World Happiness Report: ताजा वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट ने पूरे दक्षिण एशिया में एक बड़ी बहस छेड़ दी है. मजबूत आर्थिक विकास और बड़ी जीडीपी के बावजूद भी भारत 147 देशों में से 116वें स्थान पर है, वहीं पाकिस्तान 104वें स्थान पर है. इस अंतर ने कई लोगों को हैरान कर दिया है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.
सामाजिक सहयोग की बड़ी भूमिका
पाकिस्तान की ऊंची रैंकिंग के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक उसका मजबूत सामाजिक सहयोग तंत्र है. पाकिस्तान में लोग मुश्किल समय में अपने परिवार, दोस्त और समुदाय पर ज्यादा भरोसा करते हैं. अपनेपन और सहयोग की भावना जीवन के सेटिस्फेक्शन को काफी बढ़ा देती है.
उदारता और दयालुता
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान उदारता इंडिकेटर में काफी अच्छा स्कोर करता है. लगभग 39.2% पाकिस्तानियों ने बताया कि उन्होंने दान दिया. वहीं भारत में यह आंकड़ा 35.5% था. इसी तरह 56.9% पाकिस्तानियों ने कहा कि उन्होंने हाल ही में किसी अजनबी की मदद की. वहीं भारत में यह आंकड़ा 40.7% था. दयालुता के ये रोजमर्रा के काम खुशी के स्तर में सकारात्मक योगदान देते हैं.
उम्मीद और हकीकत के बीच अंतर
दरअसल उम्मीद एक बड़ी मनोवैज्ञानिक भूमिका निभाती हैं. भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में जब लक्ष्य पूरे नहीं होते तो बढ़ती आकांक्षाएं अक्सर असंतोष पैदा करती हैं. इसके उलट पाकिस्तान जैसे देशों में उम्मीदें तुलनात्मक रूप से कम हो सकती हैं. इसी के साथ लोग छोटी-छोटी उपलब्धियों में ही संतोष पा लेते हैं.
भारत में खुशी को प्रभावित करने वाली चुनौतियां
कई ढांचागत मुद्दे भारत की रैंकिंग को प्रभावित करते हैं. युवाओं में बढ़ता तनाव, सोशल मीडिया का बढ़ता दबाव और कड़ी प्रतिस्पर्धा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को जन्म देते हैं. साथ ही इनकम की असमानता और महंगाई कई परिवारों के लिए आर्थिक तनाव को बढ़ा देती हैं. इतना ही नहीं बल्कि भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण ने भीड़भाड़, प्रदूषण और नौकरी से जुड़े तनाव जैसी चुनौतियों को भी खड़ा कर दिया है.
क्या है रिपोर्ट की कार्य प्रणाली?
दरअसल भारत जैसे 140 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देशों के लिए सर्वे में सिर्फ 3000 लोगों से ही बात की जाती है. यह पूरे देश को रिप्रेजेंट करने के लिए काफी कम है. इसी के साथ यह रिपोर्ट लोगों के अपने जीवन के प्रति नजरिया पर भी आधारित है. यह सिर्फ आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर नहीं होती.
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