:45 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/delhi-state-indicator-framework-2025-report-neonatal-mortality-down-maternal-deaths-rise-3157255</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Delhi Health Report:&lt;/strong&gt; दिल्ली सरकार ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट का नाम &quot;दिल्ली स्टेट इंडिकेटर फ्रेमवर्क: स्टेटस रिपोर्ट 2025&quot; है, जिसे सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों यानी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स की दिशा में साल 2030 तक दिल्ली की प्रगति पर नजर रखने के लिए तैयार किया है. सरकार का मकसद है कि इस रिपोर्ट की मदद से नीति बनाने वालों को यह पता चल सके कि किन क्षेत्रों में सुधार हुआ है और कहां अभी भी काम करने की जरूरत है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नवजातों की मृत्युदर घटी, माताओं की बढ़ी&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में नवजात मृत्यु दर में सुधार देखने को मिला है. 2015 में दिल्ली के अंदर नवजात मृत्यु दर 1000 बच्चों में 15.8 थी, जो 2024 में घटकर 14.1 रह गई है. हालांकि, दूसरी तरफ मातृ मृत्यु दर के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. साल 2015 में हर एक लाख जीवित जन्मों पर 37 महिलाओं की मौत होती थी, जो अब बढ़कर 44 हो गई है. यह बढ़ोतरी तब हुई है जब अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की निगरानी में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं की संख्या 2015 के 84.4 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 96.1 प्रतिशत हो चुकी है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;स्वास्थ्य के अलावा रिपोर्ट में शिक्षा, गरीबी और रोजगार के क्षेत्र में भी सुधार की बात कही गई है. दिल्ली के स्कूलों में अब बिजली और डिजिटल सुविधाएं लगभग सभी जगह पहुंच चुकी हैं, वहीं उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या भी बढ़ी है. हालांकि, बच्चों के पोषण से जुड़े आंकड़े मिले-जुले रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से चली आ रही कुपोषण की समस्या तो कम हुई है, लेकिन कम वजन वाले बच्चों की संख्या में खास बदलाव नहीं आया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/gen-z-vs-millennials-is-gen-z-healthier-than-millennials-a-new-report-reveals-3157012&quot;&gt;&lt;strong&gt;Gen Z vs Millennials : क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z? नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पर्यावरण के मोर्चे पर भी सुधार&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पर्यावरण के क्षेत्र में भी दिल्ली ने कुछ बेहतर काम किए हैं. जैसे कचरा प्रबंधन में सुधार हुआ है और अब पहले से कहीं ज्यादा कचरे का सही तरीके से निपटारा किया जा रहा है. &amp;nbsp;साथ ही वायु प्रदूषण में भी दस साल पहले के मुकाबले थोड़ी कमी आई है, हालांकि यह अभी भी तय मानकों से काफी ज्यादा बना हुआ है. &amp;nbsp;इसके साथ ही दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जो 2015-16 में सिर्फ 24 हजार 420 थी और अब 2024-25 में बढ़कर 4 लाख से ज्यादा हो चुकी है. एक अधिकारी ने कहा कि कुल मिलाकर दिल्ली ने कई सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों में अच्छी प्रगति की है, लेकिन मातृ और नवजात मृत्यु दर के आंकड़े यह दिखाते हैं कि मां और बच्चों के स्वास्थ्य पर अभी और ध्यान देने की जरूरत है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/from-fatigue-to-weak-nails-warning-signs-of-nutrient-deficiency-3122052&quot;&gt;&lt;strong&gt;Vitamin Deficiency Symptoms: क्या पूरी नींद लेने के बाद भी छाई रहती है थकान? इग्नोर किया तो हो सकती है गंभीर बीमारी!&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/09/34546ee103bfac6d20f21956055815d817835914024551381_original.jpeg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Pregnant Women Health: गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक हैं ये कॉस्मेटिक्स, AIIMS की रिसर्च में बड़ा खुलासा]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/aiims-study-pregnancy-cosmetics-plastic-danger-tips-3157267</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/aiims-study-pregnancy-cosmetics-plastic-danger-tips-3157267#respond</comments><pubDate>Thu, 9 Jul 2026 15:25:04 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/aiims-study-pregnancy-cosmetics-plastic-danger-tips-3157267</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Harmful Chemicals In Cosmetics:&lt;/strong&gt; गर्भावस्था के दौरान इस्तेमाल होने वाले कॉस्मेटिक्स, प्लास्टिक और कुछ पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स को लेकर एक नई स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस , नई दिल्ली की अगुवाई में हुई संयुक्त रिसर्च में पाया गया है कि गर्भवती महिलाओं के शरीर में ऐसे रसायनों की मात्रा बढ़ रही है, जो हार्मोन के सामान्य कामकाज में बाधा डाल सकते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि ये केमिकल मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर भी लंबे समय तक असर डाल सकते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कब होता है इनका यूज?