<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>जानवर गंदा पानी भी पचा लेते हैं इंसान क्यों नहीं, कितना अलग है सिस्टम?</title><atom:link href="https://www.abplive.com/health/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Tue, 29 Sep 2026 02:00:59 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[अब बिना पर्ची नहीं मिलेगी एसिडिटी की दवा, CDSCO ने रखी शर्त]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/acidity-medication-not-be-sold-without-doctor-prescription-cdsco-3194808</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/acidity-medication-not-be-sold-without-doctor-prescription-cdsco-3194808#respond</comments><pubDate>Mon, 28 Sep 2026 18:42:06 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/acidity-medication-not-be-sold-without-doctor-prescription-cdsco-3194808</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आपको एसिडिटी है और आप सीधे मेडिकल स्टोर से दवा ले लेते हैं तो अब ऐसा नहीं होगा. नए नियम के मुताबिक, अब मेडिकल स्टोर बिना डॉक्टरी सलाह या पर्ची के एसिडिटी की दवा नहीं दे सकेंगे. सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन की ओर से ऐसी शर्त रखी गई है. इसमें कहा गया है कि एसिडिटी की दवा वोनोप्रीजन की बिक्री डॉक्टर की पर्ची के साथ ही की जाए.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;CDSCO की ओर से कहा गया है कि&amp;nbsp;अगर किसी को बार-बार एसिडिटी होती है और वह लंबे समय से दवा ले रहा है तो इसकी वजह पता करना जरूरी है. कुछ दवाओं को लंबे समय तक लेने पर शरीर में विटामिन बी12 और मैग्नीशियम की कमी हो सकती है. कुछ लोगों में दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि दवा लेने वाले हर व्यक्ति को ये दिक्कत होगी. लेकिन अगर रोज या लंबे समय तक दवा लेने की जरूरत पड़ रही है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पेट और आंतों से जुड़ी बीमारी में भी पर्ची जरूरी&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एसिडिटी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली वोनोप्राजान दवा को लेकर एक जरूरी बदलाव बताया गया है. 10 और 20 मिलीग्राम की यह दवा भारत में पहले से मंजूर है. अब इसकी दुकान से बिक्री डॉक्टर की पर्ची के आधार पर करने की बात कही गई है. खासतौर पर पेट और आंतों से जुड़ी बीमारी के डॉक्टर की पर्ची जरूरी होगी. दवा को लेकर आगे भी टेस्ट करने की बात कही गई है. इसलिए इसे अपनी मर्जी से लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/reason-of-chest-burn-after-eating-causes-and-solutions-acidity-3194491&quot;&gt;&lt;strong&gt;खाना खाने के बाद छाती में क्यों होती है जलन? ये हो सकती है वजह&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फैटी लिवर के इलाज में इन दवाओं पर हो रहा टेस्ट&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बता दें, फैटी लिवर के इलाज के लिए कुछ नई दवाओं पर भी काम चल रहा है. इनमें एफ्रुक्सिफर्मिन और रेसमेटिरोम नाम की दवाएं शामिल हैं. एफ्रुक्सिफर्मिन के तीसरे चरण का टेस्ट आगे बढ़ाने की बात कही गई है. यह उन मरीजों के लिए है जिनके लिवर में फैट के साथ सूजन और लिवर को नुकसान होने जैसी समस्या हो सकती है. वहीं रेसमेटिरोम की अलग-अलग मात्रा वाली दवा पर भी तीसरे चरण के टेस्ट की बात हुई है. इन टेस्ट का मकसद यह देखना है कि दवा मरीजों के लिए कितनी सुरक्षित और असरदार है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कब्ज और पेट दर्द के लिए नई दवा पर काम&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लंबे समय से कब्ज रहने के साथ अगर पेट में दर्द और दूसरी परेशानी भी होती है तो इसे IBS-C कहा जाता है. इस समस्या के इलाज के लिए लिनाक्लोटाइड नाम की दवा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके 72 और 145 माइक्रोग्राम वाले रूप को लंबे समय से कब्ज की समस्या के लिए इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है. वहीं कब्ज के साथ पेट दर्द और दूसरी परेशानी वाले मरीजों के लिए 290 माइक्रोग्राम वाली दवा पर भी टेस्ट की बात सामने आई है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सिकल सेल बीमारी में बच्चों पर भी होगा दवा का टेस्ट&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सिकल सेल बीमारी के इलाज से जुड़ी एटावोपिवाट नाम की दवा पर भी टेस्ट चल रहा है. अब इसके तीसरे चरण के टेस्ट में 6 से 12 साल की उम्र के बच्चों को शामिल करने की सिफारिश की गई है. इस तरह के टेस्ट में यह देखा जाता है कि दवा बच्चों के लिए कितनी सुरक्षित है और बीमारी में कितना फायदा करती है. इसलिए अभी इसे सभी बच्चों के लिए सामान्य दवा नहीं माना जा सकता. दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/torch-infection-pregnancy-autism-intellectual-disability-3193330&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्रेग्नेंसी में इन वजहों से बच्चें में ऑटिज्म का खतरा, स्टडी में सामने आई बात&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/28/003079ced39a260b8a73f82c4aabb7f117905868909561471_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[आंवला खाने से शरीर को मिलते हैं ये फायदे, पीएम मोदी ने भी किया जिक्र]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/pm-modi-mention-amla-know-health-benefits-3194849</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/pm-modi-mention-amla-know-health-benefits-3194849#respond</comments><pubDate>Mon, 28 Sep 2026 17:41:28 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/pm-modi-mention-amla-know-health-benefits-3194849</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आंवला हमारे घरों में काफी समय से इस्तेमाल होता आ रहा है और इसके कई सारे फायदे भी है. अब प्रधानमंत्री &lt;a title=&quot;नरेंद्र मोदी&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/narendra-modi&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;नरेंद्र मोदी&lt;/a&gt; ने भी आंवले का जिक्र किया है. &amp;lsquo;मन की बात&amp;rsquo; के 138वें एपिसोड में पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के