Annamalai BJP: तमिलनाडु की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है. कभी पुलिस की वर्दी में अपराधियों के छक्के छुड़ाने वाले और बाद में बीजेपी का फायरब्रांड चेहरा बने के. अन्नामलाई को लेकर कयासों का बाजार गर्म है. कोयंबटूर की सड़कों पर लगे कुछ पोस्टर्स और अन्नामलाई की दिल्ली दौड़ ने राज्य से लेकर केंद्र तक के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है. हर कोई बस यही जानना चाहता है कि क्या अन्नामलाई बीजेपी का साथ छोड़ रहे हैं या फिर उनके दिमाग में कोई नया सियासी दांव चल रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने उनकी पुरानी सरकारी नौकरी और पेंशन के नियमों को लेकर भी लोगों में दिलचस्पी बढ़ा दी है. 

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क्या बीजेपी छोड़ेंगे अन्नामलाई?

तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर कड़ा सस्पेंस बना हुआ है. दरअसल, कोयंबटूर में उनके समर्थकों की तरफ से कुछ बेहद विशाल और अनोखे पोस्टर्स लगाए गए हैं. इन पोस्टर्स के सामने आने के बाद से ही यह अफवाहें तेजी से फैल रही हैं कि वे बीजेपी से इस्तीफा दे सकते हैं. चर्चा तो यह भी है कि वे बीजेपी से अलग होकर एक नया राजनीतिक मंच या क्षेत्रीय पार्टी बनाने जैसी किसी बड़ी रणनीतिक पहल की तैयारी में जुटे हुए हैं. हालांकि, इस पूरे मामले पर खुद अन्नामलाई ने अब तक अपनी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं की है. 

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अन्नामलाई का आईपीएस का सफर

अन्नामलाई की पहचान सिर्फ एक राजनेता के तौर पर नहीं है, बल्कि राजनीति में आने से पहले वे देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा का हिस्सा थे. के. अन्नामलाई 2011 बैच के आईपीएस (IPS) अधिकारी थे. उन्होंने कर्नाटक कैडर के तहत भारतीय पुलिस सेवा में अपनी जिम्मेदारी संभाली थी. पुलिस सेवा के दौरान अपनी कड़क कार्यशैली के कारण वे काफी लोकप्रिय हुए थे. लगभग 8 साल तक पुलिस सेवा में देश की सेवा करने के बाद, उन्होंने साल 2019 में अपने इस रसूखदार पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद वे बीजेपी में शामिल होकर राजनीति में सक्रिय हो गए थे.

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क्या अन्नामलाई को अभी भी मिलती है पेंशन?

आईपीएस की नौकरी छोड़ने के बाद अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या अन्नामलाई को अभी भी सरकार से पेंशन मिलती है. इसका सीधा और साफ जवाब सरकारी नियमों में छिपा है. नियमों के मुताबिक, जो अधिकारी सेवा के दौरान स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेते हैं, केवल उन्हें ही पेंशन का लाभ मिलता है. चूंकि अन्नामलाई ने अपने पद से बाकायदा इस्तीफा दिया था, इसलिए नियमानुसार इस्तीफे के मामलों में पेंशन का कोई प्रावधान नहीं होता है. यही वजह है कि उन्हें अब आईपीएस सेवा की कोई पेंशन नहीं मिलती है. 

पोस्टर्स ने बढ़ाई सियासी गर्मी

राजनीति की बात करें तो राजनीतिक गलियारों में अन्नामलाई के बीजेपी छोड़ने की चर्चाओं को बल उनके जन्मदिन से ठीक पहले मिला. 4 जून को अन्नामलाई का जन्मदिन है और इससे पहले ही तमिलनाडु की प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर बड़े-बड़े पोस्टर्स लगा दिए गए. इन पोस्टर्स पर समर्थकों ने 'हमारे नेता, आइए और हमारा नेतृत्व कीजिए' जैसे बड़े और आकर्षक नारे लिखे हैं. इन नारों को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके समर्थक उन्हें किसी बड़े और स्वतंत्र रूप में देखना चाहते हैं. इन पोस्टर्स के बाद से ही राज्य की राजनीति में तरह-तरह के कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं. हालांकि इन सबसके बीच वे आज यानि मंगलवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात करने वाले हैं.

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