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिसर्च के दौरान 641 स्वस्थ गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया. गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों में उनके यूरिन सैंपल लेकर जांच की गई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शरीर में इन रसायनों की मौजूदगी कितनी है. जांच में सबसे ज्यादा मात्रा मिथाइलपैराबेन &amp;nbsp;की मिली. यह एक ऐसा प्रिजर्वेटिव है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर कॉस्मेटिक्स, स्किन केयर प्रोडक्ट्स, लोशन, शैंपू और कई अन्य पर्सनल केयर उत्पादों में किया जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मोनोएथाइल फ्थेलेट की मात्रा भी अधिक&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा शोधकर्ताओं को मोनोएथाइल फ्थेलेट &amp;nbsp;भी अधिक मात्रा में मिला. यह रसायन प्लास्टिक से बने उत्पादों और सिंथेटिक खुशबू वाले कई सामानों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है. साइंटिस्ट के अनुसार, ये दोनों एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स की श्रेणी में आते हैं, जो शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें- &lt;a title=&quot;क्या पूरी नींद लेने के बाद भी छाई रहती है थकान? इग्नोर किया तो हो सकती है गंभीर बीमारी!&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/from-fatigue-to-weak-nails-warning-signs-of-nutrient-deficiency-3122052&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;क्या पूरी नींद लेने के बाद भी छाई रहती है थकान? इग्नोर किया तो हो सकती है गंभीर बीमारी!&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दूसरी तिमाही के दौरान इन रसायनों का स्तर सबसे अधिक&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;स्टडी में यह भी सामने आया कि गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान इन रसायनों का स्तर सबसे अधिक पाया गया. एम्स के रिसर्चर तरंग गुप्ता के अनुसार, यही वह समय होता है जब गर्भ में पल रहे शिशु के अंगों और शरीर का तेजी से विकास होता है. ऐसे संवेदनशील दौर में हार्मोन के कामकाज में दखल देने वाले रसायनों का ज्यादा संपर्क भविष्य में बच्चे के स्वास्थ्य पर निगेटिव असर डाल सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एम्स के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर राजेश खड़गावत ने बताया कि जिन महिलाओं में इन रसायनों का स्तर अधिक था, उनके नवजात शिशुओं में जन्म के समय वजन, लंबाई और विटामिन-डी के स्तर पर भी असर देखने को मिला. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्टडी इन संबंधों की ओर संकेत करता है, लेकिन इसे पूरी तरह स्थापित करने के लिए बड़े स्तर पर और विस्तृत रिसर्च की जरूरत होगी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सख्त नियम बनाए जाने की आवश्यकता&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक्सपर्ट भारत में इन रसायनों के उपयोग और उनकी निगरानी को लेकर सख्त नियम बनाए जाने की आवश्यकता है. इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को यह जानकारी देना भी जरूरी है कि प्लास्टिक के अत्यधिक इस्तेमाल और कुछ कॉस्मेटिक उत्पादों में मौजूद रसायन संभावित जोखिम पैदा कर सकते हैं. ऐसे में जहां तक संभव हो, सुरक्षित और कम रसायन वाले पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स का चयन करना बेहतर विकल्प हो सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/heart-fights-cancer-new-study-explains-protection-mechanism-know-how-heart-prevention-cancer-3121322&quot;&gt;Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/09/0e13b861f711c1732a9c740072121e0d17835865058491257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Intermittent Fasting Risks: क्या आप भी करते हैं 16:8 फास्टिंग? रिसर्च का ये डराने वाला सच जान लें]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/intermittent-fasting-risks-new-study-links-extreme-fasting-to-heart-problems-3121925</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/intermittent-fasting-risks-new-study-links-extreme-fasting-to-heart-problems-3121925#respond</comments><pubDate>Thu, 9 Jul 2026 12:24:04 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/intermittent-fasting-risks-new-study-links-extreme-fasting-to-heart-problems-3121925</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Can Intermittent Fasting Increase Heart Disease Risk:&lt;/strong&gt; आजकल उपवास सिर्फ धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फिटनेस की दुनिया में भी तेजी से लोकप्रिय हो गया है. 16:8 जैसे तरीकों से लेकर दिन में एक बार खाने तक, लोगों को यह आसान तरीका लगता है कम खाओ, जल्दी वजन घटाओ और बेहतर महसूस करो. शुरूआती दौर में कई लोगों को इसके फायदे भी दिखे, जैसे वजन कम होना, शुगर नियंत्रण में रहना और कोलेस्ट्रॉल घटाना. लेकिन अब नई रिसर्च इस ट्रेंड को लेकर कुछ गंभीर सवाल खड़े कर रही है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;क्या निकला रिसर्च में?