आंवले और वहां इससे जुड़े कामों के बारे में बताया. प्रतापगढ़ में आंवले से कैंडी, मुरब्बा, जूस, अचार और दूसरी चीजें बनाई जा रही हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पीएम मोदी ने बताया कि इससे वहां के किसानों और महिलाओं को काम के नए मौके मिल रहे हैं. आंवला सेहत के लिहाज से भी खास माना जाता है, क्योंकि इसमें विटामिन सी जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. तो चलिए जानते हैं आंवला खाने से शरीर को क्या फायदे मिल सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;शरीर को विटामिन सी मिलता है&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आंवले में विटामिन सी पाया जाता है. यह शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है और शरीर की सामान्य रोगों से लड़ने की क्षमता में मदद करता है. विटामिन सी शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की तरह भी काम करता है. इसके अलावा यह शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करता है, जो त्वचा और शरीर के दूसरे हिस्सों के लिए जरूरी होता है. इसलिए खाने में आंवला जैसे फल शामिल करना सेहत के लिए अच्छा हो सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पाचन को ठीक रखने में मदद कर सकता है&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आंवले में फाइबर भी होता है, जो पेट के लिए जरूरी है. खाने में पर्याप्त फाइबर लेने से मल त्याग सामान्य रखने में मदद मिलती है. इससे कब्ज जैसी परेशानी से बचने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि अगर किसी को लंबे समय से कब्ज या पेट की कोई बीमारी है तो सिर्फ आंवला खाना उसका इलाज नहीं है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/eating-only-chicken-for-one-month-health-effects-3194197&quot;&gt;&lt;strong&gt;एक महीना केवल चिकन खाएं तो शरीर में क्या होंगे बदलाव?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;त्वचा के लिए भी फायदेमंद हो सकता है&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आंवले में मौजूद विटामिन सी त्वचा के लिए भी जरूरी है. यह शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करता है और कोलेजन त्वचा को स्वस्थ रखने में भूमिका निभाता है. इसी वजह से आंवले को अक्सर त्वचा की सेहत से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन सिर्फ आंवला खाने से चेहरे की हर समस्या ठीक हो जाएगी, ऐसा दावा नहीं किया जा सकता. अच्छी त्वचा के लिए संतुलित खाना, पर्याप्त पानी और नींद भी जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बालों के लिए क्यों खाया जाता है आंवला?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आंवला बालों की देखभाल में लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है. इसके पीछे एक वजह इसमें मौजूद विटामिन सी और दूसरे पोषक तत्व हैं. विटामिन C शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करता है. हालांकि आंवला खाने से बाल झड़ना पूरी तरह बंद हो जाएगा या नए बाल आ जाएंगे, ऐसा पक्का नहीं कहा जा सकता. अगर लगातार बाल झड़ रहे हैं तो इसके पीछे पोषण की कमी, तनाव या दूसरी वजह हो सकती है, इसलिए कारण जानना जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आंवला कैसे खाएं, इस बात का भी रखें ध्यान&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आंवले को कच्चा, अचार, चटनी, मुरब्बे या जूस के रूप में खाया जा सकता है. लेकिन हर तरीके से मिलने वाला फायदा एक जैसा नहीं होगा. खासकर मुरब्बे में चीनी ज्यादा हो सकती है, इसलिए इसे ज्यादा मात्रा में खाना ठीक नहीं. इसी तरह आंवले का जूस लेते समय उसमें डाली गई चीनी का ध्यान रखना चाहिए. आंवला एक अच्छा फल है, लेकिन इसे किसी बीमारी की दवा नहीं समझना चाहिए. रोज के खाने में इसे संतुलित मात्रा में शामिल करना बेहतर है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/things-that-increase-platelate-count-during-dengue-treatment-3193593&quot;&gt;&lt;strong&gt;डेंगू में ये चीजें तेजी से बढ़ाएंगी प्लेटलेट्स, देख लें नाम&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/28/01f17df20b85b41a0753f712a8c8c08f17905910181181471_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[खाना खाने के बाद छाती में क्यों होती है जलन? ये हो सकती है वजह]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/reason-of-chest-burn-after-eating-causes-and-solutions-acidity-3194491</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/reason-of-chest-burn-after-eating-causes-and-solutions-acidity-3194491#respond</comments><pubDate>Mon, 28 Sep 2026 10:07:51 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/reason-of-chest-burn-after-eating-causes-and-solutions-acidity-3194491</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खाना खाने के बाद छाती में जलन होना काफी आम समस्या है. कई लोगों को भोजन के कुछ देर बाद सीने के बीचों-बीच जलन महसूस होती है, जो कभी-कभी गले तक भी पहुंच जाती है. कुछ लोग इसे गैस मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई मामलों में यह एसिड रिफ्लक्स या हार्टबर्न का संकेत हो सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आमतौर पर ऐसा तब होता है जब पेट में मौजूद एसिड ऊपर की तरफ भोजन नली में आने लगता है. भोजन नली की अंदरूनी परत पेट के एसिड से बचने के लिए उतनी सुरक्षित नहीं होती, इसलिए वहां जलन या असहजता महसूस होने लगती है. ऐसे में जानें इससे बचाव के तरीके.