River Water: नदियां और समुद्र धरती के प्राकृतिक जल चक्र से जुड़े होते हैं. लेकिन इसके बावजूद भी उनके पानी का स्वाद बिल्कुल अलग-अलग होता है. समुद्र का पानी खारा होता है मगर नदी का पानी आमतौर पर मीठा होता. इसकी मुख्य वजह यह है कि प्रकृति में नमक कैसे घूमता है, नदियां कैसे लगातार बहती हैं और समुद्र में लाखों सालों तक धीरे-धीरे खनिज कैसे जमा होते रहते हैं.
नदी के पानी में भी नमक
हालांकि नदी का पानी पीने में मीठा लगता है लेकिन इसमें भी नमक होता है. बारिश का पानी हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड के साथ मिलकर थोड़ा एसिडिक हो जाता है. जब यह पानी चट्टान और मिट्टी के ऊपर से बहता है तो यह धीरे-धीरे सोडियम और क्लोराइड जैसे खनिज और नमक को घोल लेता है. ये घुले हुए पदार्थ नदियों में पहुंचते हैं लेकिन इनकी मात्रा काफी कम होती है. इस वजह से नदी का पानी खारा नहीं लगता.
लगातार बहाव की वजह से नमक जमा नहीं हो पाता
झील या फिर समुद्र के उलट नदियां लगातार बहती रहती हैं. वे पहाड़ से निकलती हैं और समुद्र की तरफ बहती हैं. साथ ही अपने साथ घुले हुए खनिजों को भी ले जाती हैं. क्योंकि पानी कभी भी एक जगह पर ज्यादा देर तक नहीं रुकता इस वजह से नमक को जमा होने का मौका नहीं मिलता. इसके बजाय घुले हुए खनिज नदी के बहाव के साथ आगे बढ़ते रहते हैं.
समुद्र खारा क्यों हो जाता है?
समुद्र ज्यादातर नदियों की आखिरी मंजिल होता है. इस वजह से बड़े इलाकों से आए घुले हुए नमक आखिरकार यहीं जमा होते रहते हैं. इसी के साथ सूरज की गर्मी से समुद्र का पानी लगातार भाप बनकर उड़ता रहता है. भाप बनने की प्रक्रिया के दौरान सिर्फ शुद्ध पानी ही हवा में ऊपर उठता है.
जल चक्र समुद्र के खारेपन को बढ़ाता है
भाप बना पानी बाद में बारिश के रूप में धरती पर वापस आ जाता है और फिर से नदियों में पहुंचता है. जैसे-जैसे नदियां चट्टानों और मिट्टी से थोड़ी मात्रा में खनिज घोलती रहती हैं वे उन्हें वापस समुद्र तक पहुंचाती रहती हैं.
यह प्रक्रिया लाखों सालों से चल रही है. क्योंकि पानी भाप बनकर समुद्र से निकल जाता है इस वजह से नमक पीछे रह जाते हैं. इसलिए समुद्र में धीरे-धीरे काफी सारा नमक जमा हो गया है. इससे समुद्र का पानी खारा हो गया है और नदियां मीठी बनी हुई हैं.
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