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हाल ही में 20 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए एक एनालिसिस में पाया गया कि जो लोग दिन में सिर्फ 8 घंटे या उससे कम समय में खाना खाते हैं, उनमें दिल से जुड़ी बीमारियों से मौत का खतरा ज्यादा देखा गया. &amp;nbsp;कुछ मामलों में यह खतरा 91 प्रतिशत तक अधिक पाया गया. इसका मतलब यह नहीं है कि उपवास हर किसी के लिए नुकसानदायक है, लेकिन यह धारणा जरूर चुनौती में आ गई है कि कम समय में खाना हमेशा बेहतर होता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/government-schemes-for-farmers-pm-kisan-yojana-pm-fasal-bima-yojana-and-kcc-scheme-will-brighten-the-fortunes-of-farmers-know-the-applying-process-3120655&quot;&gt;सरकार की इन योजनाओं से किसानों की चमकेगी किस्मत, जानें कैसे उठाएं लाभ&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;क्या कहते हैं एक्सपर्ट?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;डॉ. दिव्य रंजन बेहेरा ने TOI को बताया कि लंबे समय तक उपवास रखने से शरीर में अचानक कई बदलाव होते हैं. खून में शर्करा का स्तर तेजी से घटता-बढ़ता है, तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ते हैं और वसा का स्तर भी प्रभावित होता है. &amp;nbsp;ये सभी बदलाव दिल पर दबाव डाल सकते हैं. वहीं डॉ. दीतेश एम के अनुसार, लंबे अंतराल तक भोजन न करने से शुगर, खनिज तत्व और हार्मोन में उतार-चढ़ाव होता है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पानी की कमी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक और बड़ा कारण है पानी की कमी, जब लोग लंबे समय तक नहीं खाते, तो अक्सर पानी भी कम पीते हैं. &amp;nbsp;इससे शरीर में जरूरी खनिज जैसे पोटैशियम और मैग्नीशियम घट सकते हैं, जो दिल की सामान्य धड़कन के लिए जरूरी होते हैं. &amp;nbsp;डॉ. सुनील रॉय टी एन बताते हैं कि इन खनिजों की कमी और पानी की कमी से दिल को सामान्य गति बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;किन लोगों को रखनी चाहिए सावधानी&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हर व्यक्ति के लिए उपवास समान रूप से सुरक्षित नहीं है. &amp;nbsp;जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाई बीपी या हार्ट से जुड़ी समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, इसके अलावा जो लोग कुछ विशेष दवाइयां लेते हैं, उनके लिए भी यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है. हेल्दी व्यक्ति भी शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं कर सकते, बार-बार थकान, चक्कर आना, सीने में असहजता या धड़कन तेज होना जैसे लक्षण इस बात का संकेत हैं कि शरीर पर दबाव बढ़ रहा है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जरूरत से ज्यादा सख्ती बरतने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की थकान बढ़ सकती है. कम ऊर्जा, चिड़चिड़ापन और काम करने की क्षमता में कमी जैसे असर धीरे-धीरे सामने आने लगते हैं. इसलिए संतुलन सबसे जरूरी है. &amp;nbsp;उपवास अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा सख्त या बिना योजना के किया जाता है, तब समस्या पैदा होती है। सही तरीका यही है कि खानपान में संतुलन रखा जाए और किसी भी बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह ली जाए.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/tomato-farming-tips-scorching-heat-will-not-affect-the-tomato-crop-adopt-this-technique-and-get-bumper-yields-even-in-the-summer-3120613&quot;&gt;झुलसती लू का टमाटर की फसल पर नहीं होगा असर, अपनाएं ये तकनीक और गर्मी में भी पाएं बंपर पैदावार&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/29/cdaf3980dc87d66a64710068f39f68b017774514841651257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Vitamin Deficiency Symptoms: क्या पूरी नींद लेने के बाद भी छाई रहती है थकान? इग्नोर किया तो हो सकती है गंभीर बीमारी!]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/from-fatigue-to-weak-nails-warning-signs-of-nutrient-deficiency-3122052</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/from-fatigue-to-weak-nails-warning-signs-of-nutrient-deficiency-3122052#respond</comments><pubDate>Thu, 9 Jul 2026 11:45:01 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/from-fatigue-to-weak-nails-warning-signs-of-nutrient-deficiency-3122052</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Early Signs Of Vitamin Deficiency You Should Not Ignore:&lt;/strong&gt; अगर आप अक्सर थकान महसूस करते हैं या आपके नाखून जल्दी टूट जाते हैं, तो यह शरीर का संकेत हो सकता है कि अंदर कुछ कमी चल रही है. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में खराब खानपान, ज्यादा तनाव और पैकेट वाले खाने की आदत के कारण पोषण की कमी आम होती जा रही है. &amp;nbsp;दिक्कत यह है कि ये समस्याएं धीरे-धीरे सामने आती हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या कहते हैं एक्सपर्ट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में आंतरिक रोग एक्सपर्ट डॉ. मोहित शर्मा ने TOI को बताया कि पोषण की कमी लोगों की सोच से ज्यादा आम है, खासकर शहरों में. उनके अनुसार इसके लक्षण अक्सर हल्के और सामान्य होते हैं, इसलिए सही समय पर पहचानना मुश्किल हो जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या होते हैं इसके लक्षण?