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एसिड रिफ्लक्स हो सकता है कारण&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खाने के बाद छाती में जलन का सबसे आम कारण एसिड रिफ्लक्स माना जाता है. पेट और भोजन नली के बीच एक मांसपेशी वाल्व की तरह काम करती है. अगर यह ठीक तरह से बंद नहीं होती या बार-बार ढीली पड़ती है, तो पेट का एसिड ऊपर आ सकता है. इसकी वजह से सीने में जलन, मुंह में खट्टा स्वाद, डकार और गले में जलन जैसी परेशानी होती है. खासकर भारी खाना खाने या भोजन के तुरंत बाद लेटने पर समस्या बढ़ जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ज्यादा मसालेदार या तला खाना&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खाने की कुछ आदतें भी जलन को बढ़ा सकती हैं. बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या अधिक फैट वाला भोजन कुछ लोगों में हार्टबर्न को ट्रिगर कर सकता है. इसी तरह जरूरत से ज्यादा खाना भी पेट पर दबाव बढ़ा देता है. चाय-कॉफी, चॉकलेट, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन करने वाले लोगों में भी यह होता है. हालांकि हर व्यक्ति के साथ यह समस्या नहीं होती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/cardiologist-shared-his-heart-health-daily-routine-on-social-media-3193720&quot;&gt;&lt;strong&gt;कार्डियोलॉजिस्ट ने बताई 4 आदतें, ऐसे रखें दिल का ख्याल&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खाना खाने के तुरंत बाद न लेटें&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेटने से भी एसिड के ऊपर आने की संभावना बढ़ जाती है. खासकर रात में देर से भारी खाना खाने के बाद ऐसा ज्यादा महसूस होता है. इसलिए भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना मददगार होता है. खाना खाने के बाद कुछ समय हल्की एक्टिवीटी करना भी बेहतर विकल्प होता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कब इसे सामान्य जलन न समझें?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;छाती में होने वाली हर जलन को गैस या एसिडिटी मान लेना सही नहीं है. अगर जलन के साथ सीने में तेज दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर, उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देने पर इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है. ज्यादा परेशानी होने पर डॉकटर से सलाह लेना बेहतर होता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/morning-eye-discharge-excessive-eye-mucus-warning-signs-3193693&quot;&gt;&lt;strong&gt;Eye Discharge: सुबह-सुबह आंखों में दिख रहा ज्यादा कीचड़, जानें कब है खतरे का संकेत?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/27/fd274f2803b26f295f439a69238de54a17905104121111473_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[नींद पूरी नहीं हो रही तो हो जाएं सावधान, खराब हो सकती है दिल की सेहत]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/lack-of-sleep-effect-on-heart-health-3194316</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/lack-of-sleep-effect-on-heart-health-3194316#respond</comments><pubDate>Sun, 27 Sep 2026 22:28:27 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/lack-of-sleep-effect-on-heart-health-3194316</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आजकल देर रात तक फोन चलाना, काम का दबाव, पढ़ाई और बदलती दिनचर्या की वजह से बहुत से लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती. कई लोग रोज 5-6 घंटे सोने के बाद भी इसे सामान्य मान लेते हैं और सोचते हैं कि बाद में समय मिलने पर नींद पूरी कर लेंगे. लेकिन नींद सिर्फ शरीर को आराम देने का तरीका नहीं है. सोते समय शरीर कई जरूरी काम करता है और दिल को भी आराम मिलता है. अगर लंबे समय तक नींद कम हो या नींद की गुणवत्ता अच्छी न हो तो इसका असर सेहत के कई हिस्सों पर पड़ सकता है. अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक नींद की अवधि, नियमितता और उसकी गुणवत्ता का संबंध दिल की बीमारी, स्ट्रोक, ब्लड प्रेशर और शरीर के मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं से पाया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रोज कितने घंटे सोना जरूरी है?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ज्यादातर लोगों को हर रात कम से कम 7 घंटे की नींद लेने की जरूरत होती है. कभी-कभी एक-दो दिन कम सो जाना अलग बात है, लेकिन अगर लगातार नींद कम हो रही है तो इसे आदत नहीं बनाना चाहिए. रिसर्च में 7 घंटे से कम सोने को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा पाया गया है. हालांकि हर व्यक्ति की नींद की जरूरत थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए सिर्फ घंटे गिनने के बजाय नींद की गुणवत्ता और दिनभर शरीर कैसा महसूस करता है, इस पर भी ध्यान देना जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कम नींद से ब्लड प्रेशर पर पड़ सकता है असर&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जब हम सोते हैं तो सामान्य तौर पर ब्लड प्रेशर नीचे जाता है, जिससे शरीर और दिल को आराम मिलता है. अगर नींद ठीक से नहीं आती या बार-बार टूटती है तो यह सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. लंबे समय तक खराब नींद और नींद की कमी को हाई ब्लड प्रेशर जैसे जोखिमों से जोड़ा गया है. हाई ब्लड प्रेशर आगे चलकर दिल की बीमारी और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकता है. इसलिए अगर कई दिनों से नींद खराब चल रही है तो सिर्फ थकान समझकर इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/pcos-irregular-periods-acne-hair-fall-hormonal-changes-3191809&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनियमित पीरियड्स के साथ मुंहासे और बाल झड़ रहे? हो सकता है PCOS&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सिर्फ कम सोना ही नहीं, नींद की क्वालिटी भी जरूरी&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ऐसा नहीं है कि 7-8 घंटे बिस्तर पर रहने का मतलब हमेशा अच्छी नींद लेना है. अगर रात में बार-बार नींद खुलती है, सोने में बहुत समय लगता है या सुबह उठने के बाद भी थकान रहती है तो नींद की गुणवत्ता ठीक नहीं मानी जा सकती. