यमन में तेजी से क्यों खत्म हो रहा है पानी, क्या यह बिना पानी का पहला देश होगा?
Yemen Water Crisis: यमन इस वक्त गंभीर पानी के संकट से जूझ रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर यह संकट कैसे बना और क्या यमन दुनिया का पहला बिना पानी का देश बनेगा.

- यमन भूजल खत्म होने वाला पहला देश बन सकता है।
Yemen Water Crisis: यमन दुनिया के सबसे गंभीर जल संकटों में से एक का सामना कर रहा है. यहां तेजी से घटते भूजल भंडार समुदाय, खेती और यहां तक कि देश की राजधानी के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं. भू वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस बात की चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो यमन इस्तेमाल लायक भूजल खत्म होने वाला पहला देश बन सकता है. यह संकट कई आपस में जुड़ी वजहों का नतीजा है.
यमन में कोई स्थायी नदी नहीं है
यमन की सबसे बड़ी भौगोलिक कमियों में से एक यह है कि यहां एक भी स्थायी नदी नहीं है. यह देश मुख्य रूप से नियमित बारिश और सदियों से जमीन के नीचे जमा भूजल पर निर्भर है.
क्योंकि बारिश कम और अनिश्चित होती है इस वजह से घर, खेती और दूसरी गतिविधियों के लिए भूजल पानी का मुख्य स्रोत बन गया है. एक बार जब ये जमीनी भंडार खत्म हो जाते हैं तो उन्हें प्राकृतिक रूप से फिर से भरने में काफी लंबा समय लग सकता है.

भूजल काफी तेजी से निकाला जा रहा है
सबसे बड़ा तात्कालिक खतरा भूजल का काफी ज्यादा दोहन है. एक्विफर से पानी उतनी तेजी से निकाला जा रहा है जितनी तेजी से बारिश से वे भर नहीं पाते. रिपोर्ट्स के मुताबिक यमन के कुछ हिस्सों में जल स्तर हर साल 6 मीटर तक गिर रहा है. यही वजह है कि किसान और गहरे कुएं खोदने को मजबूर हैं. कुछ जगहों पर पानी की तलाश में 800 मीटर से ज्यादा गहराई तक खुदाई की जा रही है. इससे एक खतरनाक चक्र बनता है. जैसे-जैसे कम गहरे स्रोत खत्म होते हैं समुदाय और गहरे बोरवेल खोदते हैं. इससे पानी निकालने की लागत और मेहनत बढ़ जाती है.
काट की खेती में काफी ज्यादा पानी खर्च होता है
काट की खेती यमन के जल संकट के पीछे एक और बड़ी वजह है. काट के पत्तों को पारंपरिक रूप से उनके उत्तेजक असर के लिए चबाया जाता है और यह एक जरूरी नकदी फसल बन गई है.
हालांकि यह फसल यमन के कृषि जल का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करती है. अनुमान बताते हैं कि खेती में इस्तेमाल होने वाले पानी का लगभग 40% से 60% हिस्सा काट की खेती में खर्च हो जाता है.

युद्ध ने पानी के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया
यमन में चल रहे गृह युद्ध ने संकट को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है. 2015 से संघर्ष ने पूरे देश में पंपिंग स्टेशनों, पाइपलाइन और जल उपचार सुविधा को नुकसान पहुंचाया है. बिजली की कमी और ईंधन मिलने में मुश्किल की वजह से कुओं और पंपिंग सिस्टम को चलाना भी मुश्किल और महंगा हो गया है. जिस जगह पर अभी भी जमीन के नीचे का पानी मौजूद है वहां भी खराब इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से लोग सुरक्षित तरीके से उस पानी तक नहीं पहुंच पाते.
जलवायु परिवर्तन संकट को और बढ़ा रहा है
जलवायु परिवर्तन एक और मुश्किल खड़ी कर रहा है. तापमान बढ़ने से सूखे का समय लंबा हो रहा है और पानी की मांग भी बढ़ रही है. बारिश का पैटर्न भी अनिश्चित होता जा रहा है. जब बारिश होती है तो वह कम समय में जबरदस्त बाढ़ का रूप ले लेती है. पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसकर एक्विफर को भरने के बजाय तेजी से बह जाता है. साथ ही बाढ़ से इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद हो सकता है.
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क्या यमन पानी खत्म होने वाला पहला देश बन जाएगा?
इस बात की संभावना कम है कि यमन में सचमुच सारा पानी खत्म हो जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि वहां समुद्र तट और पानी के दूसरे संभावित स्रोत भी हैं. हालांकि बड़ी चिंता यह है कि यह अपनी आबादी के लिए पर्याप्त पीने के पानी और भूजल तक पहुंच खोने वाला पहला देश बन सकता है. यमन में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता पहले से ही काफी कम है. आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले अंतरराष्ट्रीय पैमाने के मुताबिक जब किसी देश में सालाना नवीकरणीय पानी के उपयोगिता प्रति व्यक्ति 1000 क्यूबिक मीटर से कम हो जाती है तो उसे पानी की कमी वाला देश माना जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक यमन में यह आंकड़ा गिरकर लगभग 100 से 150 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति हो गया है.
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