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सबसे पहला संकेत है लगातार थकान महसूस होना. अगर पूरी नींद लेने के बाद भी शरीर में सुस्ती बनी रहती है, तो यह शरीर में जरूरी तत्वों की कमी का इशारा हो सकता है. &amp;nbsp;यह स्थिति धीरे-धीरे काम करने की क्षमता और एनर्जी दोनों को प्रभावित करने लगती है. &amp;nbsp;दूसरा संकेत है बालों का जरूरत से ज्यादा झड़ना. &amp;nbsp;&lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; बदलने पर थोड़ा बहुत बाल गिरना सामान्य है, लेकिन अगर यह लगातार और ज्यादा हो रहा है, तो यह अंदरूनी कमी का असर हो सकता है. बालों की जड़ों को सही पोषण न मिलने पर उनका प्राकृतिक विकास चक्र बिगड़ने लगता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/food-poisoning-watermelon-eating-death-family-jharkhand-gol-gapped-cause-death-which-food-have-to-eat-explained-3121531&quot;&gt;Explained: मुंबई में तरबूज तो झारखंड में गोलगप्पे खाने से मौत! किन खानों से होती फूड पॉइजनिंग, आखिर खाएं क्या?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये भी होते हैं संकेत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;तीसरा संकेत है मुंह में बार-बार छाले होना या होंठों का फटना. &amp;nbsp;अक्सर लोग इसे छोटी समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह भी शरीर में पोषण की कमी का संकेत हो सकता है. केवल बाहरी उपचार से राहत मिलती है, लेकिन असली कारण अंदर ही रहता है. चौथा संकेत है हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना. यह एक ऐसा लक्षण है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह नसों पर असर का संकेत हो सकता है. &amp;nbsp;समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पांचवां संकेत है त्वचा का पीला पड़ना और नाखूनों का कमजोर होना. &amp;nbsp;अगर चेहरा फीका दिखने लगे या नाखून बार-बार टूटने लगें, तो यह भी शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी की ओर इशारा करता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे पता कर सकते हैं आप?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डॉ. मोहित शर्मा के अनुसार, अच्छी बात यह है कि ऐसी कमी का पता एक साधारण खून की जांच से चल सकता है. सही समय पर खानपान में बदलाव या जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट लेने से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है. शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को समझना ही बेहतर सेहत की पहली सीढ़ी है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/heart-fights-cancer-new-study-explains-protection-mechanism-know-how-heart-prevention-cancer-3121322&quot;&gt;Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/09/e684c3b7be8cefb9accd5eef0ddabe0d17835753530791257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Gen Z vs Millennials : क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z? नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/gen-z-vs-millennials-is-gen-z-healthier-than-millennials-a-new-report-reveals-3157012</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/gen-z-vs-millennials-is-gen-z-healthier-than-millennials-a-new-report-reveals-3157012#respond</comments><pubDate>Thu, 9 Jul 2026 06:05:50 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/gen-z-vs-millennials-is-gen-z-healthier-than-millennials-a-new-report-reveals-3157012</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Gen Z vs Millennials : &lt;/strong&gt;आज की नई जनरेशन पहले से कहीं ज्यादा हेल्थ कॉन्शियस नजर आती है. सोशल मीडिया पर फिटनेस, हेल्दी डाइट, अच्छी नींद, मानसिक स्वास्थ्य और योग जैसी चीजों पर लगातार बात होती रहती है. खासकर Gen Z अपनी फिटनेस और वेलनेस को लेकर काफी जागरूक दिखाई देती है. वहीं Millennials को अक्सर लंबे समय तक काम करने, तनाव और थकान से जूझने वाली पीढ़ी के रूप में देखा जाता है. लेकिन क्या सिर्फ हेल्थ की जानकारी होना ही अच्छी सेहत की निशानी है. विशेषज्ञों और नई रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z केबीच फिटनेस और वेलनेस को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसका नहीं कहा जा सकता है कि Gen Z पूरी तरह Millennials से ज्यादा हेल्दी है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विशेषज्ञों के मुताबिक Gen Z मानसिक स्वास्थ्य, फिटनेस, अच्छी नींद और बीमारी से बचाव को लेकर पहले की पीढ़ी के मुकाबले ज्यादा खुलकर बात करती है. वहीं Millennials ने योग, हेल्दी खाना, जिम, मेडिटेशन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसी चीजों को फेमस बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. इसके बाद Gen Z ने इन्हीं आदतों को आगे बढ़ाया और थेरेपी, बर्नआउट, भावनात्मक स्वास्थ्य और प्रिवेंटिव हेल्थ जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा शुरू की. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि जागरूक होना और सच में स्वस्थ होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हेल्थ को लेकर Gen Z और Millennials क्या देखते हैं?