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने नींद की अवधि के साथ उसकी नियमितता, लगातार नींद, सही समय पर सोना और दिन में नींद आने जैसी चीजों को भी दिल और मेटाबॉलिक सेहत से जोड़ा है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खर्राटे और नींद में सांस रुकना भी हो सकता है संकेत&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर किसी व्यक्ति को बहुत तेज खर्राटे आते हैं, रात में सांस रुकने जैसी समस्या होती है या वह बार-बार नींद से जागता है तो इसकी वजह स्लीप एपनिया भी हो सकती है. इसमें सोते समय सांस की नली बार-बार बंद हो सकती है और शरीर को मिलने वाली ऑक्सीजन प्रभावित हो सकती है. CDC के अनुसार स्लीप एपनिया को हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है. ऐसे लक्षण लगातार हों तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नींद सुधारने के लिए छोटी-छोटी आदतें अपनाएं&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नींद बेहतर करने के लिए सबसे पहले सोने और उठने का समय लगभग तय रखने की कोशिश करें. दिन में थोड़ी शारीरिक गतिविधि करें और सुबह या दिन में कुछ समय प्राकृतिक रोशनी में बिताएं. रात में सोने से पहले मोबाइल और दूसरी तेज रोशनी वाली स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना मददगार हो सकता है. कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें. अगर लंबे समय से नींद की परेशानी बनी हुई है, बार-बार नींद टूटती है या दिनभर बहुत ज्यादा नींद आती है तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/blood-in-stool-piles-anal-fissure-colon-cancer-risk-3193210&quot;&gt;&lt;strong&gt;टॉयलेट में खून आना बवासीर ही नहीं, इस गंभीर बीमारी का हो सकता है संकेत&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/27/d42774805ae48300160d59ada8e578a517904873076211471_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[बगैर नॉनवेज खाए 90 की उम्र में बनाई बॉडी, जानिए शख्स की सेहत का राज]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/90-year-old-bodybuilder-toshisuke-kanazawa-healthy-diet-and-fitness-3194430</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/90-year-old-bodybuilder-toshisuke-kanazawa-healthy-diet-and-fitness-3194430#respond</comments><pubDate>Sun, 27 Sep 2026 19:09:14 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/90-year-old-bodybuilder-toshisuke-kanazawa-healthy-diet-and-fitness-3194430</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;90 साल की उम्र में जहां ज्यादातर लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को आरामदायक बनाने पर ध्यान देते हैं, वहीं जापान के तोशिसुके कनाज़ावा आज भी बॉडीबिल्डिंग के मंच पर उतर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने 85 साल से ज्यादा उम्र वाली कैटेगरी में ऑल जापान मास्टर्स फिटनेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया. यह उनका 19वां नेशनल टाइटल है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खास बात यह है कि उनकी फिटनेस का एक बड़ा हिस्सा ऐसी डाइट से जुड़ा है, जिसमें वह कई दशकों से मांस और मछली नहीं खाते. ऐसे में लोग उनकी डाइट के बारे में जानना चाहते हैं. तोशिसुके केवल वेजिटेरियन खाने को ही अपनी डाइत में शामिल करते हैं. जानिए 90 की उम्र में उनकी फिटनेस का राज.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मिस्टर जापान भी बने&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कनाजावा का बॉडीबिल्डिंग से रिश्ता नया नहीं है. उन्होंने कम उम्र में ही इस खेल को अपनाया था और 24 साल की उम्र में मिस्टर जापान का खिताब भी जीता. इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हिस्सा लिया. 1967 में उन्होंने मिस्टर यूनिवर्स प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था, जहां उनकी मुलाकात उस दौर के बड़े नामों में शामिल अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर और सर्जियो ओलिविया से हुई.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;50 की उम्र में दोबारा बॉडीबिल्डिंग शुरु की&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकि, 30 की उम्र के बाद उन्होंने प्रतियोगिताओं से दूरी बना ली थी. करीब 50 साल की उम्र में उन्होंने दोबारा बॉडीबिल्डिंग शुरू की. इसकी एक वजह उनकी पत्नी भी थीं, जो उस समय बीमार रहती थीं. कनाजावा चाहते थे कि उनकी पत्नी उन्हें फिर से फिट और प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हुए देखें. बाद में पत्नी के निधन के बाद भी उन्होंने इस सफर को जारी रखा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/eating-only-chicken-for-one-month-health-effects-3194197#google_vignette&quot;&gt;&lt;strong&gt;एक महीना केवल चिकन खाएं तो शरीर में क्या होंगे बदलाव?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या खाते हैं 90 साल के बॉडीबिल्डर?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कनाजावा की डाइट सुनने में काफी साधारण लग सकती है. उन्होंने बताया है कि करीब 50 साल की उम्र में बॉडीबिल्डिंग में वापसी के बाद उन्होंने मांस और मछली खाना छोड़ दिया था. उनके नाश्ते में आमतौर पर ब्राउन राइस, नट्टो और मिसो सूप शामिल होते हैं. नट्टो फर्मेंटेड सोयाबीन से तैयार किया जाता है और जापानी खाने में इसका इस्तेमाल काफी आम है. मिसो भी सोयाबीन से तैयार किया जाने वाला एक पारंपरिक जापानी फूड है. दोपहर और रात के खाने में भी ब्राउन राइस उनकी डाइट का हिस्सा रहता है. वह इसमें थोड़ा सा फ्यूरिकाके डालते हैं, जो जापानी सीजनिंग है. इसके अलावा वह दिन में तीन बार प्रोटीन ड्रिंक लेते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फिटनेस के साथ नींद और आराम भी जरूरी&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कनाजावा सिर्फ खाने पर निर्भर नहीं रहते. वह नियमित ट्रेनिंग करते हैं और उम्र के हिसाब से अपनी एक्सरसाइज में बदलाव भी कर चुके हैं. अब वह पहले की तरह स्क्वैट्स और बेंच प्रेस नहीं करते, बल्कि मशीनों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं. वह करीब दो घंटे की ट्रेनिंग करते हैं और हफ्ते में छह दिन जिम जाते हैं. उम्र बढ़ने के साथ शरीर को रिकवर होने में ज्यादा समय लगने के कारण वह सेट्स के बीच पर्याप्त आराम और करीब सात घंटे की नींद पर भी ध्यान देते हैं. उन्होंने धूम्रपान और शराब से भी दूरी बनाए रखी है. कनाजावा अपनी लंबी फिटनेस जर्नी में खान-पान, एक्सरसाइज और अनुशासन को अहम मानते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;90 के बाद भी रुकने का इरादा नहीं&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कनाजावा का सफर सिर्फ उनका 19वां खिताब तक नहीं है. 