World Powerful Drones: आधुनिक सैन्य रणनीतियों में अब केवल टैंक, तोपें और लड़ाकू विमान ही जीत की गारंटी नहीं रहे, बल्कि मानव रहित ड्रोन युद्ध का सबसे मारक हथियार बन चुके हैं. चाहे दुश्मन के ठिकाने की जासूसी करनी हो, सीधा मिसाइल हमला करना हो या फिर खुद विस्फोटक बनकर लक्ष्य से टकराना हो, ड्रोन हर मोर्चे पर आगे हैं. अमेरिका, चीन, तुर्किए, इजराइल और ईरान जैसे देश आज ड्रोन तकनीक में सबसे आगे हैं. वहीं भारत भी काल जैसे आधुनिक ड्रोन सिस्टम के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को धूल चटाने की क्षमता हासिल कर रहा है. चलिए ताकतवर देशों के ड्रोन के बारे में जानें.
युद्ध में ड्रोन क्यों बने बेहतर विकल्प?
पारंपरिक लड़ाकू विमानों की तुलना में ड्रोन बेहद कम लागत में तैयार होते हैं और इनमें पायलट की जान जाने का कोई जोखिम नहीं रहता है. एक महंगे फाइटर जेट को उड़ाने में भारी ईंधन और ट्रेनिंग का खर्च आता है, जबकि ड्रोन कई घंटों तक आसमान में मंडराकर कमांड सेंटर को पल-पल का लाइव वीडियो भेज सकते हैं. हालिया युद्धों में देखा गया है कि कुछ लाख रुपये के छोटे ड्रोन ने करोड़ों के टैंक, तेल डिपो, रडार सिस्टम और सैन्य ठिकानों को चुटकियों में तबाह कर दिया है.
अमेरिका का ताकतवर ड्रोन
ड्रोन तकनीक में अमेरिका आज भी दुनिया का सबसे आधुनिक और ताकतवर देश माना जाता है. अमेरिका के पास रीपर और ग्लोबल हॉक जैसे बेहद आधुनिक प्लेटफॉर्म हैं, जो सीधे सैटेलाइट कम्युनिकेशन प्रणाली से नियंत्रित होते हैं. इसके जरिए अमेरिकी ऑपरेटर हजारों किलोमीटर दूर बैठकर भी दुश्मन पर सटीक निशाना साध सकते हैं. अमेरिकी ड्रोन में लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, थर्मल सेंसर और रडार प्रणाली इन्हें केवल एक हथियार नहीं, बल्कि एक पूरा खुफिया और जासूसी नेटवर्क बना देती है.
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चीन का स्वार्म हमला
चीन ने बहुत कम समय में छोटे निगरानी ड्रोन से लेकर भारी हथियार ले जाने वाले हमलावर ड्रोन तैयार कर लिए हैं. चीन की सबसे बड़ी ताकत स्वार्म ड्रोन तकनीक है, जिसमें दर्जनों ड्रोन एक साथ मिलकर झुंड में हमला करते हैं. जब एक साथ अलग-अलग दिशाओं से इतने सारे ड्रोन आते हैं, तो दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह नाकाम हो जाता है. इसके अलावा चीन दुनिया के कई देशों को अपने सशस्त्र ड्रोन बेचकर बड़ा निर्यातक बन चुका है.
तुर्किए का कम बजट में बेहतरीन ड्रोन मॉडल
तुर्किए ने बायरकतार जैसे ड्रोन बनाकर दुनिया को दिखाया है कि कम बजट में भी बेहतरीन युद्धक क्षमता हासिल की जा सकती है. तुर्किए के ड्रोन की खासियत यह है कि वे जमीनी सेना, तोपखाने और खुफिया एजेंसियों से सीधे जुड़े रहते हैं. जैसे ही ड्रोन किसी लक्ष्य की पहचान करता है, वह डेटा तुरंत तोपखाने या मिसाइल यूनिट तक पहुंच जाता है. सीरिया, लीबिया और अन्य संघर्षों में तुर्किए के ड्रोन ने अपनी मारक क्षमता साबित की है.
इजराइल का लोइटरिंग म्यूनिशन विशेषज्ञता
इजराइल को लंबे समय से ड्रोन और सेंसर तकनीक का मास्टर माना जाता है. इजराइली ड्रोन हवा में लंबे समय तक चुपचाप रहकर बहुत छोटे लक्ष्यों पर भी बारीक नजर रख सकते हैं. इजराइल ने लोइटरिंग म्यूनिशन यानी सुसाइड ड्रोन तकनीक में महारत हासिल की है, जो लक्ष्य के ऊपर तब तक मंडराते रहते हैं जब तक सटीक मौका न मिले. भारत ने भी अपनी सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने के लिए इजराइली ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया है.
ईरान का सस्ता और घातक शाहेद
ईरान ने शाहेद सीरीज के जरिए साबित किया है कि महंगे हथियारों के बिना भी दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचाया जा सकता है. ये वन-वे अटैक या सुसाइड ड्रोन बेहद सस्ते होते हैं, लेकिन सैकड़ों किलोमीटर दूर तक जाकर भारी तबाही मचा सकते हैं. जब ईरान या उसके सहयोगी सैकड़ों की संख्या में ये ड्रोन दागते हैं, तो दुश्मन को इन्हें गिराने के लिए करोड़ों की मिसाइलें खर्च करनी पड़ती हैं, जिससे दुश्मन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
रूस-यूक्रेन युद्ध और एफपीवी क्रांति
रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग आधुनिक ड्रोन युद्ध की सबसे बड़ी प्रयोगशाला बन चुकी है. इस संघर्ष में एफपीवी (फर्स्ट पर्सन व्यू) ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है. छोटे और सस्ते एफपीवी ड्रोन को ऑपरेटर स्पेशल चश्मों और कैमरों की मदद से सीधे दुश्मन के टैंक के हैच या बंकर के अंदर घुसा देते हैं. यह तकनीक साबित करती है कि अब युद्ध का नतीजा महंगे जहाजों से नहीं, बल्कि छोटे और चालाक ड्रोन से तय हो रहा है.
भारत का काल ड्रोन और दूर की मार
वैश्विक ड्रोन होड़ के बीच भारत भी अपनी ताकत तेजी से बढ़ा रहा है. भारत द्वारा विकसित किया जा रहा काल ड्रोन लंबी दूरी के स्ट्राइक मिशनों के लिए तैयार किया जा रहा है. यह आधुनिक ड्रोन हजारों किलोमीटर दूर छिपे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और विनाशकारी हमला करने में सक्षम होगा. इजराइली और स्वदेशी तकनीक के मेल से भारत अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के साथ-साथ भविष्य के युद्धों के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर रहा है.
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