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;Millennials की फिटनेस का मेन गोल अक्सर वजन कम करना और दिखने में फिट लगना होता था. वहीं Gen Z अब सिर्फ वजन पर नहीं, बल्कि मसल्स, बॉडी कंपोजिशन और शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी पर ज्यादा ध्यान देती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव पॉजिटिव है. हालांकि उनका कहना है कि हेल्थ को लेकर जरूरत से ज्यादा जागरूकता भी कई बार तनाव की वजह बन जाती है. आज कई युवा इस बात को लेकर भी तनाव में रहते हैं कि उन्हें हर समय सही खानपान और अच्छी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विशेषज्ञों के अनुसार आज की युवा पीढ़ी में कई ऐसी बीमारियां पहले की तुलना में कम उम्र में देखने को मिल रही हैं, जो पहले आमतौर पर ज्यादा उम्र में होती थीं. डॉक्टरों का कहना है कि अब 30 से 40 साल की उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और यहां तक कि हार्ट अटैक के मामले भी सामने आ रहे हैं. इसके पीछे लगातार तनाव, नींद की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी जैसी वजहें बताई गई हैं. इसके अलावा चिंता, डिप्रेशन, अनिद्रा, मोटापा, पीसीओएस और शुरुआती डायबिटीज जैसी समस्याएं भी युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रही हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें - &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/yoga-for-neck-pain-which-5-yoga-asanas-can-reduce-morning-neck-pain-relief-completely-3156855&quot;&gt;Yoga for Neck Pain : सुबह के गर्दन दर्द को जड़ से खत्म कर सकते हैं योगा के 5 आसन, आज ही कर दें शुरू&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करती है Gen Z&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विशेषज्ञों का कहना है कि Gen Z मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पहले की पीढ़ियों की तुलना में कहीं ज्यादा खुली सोच रखती है. यह पीढ़ी जरूरत पड़ने पर थेरेपी लेने और मदद मांगने में झिझक महसूस नहीं करती है. डॉक्टरों के अनुसार आज मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पहले से ज्यादा सामने इसलिए भी आ रही हैं. अब लोग इन्हें छिपाने की जगह एक्सेप्ट कर रहे हैं. साथ ही जागरूकता बढ़ी है, इलाज लेने की इच्छा बढ़ी है और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में एक्सेप्ट भी पहले से बेहतर हुई है. हालांकि मॉर्डन लाइफस्टाइल, लगातार तनाव, कम नींद, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, लगातार स्क्रीन पर समय बिताना और सामाजिक परेशानी जैसी वजहों से मानसिक दबाव भी बढ़ा है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;डिजिटल लाइफस्टाइल भी बन रही है चुनौती&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विशेषज्ञों के मुताबिक Millennials और Gen Z के तनाव से निपटने के तरीके भी अलग है. Millennials पुराने गाने सुनकर या पुरानी यादों को याद करके खुद को बेहतर महसूस करने की कोशिश करते हैं. वहीं Gen Z अक्सर लगातार मोबाइल स्क्रॉल करने यानी डूम स्क्रॉलिंग को अपना सहारा बना लेती है. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार ऑनलाइन रहना, सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करना, हर समय अपडेट रहने का दबाव और कुछ छूट जाने का डर भी मानसिक थकान और बर्नआउट की बड़ी वजह बन रहा है. पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन जीवन के बीच कुछ दूरी रहती थी, लेकिन अब यह अंतर काफी कम हो गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt; &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/oxytocin-injection-side-effects-health-risks-oxytocin-injection-ke-side-effects-3156732&quot;&gt;Oxytocin Health Risks: RML में सब-स्टैंडर्ड ऑक्सीटोसिन की 2700 वायल फेल, जानें क्यों है यह दवा आपके लिए जानलेवा?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/08/2deb57d1fca140e99eac4c7f22bbb81617835282389631120_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Ear Care Tips: क्यों बारिश के मौसम में बंद हो जाते हैं कई लोगों के कान, जानिए इससे छुटकारा पाने के घरेलू उपाय]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/ear-blockage-and-pain-in-rainy-season-home-remedies-3157003</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/ear-blockage-and-pain-in-rainy-season-home-remedies-3157003#respond</comments><pubDate>Wed, 8 Jul 2026 22:38:46 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/ear-blockage-and-pain-in-rainy-season-home-remedies-3157003</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Ear Care Tips:&lt;/strong&gt; महीनों भर की चिलचिलाती धूप और गर्मी के बाद बरसात ने अब दस्तक देना शुरू कर दिया है. बारिश का मौसम आते ही हर जगह ठंडी-ठंडी हवा चलने लगती है. इसका कारण है कि बरसात के मौसम आते ही हवा में नमी का बढ़ जाना. जितना ही यह मौसम चिलचिलाती गर्मी के बाद राहत देता है, उतना ही यह पल कई लोगों को परेशान भी करता है.&amp;nbsp; कई लोगों की शिकायत रहती है कि बरसात के &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में उनके कानों में दर्द होने लगता है, जिसके पीछे की वजह उन्हें समझ नहीं आती कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. ऐसे में आपको बता दें कि हवा में नमी कानों की सेहत के लिए मुश्किल पैदा करती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;माना जाता है कि हमारे कानों के अंदर का हिस्सा हमेशा सूखा रहना चाहिए, लेकिन बरसात में लगातार नमी के कारण कान में मौजूद वैक्स नरम होने लगती है और उसके काम करने की क्षमता में रुकावटें आती हैं.