90 की उम्र में भी वह प्रतियोगिताओं में आगे हिस्सा लेने का लक्ष्य रखते हैं. उनका सपना उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने और डाइट व ट्रेनिंग के जरिए शरीर को लंबे समय तक एक्टिव रखने का है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-animals-drink-dirty-water-digest-bacteria-stomach-acid-human-immune-system-comparison-3193651&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानवर गंदा पानी भी पचा लेते हैं इंसान क्यों नहीं, कितना अलग है सिस्टम?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/27/3adeb377fa0f90059a7bff010680afb717905026234161473_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[किन लोगों को नहीं खाना चाहिए पान? जान लें काम की बात]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/paan-tobacco-areca-nut-health-risks-mouth-cancer-3194141</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/paan-tobacco-areca-nut-health-risks-mouth-cancer-3194141#respond</comments><pubDate>Sat, 26 Sep 2026 21:58:17 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/paan-tobacco-areca-nut-health-risks-mouth-cancer-3194141</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खाने के बाद पान खाने का चलन भारत में काफी पुराना है. कई लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए खाते हैं, जबकि कुछ लोग पान में सुपारी, तंबाकू, जर्दा या दूसरी चीजें मिलाकर खाते हैं. लेकिन हर तरह का पान एक जैसा नहीं होता.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खासकर सुपारी और तंबाकू वाला पान सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है. WHO के अनुसार सुपारी और पान मसाले का सेवन मुंह के कैंसर के खतरे से जुड़ा है. इसलिए कुछ लोगों को पान से पूरी तरह दूरी रखना जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;तंबाकू वाला पान बिल्कुल न खाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर पान में तंबाकू, जर्दा या कोई दूसरा धुआं रहित तंबाकू उत्पाद डाला जाता है तो इसे खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है.तंबाकू का कोई भी रूप सुरक्षित नहीं माना जाता. इससे मुंह, गले और शरीर के दूसरे हिस्सों में कैंसर का खतरा बढ़ता है. इसके अलावा तंबाकू की आदत लग सकती है और इसे छोड़ना मुश्किल होता है.इसलिए जो लोग पहले से धूम्रपान या तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें पान में तंबाकू या जर्दा मिलाकर खाने से खास तौर पर बचना चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुपारी वाला पान भी सुरक्षित नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कई लोगों को लगता है कि अगर पान में तंबाकू नहीं है तो वह पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन ऐसा नहीं है. पान में डाली जाने वाली सुपारी को भी IARC ने कैंसरकारी यानी कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया है. WHO के अनुसार सुपारी चबाने से मुंह के अंदर ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस जैसी समस्या हो सकती है, जो आगे चलकर मुंह के कैंसर के खतरे से जुड़ी है. इसलिए केवल तंबाकू हटाकर सुपारी वाला पान खाना भी पूरी तरह सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें : &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/cardiologist-shared-his-heart-health-daily-routine-on-social-media-3193720&quot;&gt;कार्डियोलॉजिस्ट ने बताई 4 आदतें, ऐसे रखें दिल का ख्याल &lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये लोग बनाएं रखे पूर्ण रूप से दूरी&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जिन लोगों को पहले से मुंह में छाले, सफेद या लाल धब्बे, मसूड़ों से खून आना, मुंह खोलने में परेशानी या लंबे समय से कोई मुंह से जुड़ी समस्या है, उन्हें सुपारी या तंबाकू वाला पान नहीं खाना चाहिए. ऐसे लक्षणों को केवल पान की वजह मानकर नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए. अगर कोई घाव या छाला लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है तो डेंटिस्ट या डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. &amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मुंह में लगातार रहने वाला घाव, दर्द, सूजन या खून आना मुंह के कैंसर के शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा बच्चों और किशोरों को तंबाकू या सुपारी वाले पान से पूरी तरह दूर रखना जरूरी है. ध्यान रखें कि पान में इस्तेमाल होने वाली हर चीज का असर एक जैसा नहीं होता. लेकिन अगर इसमें तंबाकू या सुपारी शामिल है तो इसे सुरक्षित मानना सही नहीं है&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें : &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/morning-eye-discharge-excessive-eye-mucus-warning-signs-3193693&quot;&gt;Eye Discharge: सुबह-सुबह आंखों में दिख रहा ज्यादा कीचड़, जानें कब है खतरे का संकेत? &lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/26/be13d6626312328574b39779c618c98c17904266166161472_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[एक महीना केवल चिकन खाएं तो शरीर में क्या होंगे बदलाव?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/eating-only-chicken-for-one-month-health-effects-3194197</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/eating-only-chicken-for-one-month-health-effects-3194197#respond</comments><pubDate>Sat, 26 Sep 2026 21:55:06 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/eating-only-chicken-for-one-month-health-effects-3194197</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चिकन को हाई-प्रोटीन फूड माना जाता है और इसे खाने से शरीर को प्रोटीन, विटामिन बी12, ज़िंक और सेलेनियम जैसे कई न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं. लेकिन अगर कोई व्यक्ति एक महीने तक सिर्फ चिकन खाए और डाइट में फल, सब्जियां, अनाज, दाल और दूसरे फूड्स बिल्कुल शामिल न करे तो शरीर का न्यूट्रिशन बैलेंस बिगड़ सकता है.&amp;nbsp; शुरुआत में पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है और प्रोटीन की मात्रा बढ़ने से मसल रिकवरी में मदद मिलती है, लेकिन लंबे समय तक ऐसी डाइट रखना बैलेंस्ड नहीं माना जाता.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्रोटीन ज्यादा मिलने से क्या होगा ?