&amp;nbsp;साथ ही जिन लोगों को कान से जुड़ी समस्या होती है, उनके कान में बैक्टीरिया और फंगस बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है. कई मामलों में कान में दर्द होने का कारण कोई बड़ी बीमारी नहीं होती है. कई बार सर्दी-जुकाम या फिर एलर्जी की वजह से भी कान में दर्द होने लगता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कानों को नमी से बचाने के आसान तरीके&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों को कानों से जुड़ी परेशानी है, उन्हें सबसे पहले तो बारिश में भीगना नहीं चाहिए और अगर भीग जाएं ,तो उन्हें कानों को अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए. वहीं अगर हर उपाय अपनाने के बाद भी कान में पानी महसूस हो, तो उसको सुखाने के लिए हेयर ड्रायर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/kolkata-school-mid-day-meal-egg-vs-dal-rotein-comparison-and-impact-on-children-nutrition-3156184&quot;&gt;&lt;strong&gt;Egg Vs Dal: दाल-सब्जी के मुकाबले एक अंडे से कितना मिलता है प्रोटीन, बच्चों के पोषण पर कितना पड़ेगा असर?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;घरेलू उपाय जो दे सकते हैं राहत&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा अगर कान से पानी सुखाने के बाद भी कान बंद या फिर भारीपन महसूस होता है, तो आप कुछ आसान और असरदार घरेलू उपाय भी अपना सकते हैं.&amp;nbsp; जैसे गर्म पानी या फिर किसी गर्म कपड़े से कान के इर्द-गिर्द सेकाई करना, गर्म पानी से 5 से 10 मिनट तक भाप लेना. साथ ही गुनगुने पानी से गरारे करना भी गले और कान की नली को राहत पहुंचा सकता है. लेकिन सबसे जरूरी बात का ध्यान रखना चाहिए कि ये सारे घरेलू उपाय बस शुरुआती दर्द को ठीक कर सकते हैं.&amp;nbsp; अगर कान में दर्द और भारीपन ज्यादा देर तक रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp; &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/best-fertility-foods-to-eat-for-women-trying-to-get-pregnant-naturally-3156417&quot;&gt;&lt;strong&gt;Fertility Diet: मां बनने में आ रही है दिक्कत तो आज ही अपने खाने में शामिल कर लें ये चीजें, जल्द गूंजेगी किलकारी&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/08/25f32485eb207ff32521fcaf47f7f28f17835268530361381_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Benefits Of Matcha Tea:  ग्रीन-टी का जमाना गया! अब वजन घटाने के लिए सेलिब्रिटीज क्यों पी रहे हैं हरी 'माचा चाय'?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/matcha-tea-benefits-for-weight-loss-and-health-3156986</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/matcha-tea-benefits-for-weight-loss-and-health-3156986#respond</comments><pubDate>Wed, 8 Jul 2026 22:36:17 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/matcha-tea-benefits-for-weight-loss-and-health-3156986</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Benefits Of Matcha Tea:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;आज के समय में हरे रंग की चाय सोशल मीडिया पर एक अलग ही ट्रेंड बन गई है, जिसे सभी लोग माचा टी के नाम से जान रहे हैं. इस अचानक से आए ट्रेंड को देखकर हर किसी के दिमाग में यही सवाल आ रहा है कि आखिर यह नए प्रकार की चाय होती कैसी है. ऐसे में आपको बता दें कि यह असल में ग्रीन-टी का ही एक खास रूप है, लेकिन इसे बनाने का तरीका अलग होता है. सादी ग्रीन-टी में सिर्फ पानी में पत्तियां उबाली जाती हैं, जबकि माचा में पूरी पत्ती का पाउडर पानी में घोलकर पिया जाता है. यही वजह है कि माचा को ग्रीन-टी के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद माना जा रहा है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सेलिब्रिटीज को माचा इतनी क्यों पसंद आ रही है?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ऐसे ही अचानक से माचा सोशल मीडिया पर ट्रेंड नहीं आ गई है. इसे चर्चा में लाने में सबसे बड़ा हाथ आजकल के सेलिब्रिटीज और कंटेंट क्रिएटर्स का है. वे अपने रोज के रूटीन में माचा को शामिल कर रहे हैं.&amp;nbsp; इसके पीछे की वजह है कि माचा में कैटेचिन नाम का एक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, खासकर EGCG नाम का तत्व, जो शरीर की चर्बी घटाने में मदद करता है.&amp;nbsp; कई रिपोर्ट्स के मुताबिक माचा हमारे शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता को भी बढ़ाता है. इसके अलावा माचा में कैफीन और एल-थियेनिन के तत्व भी पाए जाते हैं, जो दिमाग को शांत रखते हैं और ऊर्जा देते हैं. यही कारण है कि अब चाय और कॉफी की जगह कई लोग सुबह माचा पीना पसंद कर रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/best-fertility-foods-to-eat-for-women-trying-to-get-pregnant-naturally-3156417&quot;&gt;&lt;strong&gt;Fertility Diet: मां बनने में आ रही है दिक्कत तो आज ही अपने खाने में शामिल कर लें ये चीजें, जल्द गूंजेगी किलकारी&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या सच में माचा से वजन कम होता है?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस जानकारी के बाद अक्सर हर किसी के दिमाग में यही सवाल आता है कि क्या किया जा रहा दावा वाकई में उतना सच्चा है? क्या सच में माचा वजन कम करने में मदद करता है? तो इसके जवाब में बता दें कि माचा कोई जादुई या चमत्कारी ड्रिंक नहीं है, जो अचानक से अकेले ही वजन घटा देगा. विशेषज्ञों के अनुसार, चाहे वे माचा पिएं या फिर कोई भी वजन कम करने वाली अद्भुत ड्रिंक, ये सभी केवल वजन कम करने में मदद कर सकती हैं.&amp;nbsp; इनका असर इतना नहीं होता कि केवल इन्हें पीने से वजन कम हो जाए.&amp;nbsp; यानी बिना खान-पान पर ध्यान दिए, बिना एक्सरसाइज किए केवल इन ड्रिंक्स के भरोसे बैठने से वजन पर कोई असर नहीं पड़ता.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp; &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-pregnancy-test-kit-works-hcg-hormone-science-3156483&quot;&gt;&lt;strong&gt;Pregnancy Test Kit: प्रेग्नेंसी किट कैसे पता कर लेती है आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं? समझिए इसके पीछे का साइंस&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/08/ae7030d5ce5fa7b83462ef7151f7f2d517835248456391381_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Gastro Shield Diet:  पेट को कभी बूढ़ा नहीं होने देगी ये नई 'गैस्ट्रो-शील्ड' डाइट, जानें 40 की उम्र के बाद क्यों है जरूरी ]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/gastro-shield-diet-for-better-gut-health-after-40-3156981</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/gastro-shield-diet-for-better-gut-health-after-40-3156981#respond</comments><pubDate>Wed, 8 Jul 2026 22:08:32 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/gastro-shield-diet-for-better-gut-health-after-40-3156981</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Gastro Shield Diet:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;बढ़ती उम्र के हर आदमी की एक ही समस्या होती है कि उनके पेट की आंतों की कार्यक्षमता कम हो जाती है. इसका कारण यह है कि 40 की उम्र के बाद उनके शरीर में एंजाइम बनने की प्रक्रिया कम हो जाती है. यही वजह है कि उनके खाना पचाने की क्षमता पहले जैसी नहीं रहती है. ऐसे में बहुत से लोगों को समझ नहीं आता कि वे अपनी डाइट किस तरह की रखें. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 40 की उम्र के बाद उनकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, जिस पर वे गैस्ट्रो-शील्ड पर विश्वास करते हैं. बता दें कि गैस्ट्रो-शील्ड एक ऐसा तरीका है, जो पेट की परत यानी गट लाइनिंग को मजबूत बनाकर रखता है. साथ ही यह पेट में सूजन होने से भी बचाता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 class=&quot;PDq2pG_selectionAnchorContainer&quot; style=&quot;text-align: justify;&quot; data-start=&quot;812&quot; data-end=&quot;865&quot;&gt;&lt;span role=&quot;text&quot;&gt;&lt;strong data-start=&quot;816&quot; data-end=&quot;865&quot;&gt;गैस्ट्रो-शील्ड डाइट में क्या-क्या खाना चाहिए?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विशेषज्ञों के अनुसार इस डाइट का मुख्य आधार फाइबर से भरपूर खाना है, जैसे साबुत अनाज, दाल, हरी सब्जियां और फल, जो सेहत के साथ-साथ पेट के लिए भी बहुत फायदेमंद साबित होते हैं. इसके साथ ही दही, छाछ, इडली-डोसा जैसे पदार्थ भी डाइट में शामिल करने चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि इनमें प्राकृतिक रूप से अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं. बात बस यहीं तक खत्म नहीं होती है, बहुत समय पहले से विशेषज्ञ इस तरह की डाइट के अलावा रोजाना पर्याप्त पानी पीते रहने की सलाह भी देते आ रहे हैं. ऐसा करने से यह आपके पाचन तंत्र को सही ढंग से काम करने में मदद करता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-pregnancy-test-kit-works-hcg-hormone-science-3156483&quot;&gt;&lt;strong&gt;Pregnancy Test Kit: प्रेग्नेंसी किट कैसे पता कर लेती है आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं? समझिए इसके पीछे का साइंस&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;किन चीजों से बचना चाहिए&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अच्छी डाइट के अलावा अगर उन चीजों की बात करें, जिनसे विशेषज्ञ दूर रहने की सलाह देते हैं, तो उनमें सबसे जरूरी बात है कि बहुत ज्यादा तेल-भुना, मसालेदार और प्रोसेस्ड खाना खाने से बचें. इससे पेट की परत को नुकसान पहुंचता है. इसके अलावा ज्यादा चीनी और मैदे से बनी चीजें भी अच्छे बैक्टीरिया के लिए नुकसानदेह मानी जाती हैं. और सबसे जरूरी बात, बार-बार बिना जरूरत के दर्द निवारक दवाइयां लेने से भी पेट की परत कमजोर हो जाती है. इसलिए किसी भी दवाई का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp; &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/oxytocin-injection-side-effects-health-risks-oxytocin-injection-ke-side-effects-3156732&quot;&gt;&lt;strong&gt;Oxytocin Health Risks: RML में सब-स्टैंडर्ड ऑक्सीटोसिन की 2700 वायल फेल, जानें क्यों है यह दवा आपके लिए जानलेवा?