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चिकन में अच्छी मात्रा में प्रोटीन होता है. शरीर को मसल्स की मरम्मत और उनके विकास के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है. अगर किसी व्यक्ति की डाइट में पहले प्रोटीन कम था और वह चिकन खाना शुरू करता है तो उसे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है. इससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है. अगर चिकन को ग्रिल, बॉइल या कम तेल में पकाकर खाया जाए तो यह एक हेल्दी प्रोटीन सोर्स होता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लेकिन फ्राइड चिकन, बहुत ज्यादा तेल, बटर या क्रीम वाली ग्रेवी के साथ खाने से कैलोरीज़ और सैचुरेटेड फैट की मात्रा बढ़ती है.सिर्फ चिकन खाने पर प्रोटीन तो पर्याप्त मिलता है, लेकिन शरीर को एनर्जी के लिए कार्बोहाइड्रेट्स की जरूरत भी होती है. अगर डाइट में कार्बोहाइड्रेट्स बहुत कम हो जाएं तो कुछ लोगों को कमजोरी, थकान या लो एनर्जी महसूस होने लगती &amp;nbsp;है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;फाइबर की कमी से हो सकती है परेशानी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चिकन में डाइटरी फाइबर नहीं होता. फाइबर मुख्य रूप से फ्रूट्स, वेजिटेबल्स, होल ग्रेन्स, बींस और पल्सेज से मिलता है.फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और बॉवेल मूवमेंट को सामान्य रखने में मदद करता है. डाइट में फाइबर बहुत कम होने पर कॉन्स्टिपेशन यानी कब्ज की समस्या हो सकती है. इसके अलावा गट हेल्थ के लिए जरूरी कई तरह के प्लांट-बेस्ड फूड्स भी शरीर को नहीं मिल पाएंगे. सिर्फ चिकन खाने से विटामिन सी, फोलेट और कई प्लांट-बेस्ड एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा भी कम हो सकती है. इसलिए केवल एक फूड पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फूड ग्रुप्स को डाइट में शामिल करना ज्यादा बेहतर रहता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/fssai-analog-paneer-ban-draft-news-vegetable-fat-synthetic-imitation-food-safety-side-effects-3193612&quot;&gt;एनालॉग पनीर को बैन क्यों करना चाहता है FSSAI, इससे कितना नुकसान? &lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;वजन घट सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर कोई व्यक्ति पहले बहुत ज्यादा कैलोरीज़ लेता था और चिकन वाली डाइट में उसकी कुल कैलोरीज़ कम हो जाती हैं तो उसका वेट कम हो सकता है. लेकिन वेट लॉस सिर्फ चिकन खाने की वजह से नहीं होता. इसका मुख्य कारण कैलोरी डेफिसिट होता है.दूसरी तरफ अगर चिकन को डीप फ्राइड तरीके से खाया जाए या ज्यादा ऑयल और हाई-कैलोरी सॉस के साथ लिया जाए तो वजन कम होने के बजाय बढ़ भी सकता है.एक महीने तक केवल चिकन खाने से शरीर को जरूरी न्यूट्रिशन का पूरा बैलेंस नहीं मिलता. हेल्दी डाइट में प्रोटीन के साथ फ्रूट्स, वेजिटेबल्स, होल ग्रेन्स, हेल्दी फैट्स और दूसरे न्यूट्रिएंट-रिच फूड्स शामिल होना जरूरी है. इसलिए चिकन को डाइट का हिस्सा बनाना ठीक है, लेकिन पूरी डाइट को सिर्फ चिकन तक सीमित करना सही तरीका नहीं है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer:&lt;/strong&gt; अगर कोई व्यक्ति किसी बीमारी, एलर्जी या खास फिटनेस गोल की वजह से हाई-प्रोटीन डाइट लेना चाहता है तो डाइटिशियन या डॉक्टर से सलाह लेकर अपनी जरूरत के अनुसार डाइट प्लान बनाना बेहतर रहता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें : &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-animals-drink-dirty-water-digest-bacteria-stomach-acid-human-immune-system-comparison-3193651&quot;&gt;जानवर गंदा पानी भी पचा लेते हैं इंसान क्यों नहीं, कितना अलग है सिस्टम?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/26/8c7a258c759554c3480ac1b01c8972f917904366362141472_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[30 के होते ही करा लेने चाहिए ये टेस्ट, बीमारी आने से पहले चल जाएगा पता]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/health-tests-to-do-after-age-30-3194035</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/health-tests-to-do-after-age-30-3194035#respond</comments><pubDate>Sat, 26 Sep 2026 15:50:42 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/health-tests-to-do-after-age-30-3194035</guid><description><![CDATA[&lt;p&gt;उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है. कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके शुरुआती दौर में कोई खास लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन जांच कराने पर उनके संकेत मिल सकते हैं. यही वजह है कि समय-समय पर सामान्य स्वास्थ्य जांच कराते रहना फायदेमंद माना जाता है. हालांकि हर व्यक्ति को 30 साल की उम्र में सभी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उम्र के साथ-साथ परिवार में किसी बीमारी का इतिहास, वजन, खान-पान, जीवनशैली और पहले की स्वास्थ्य रिपोर्ट के आधार पर जांच की जरूरत अलग हो सकती है. कुछ सामान्य जांचों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&amp;nbsp;ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराएं&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;ब्लड प्रेशर बढ़ने पर शुरुआत में कई बार कोई साफ लक्षण नहीं दिखाई देता. इसलिए इसे सिर्फ तब चेक नहीं करना चाहिए, जब सिरदर्द या दूसरी परेशानी हो. स्वास्थ्य जांच के दौरान ब्लड प्रेशर की जांच कराना आसान तरीका है, जिससे बढ़े हुए दबाव का पता लगाया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के वयस्कों में हाई ब्लड प्रेशर की स्क्रीनिंग की जानी चाहिए. अगर पहली जांच में ब्लड प्रेशर ज्यादा आता है तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच या घर पर निगरानी की सलाह दे सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;कोलेस्ट्रॉल की जांच&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है या नहीं, इसका पता केवल जांच से ही चलता है क्योंकि हाई कोलेस्ट्रॉल में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते. इसके लिए साधारण खून की जांच यानी लिपिड प्रोफाइल कराई जाती है. CDC के अनुसार ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों को सामान्य तौर पर हर 4 से 6 साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने की जरूरत हो सकती है, जबकि हृदय रोग, डायबिटीज या परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास होने पर जांच ज्यादा बार करानी पड़ सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/fssai-analog-paneer-ban-draft-news-vegetable-fat-synthetic-imitation-food-safety-side-effects-3193612&quot;&gt;&lt;strong&gt;एनालॉग पनीर को बैन क्यों करना चाहता है FSSAI, इससे कितना नुकसान?