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/08/d8021a36ca55cf3300d2ae0115a3265d17835242693351381_original.jpeg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Oxytocin Health Risks: RML में सब-स्टैंडर्ड ऑक्सीटोसिन की 2700 वायल फेल, जानें क्यों है यह दवा आपके लिए जानलेवा?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/oxytocin-injection-side-effects-health-risks-oxytocin-injection-ke-side-effects-3156732</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/oxytocin-injection-side-effects-health-risks-oxytocin-injection-ke-side-effects-3156732#respond</comments><pubDate>Wed, 8 Jul 2026 13:48:26 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/oxytocin-injection-side-effects-health-risks-oxytocin-injection-ke-side-effects-3156732</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Postpartum Hemorrhage Treatment:&lt;/strong&gt; ऑक्सीटोसिन की 2700 वायल गुणवत्ता जांच में फेल होने के बाद इस दवा की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं, ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल प्रसव के दौरान लेबर शुरू कराने और डिलीवरी के बाद ज्यादा ब्लीडिंग को रोकने के लिए किया जाता है, ऐसे में जब इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हों, तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि खराब या मानक के अनुरूप न होने वाली ऑक्सीटोसिन मरीजों की सेहत पर कितना असर डाल सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्यों जरूरी है यह दवा?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट Medicinenet ऑक्सीटोसिन शरीर में बनने वाला एक प्राकृतिक हार्मोन है, जिसे दवा के रूप में भी तैयार किया जाता है. अस्पतालों में इसका उपयोग गर्भाशय के संकुचन बढ़ाने, प्रसव को आगे बढ़ाने और डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. औषधि एक्सपर्ट और फार्माकोलॉजिस्ट डॉ. वी. उदय किरण के अनुसार, के अनुसार यह एक महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक दवा है, लेकिन इसकी क्वालिटी और सही मात्रा दोनों का सुरक्षित होना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/kolkata-school-mid-day-meal-egg-vs-dal-rotein-comparison-and-impact-on-children-nutrition-3156184&quot;&gt;&lt;strong&gt;Egg Vs Dal: दाल-सब्जी के मुकाबले एक अंडे से कितना मिलता है प्रोटीन, बच्चों के पोषण पर कितना पड़ेगा असर?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;महिलाओं की मौत के बाद सवाल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राजस्थान के कोटा में सी-सेक्शन के बाद पांच महिलाओं की मौत के मामले में भी ऑक्सीटोसिन को लेकर सवाल उठे थे. जांच के दौरान जिस बैच की जांच की गई, उसमें ऑक्सीटोसिन का एक्टिव इंग्रीडिएंट नहीं मिला,. इसके बाद दवा निर्माता और वितरक के खिलाफ नियामक एजेंसियों ने कार्रवाई की और विश्व स्वास्थ्य संगठन &amp;nbsp;ने भी इस मामले में भारत सरकार से जानकारी मांगी. हालांकि, बाद में राजस्थान सरकार की आठ सदस्यीय एक्सपर्ट समिति और एम्स, नई दिल्ली की छह सदस्यीय टीम की रिपोर्ट में कहा गया कि इन मौतों का सीधा कारण केवल खराब ऑक्सीटोसिन को नहीं माना जा सकता. समिति के अनुसार सभी महिलाओं की चिकित्सीय स्थिति अलग-अलग थी और किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जांच में यह जरूर सामने आया कि अस्पतालों में कई स्तर पर गंभीर कमियां थीं। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। कई मरीजों के ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, यूरिन आउटपुट, लिवर फंक्शन टेस्ट और दवाओं से जुड़े रिकॉर्ड अधूरे पाए गए। कुछ मामलों में पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया, जिससे मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि करना मुश्किल हो गया।&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इससे क्या होती है दिक्कत?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;Medicinenet के अनुसार, ऑक्सीटोसिन के दुष्प्रभाव की बात है, तो इसके इस्तेमाल के दौरान कुछ मरीजों में मतली, उल्टी, एलर्जी, असामान्य हार्ट रेट,ब्लड प्रेशर में बदलाव और दुर्लभ मामलों में गर्भाशय फटने जैसी गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं. इसलिए यह दवा केवल डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाती है. इसकी मात्रा मरीज की स्थिति के अनुसार तय की जाती है और इसे स्वयं इस्तेमाल करना या बिना मेडिकल सलाह के लेना खतरनाक हो सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि किसी भी दवा की गुणवत्ता में कमी चिंता का विषय है, लेकिन हर गंभीर घटना का कारण केवल दवा नहीं होती. सुरक्षित इलाज के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली दवा, सही चिकित्सकीय निगरानी, समय पर इलाज और अस्पतालों में तय प्रोटोकॉल का पालन, सभी समान रूप से जरूरी हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/swimming-vs-running-vs-jump-rope-which-burns-the-most-calories-in-one-hour-3156191&quot;&gt;&lt;strong&gt;Calories Burned: स्वीमिंग, रनिंग या रस्सी कूद... 1 घंटे में किसमें खर्च होती है सबसे ज्यादा कैलोरी, क्या बेहतर?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/08/2cebcbed3b8790c09f387cfeb2f10fe117834974936921257_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>