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;ब्लड शुगर और HbA1c पर भी रखें नजर&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;ब्लड शुगर की जांच से शरीर में ग्लूकोज का स्तर पता चलता है, जबकि HbA1c पिछले कुछ महीनों में ब्लड शुगर के औसत स्तर की जानकारी देता है. हालांकि 30 साल की उम्र में हर व्यक्ति के लिए डायबिटीज की जांच जरूरी नहीं मानी जाती. उदाहरण के लिए USPSTF बिना लक्षण वाले 35 से 70 साल के ऐसे वयस्कों में प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज की स्क्रीनिंग की सलाह देता है, जिनका वजन ज्यादा या मोटापा है. परिवार में डायबिटीज का इतिहास या अन्य जोखिम होने पर डॉक्टर इससे पहले भी जांच की सलाह दे सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;वजन और कमर की जांच को भी नजरअंदाज न करें&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;सिर्फ वजन देखकर सेहत का अंदाजा लगाना सही नहीं है, लेकिन वजन और लंबाई से BMI निकाला जा सकता है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर का वजन सामान्य सीमा में है या नहीं. इसके साथ कमर का घेरा भी देखा जा सकता है, क्योंकि पेट के आसपास ज्यादा चर्बी कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है. अगर वजन तेजी से बढ़ रहा है, अचानक कम हो रहा है या शरीर में लगातार बदलाव महसूस हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;बाकी टेस्ट जरूरत के हिसाब से कराएं&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;30 की उम्र में हर व्यक्ति को ECG, पूरे शरीर के स्कैन या हर तरह की जांच करवाने की जरूरत नहीं होती. कौन-सा टेस्ट जरूरी है, यह व्यक्ति की उम्र, लक्षण, परिवार की मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे जोखिमों पर निर्भर करता है. इसलिए बिना जरूरत महंगे टेस्ट कराने के बजाय डॉक्टर से अपनी स्थिति के हिसाब से हेल्थ चेकअप की सूची पूछना बेहतर है. नियमित जांच का मकसद बीमारी ढूंढना भर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को समय रहते समझना भी है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/cardiologist-shared-his-heart-health-daily-routine-on-social-media-3193720&quot;&gt;कार्डियोलॉजिस्ट ने बताई 4 आदतें, ऐसे रखें दिल का ख्याल&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/26/75c060f359801ccfccd320afaa707ec717904124636751471_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[एनालॉग पनीर को बैन क्यों करना चाहता है FSSAI, इससे कितना नुकसान?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/fssai-analog-paneer-ban-draft-news-vegetable-fat-synthetic-imitation-food-safety-side-effects-3193612</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/fssai-analog-paneer-ban-draft-news-vegetable-fat-synthetic-imitation-food-safety-side-effects-3193612#respond</comments><pubDate>Sat, 26 Sep 2026 12:38:31 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/fssai-analog-paneer-ban-draft-news-vegetable-fat-synthetic-imitation-food-safety-side-effects-3193612</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;त्योहारों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले FSSAI ने मिलावटखोरों और ग्राहकों को गुमराह करने वाली कंपनियों के खिलाफ एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. FSSAI ने एक नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करते हुए पूरे देश में एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे कई राज्य पहले ही इस पर अपने स्तर पर पाबंदी लगा चुके हैं, लेकिन अब इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी है ताकि पनीर के नाम पर होने वाले इस बड़े खेल को रोका जा सके. इस बड़े फैसले के बाद हर आम उपभोक्ता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह एनालॉग पनीर क्या बला है, FSSAI इस पर बैन क्यों लगाना चाहता है और यह हमारी सेहत को कितना नुकसान पहुंचा रहा है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या होता है एनालॉग पनीर?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एनालॉग पनीर असली पनीर नहीं बल्कि एक तरह का नकली या कृत्रिम पनीर है. असली पनीर को बनाने में शुद्ध दूध का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन एनालॉग पनीर को बनाने में दूध की एक बूंद का भी उपयोग नहीं होता. यह पूरी तरह से गैर-डेयरी सामग्री जैसे कि सस्ते वनस्पति तेल, फैट, स्टार्च और अलग-अलग तरह के इमल्सीफायर्स को मिलाकर तैयार किया जाता है. देखने और छूने में यह बिल्कुल असली पनीर जैसा ही नरम और सफेद दिखाई देता है, जिसकी वजह से एक आम ग्राहक के लिए असली और नकली में अंतर कर पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;FSSAI इसे क्यों करना चाहता है बैन?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;FSSAI के इस सख्त कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि बाजार में इस सस्ते कृत्रिम उत्पाद को धड़ल्ले से असली डेयरी पनीर के नाम पर बेचा जा रहा है. होटल, रेस्टोरेंट और शादियों में लागत बचाने के चक्कर में इसी एनालॉग पनीर का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है और ग्राहकों को इसकी भनक तक नहीं लगती. नए नियमों के तहत अब किसी भी कंपनी या रेस्टोरेंट को इस तरह के उत्पाद के लिए पनीर शब्द का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी और उल्लंघन करने वालों पर भारी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a title=&quot;दुबई में सोना इतना सस्ता क्यों होता है, क्या है वहां टैक्स का खेल?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/why-is-gold-so-cheap-in-dubai-know-the-tax-structure-and-pricing-here-3193352&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;दुबई में सोना इतना सस्ता क्यों होता है, क्या है वहां टैक्स का खेल?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सेहत के लिए कितना खतरनाक?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाला सैचुरेटेड वनस्पति फैट और हाइड्रोजनीकृत तेल हमारे शरीर में जाकर खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को अत्यधिक बढ़ा देते हैं. यह ट्रांस फैट हमारी रक्त धमनियों को ब्लॉक कर देता है, जिससे बहुत कम उम्र में ही लोगों में दिल का दौरा पड़ने और दिल से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियां होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;FSSAI ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे जो खा रहे हैं उसकी असल प्रकृति क्या है. इस नए कानून के लागू होने के बाद यदि कोई रेस्टोरेंट या पैकेटबंद उत्पाद बनाने वाली कंपनी गैर-डेयरी पनीर का इस्तेमाल करेगी, तो उन्हें अपने मेनू कार्ड और पैकेट के लेबल पर बड़े अक्षरों में नॉन-डेयरी उत्पाद या एनालॉग लिखना अनिवार्य होगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a title=&quot;अलास्का की तेल पाइपलाइन बर्फ में जमती क्यों नहीं, जानें क्या है साइंस?&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/gk/why-doesn-t-the-alaska-oil-pipeline-freeze-in-extreme-cold-know-the-science-explained-3193366&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;अलास्का की तेल पाइपलाइन बर्फ में जमती क्यों नहीं, जानें क्या है साइंस?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/25/933245b537544a8a491c89296c2c6bdb17903253713591474_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[जानवर गंदा पानी भी पचा लेते हैं इंसान क्यों नहीं, कितना अलग है सिस्टम?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-animals-drink-dirty-water-digest-bacteria-stomach-acid-human-immune-system-comparison-3193651</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-animals-drink-dirty-water-digest-bacteria-stomach-acid-human-immune-system-comparison-3193651#respond</comments><pubDate>Sat, 26 Sep 2026 10:25:09 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-animals-drink-dirty-water-digest-bacteria-stomach-acid-human-immune-system-comparison-3193651</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जंगल या खुले मैदानों में घूमते हुए आपने अक्सर देखा होगा कि जंगली जानवर तालाबों, नदियों या किसी भी गड्ढे का ठहरा हुआ गंदा पानी बड़े मजे से पी लेते हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि उस दूषित पानी को पीने बाद भी वे बीमार नहीं पड़ते और पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके विपरीत, यदि कोई इंसान वैसा गंदा पानी पी ले, तो वह डायरिया, टाइफाइड या फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है. इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि जानवरों के शरीर की एक खास बनावट और उनका आंतरिक सिस्टम काम करता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पेट का अत्यधिक एसिडिक होना&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जंगली जानवरों के गंदा पानी पचा लेने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनके पेट में बनने वाला बेहद शक्तिशाली एसिड होता है. मांसाहारी और कई अन्य जंगली जानवरों के पेट में पाया जाने वाला गैस्ट्रिक एसिड इंसानों के मुकाबले कहीं ज्यादा गाढ़ा और तेज होता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इंसानों के पेट का एसिड जहां हल्का होता है, वहीं जानवरों के पेट का PH लेवल बहुत कम होता है. जब जानवर गंदे पानी के साथ हानिकारक बैक्टीरिया या वायरस निगलते हैं, तो यह शक्तिशाली एसिड उन किटाणुओं को पेट के भीतर ही तुरंत जलाकर नष्ट कर देता है. जिससे दूषित पानी में मौजूद रोगाणु उनके आंतों तक नहीं पहुंच पाते.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इम्यून सिस्टम का मजबूत होना&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम इंसानों की तुलना में बहुत अलग तरीके से काम करता है. इंसानों ने सदियों से साफ-सुथरा और पका हुआ खाना शुरू कर दिया था, जिसके कारण हमारा शरीर साफ माहौल का आदी हो चुका है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दूसरी तरफ, जगंली जानवर जन्म से ही प्रकृति के बीच हर तरह के बैक्टीरिया के संपर्क में रहते हैं. लगातार ऐसे माहौल में रहने की वजह से उनका इम्यून सिस्टम इन रोगाणुओं के खिलाफ विशेष एंचीबॉडीज तैयार कर लेता है. इसे इनेट इम्यूनिटी कहा जाता है, जो उन्हें प्राकृतिक रूप से बीमारियों से लड़ने की जबरदस्त ताकत देती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/home-tips-best-foldable-racks-options-for-your-room-that-cover-low-space-and-are-adjustable-3193204&quot;&gt;&lt;strong&gt;कम बजट में ज्यादा जगह, ये हैं बेस्ट फोल्डेबल रूम रैक ऑप्शंस&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इंसानी शरीर क्यों हो गया है कमजोर?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर इंसानों के इतिहास को देखा जाए तो हजारों साल पहले हमारे पूर्वज भी जंगलों में रहते थे और नदियों-झरनों का पानी ही पीते थे. लेकिन जैसे-जैसे इंसानी सभ्यता का विकास हुआ, हमने पानी को उबालकर, छानकर और फिल्टर करके पीना शुरू कर दिया.&amp;nbsp;आधुनिक तकनीकों जैसे RO वाटर और प्यूरीफायर के इस्तेमाल ने हमें साफ पानी तो दिया, लेकिन इसकी वजह से समय के साथ हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम सुरक्षात्मक रूप से सुस्त हो गया. आज हमारा पाचन तंत्र इतना संवेदनशील हो चुका है कि वह पानी में मौजूद जरा से भी नए बैक्टीरिया को पानी सहन नहीं कर पाता और तुरंत पेट खराब हो जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/tb-spreads-among-monkeys-in-mathura-due-to-human-negligence-3193119&quot;&gt;इंसानों की लापरवाही से बंदरों में फैला टीबी, अब मंडराया गंभीर खतरा&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/25/f154861784577ea2088152b0435edbf517903303666721474_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>