मानसून की फुहारें जहां तपती गर्मी से राहत देती हैं, वहीं अपने साथ आंधी, तूफान और आकाशीय बिजली का खतरा भी लाती हैं. जब भी आसमान में जोर से बिजली कड़कती है, तो अक्सर बड़े-बुजुर्ग तुरंत मोबाइल फोन बंद करने या उसका इस्तेमाल न करने की सलाह देने लगते हैं. लोगों के मन में यह डर बैठा हुआ है कि मोबाइल का नेटवर्क आसमान से गिरती बिजली को चुंबक की तरह खींच सकता है. लेकिन क्या वाकई विज्ञान भी इस बात का समर्थन करता है या यह सिर्फ एक सामाजिक भ्रांति है? आइए विस्तार से इसके पीछे का वैज्ञानिक सच समझते हैं.

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मोबाइल और आकाशीय बिजली का वैज्ञानिक सच

अक्सर माना जाता है कि मोबाइल फोन ऑन रखने से आकाशीय बिजली सीधे आपकी तरफ आकर्षित हो सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस बात को पूरी तरह खारिज किया है. आधुनिक स्मार्टफोन रेडियो तरंगों पर काम करते हैं, जो बहुत कम शक्ति वाली होती हैं. इन तरंगों में इतनी ऊर्जा या चुम्बकीय शक्ति नहीं होती कि वे आसमान में मौजूद लाखों वोल्ट की आकाशीय बिजली को अपनी तरफ खींच सकें. इसलिए, सामान्य परिस्थितियों में बंद कमरे के भीतर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से आकाशीय बिजली गिरने का कोई सीधा खतरा नहीं होता है. 

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खुली जगह और ऊंचे ठिकानों का असली खतरा

आकाशीय बिजली गिरने का सबसे बड़ा खतरा मोबाइल फोन के सिग्नलों से नहीं, बल्कि आपकी भौगोलिक स्थिति से जुड़ा हुआ है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आकाशीय बिजली हमेशा धरती पर मौजूद सबसे ऊंचे माध्यम से होकर गुजरने का सबसे छोटा रास्ता तलाशती है. यही कारण है कि यह अमूमन खुले मैदानों, बड़ी और ऊंची इमारतों, अकेले खड़े पेड़ों, पानी के स्रोतों और लोहे के बिजली के खंभों पर ज्यादा गिरती है. यदि आप ऐसी किसी खुली जगह पर खड़े हैं, तो आप पर बिजली गिरने का जोखिम सबसे अधिक होता है.

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खुली जगह पर फोन इस्तेमाल करने की गलती

भले ही मोबाइल के सिग्नल बिजली को आकर्षित न करते हों, लेकिन खराब मौसम में खुली जगह पर खड़े होकर फोन पर बात करना भारी पड़ सकता है. जब आप किसी खुले मैदान या पेड़ के नीचे फोन का उपयोग करते हैं, तो आपका पूरा ध्यान बातचीत में केंद्रित हो जाता है. ऐसे में आप आस-पास के बदलते मौसम और खतरे को भांप नहीं पाते हैं. यदि उस क्षेत्र में बिजली गिरती है, तो मोबाइल के धात्विक पुर्जे करंट को आपके शरीर में तेजी से ट्रांसफर कर सकते हैं, जिससे गंभीर हादसा हो सकता है.

आंधी और तेज बारिश में बचाव के तरीके

गंभीर आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली कड़कने के दौरान खुद को सुरक्षित रखना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. जैसे ही बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हो, तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित कंक्रीट की इमारत के भीतर चले जाना चाहिए. इस दौरान भूलकर भी किसी पेड़ की ओट में, टीन शेड के नीचे या खुले मैदान में न ठहरें. इसके साथ ही, घर के भीतर रहने पर भी टीवी, फ्रिज और कंप्यूटर जैसे बिजली से चलने वाले उपकरणों के प्लग निकाल देने चाहिए और उनसे उचित दूरी बनाकर रखनी चाहिए. 

जीवन बचाने वाला महत्वपूर्ण 30-30 नियम

आकाशीय बिजली के प्रकोप से बचने के लिए सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा '30-30 नियम' का पालन करने की सलाह दी जाती है. इस नियम के अनुसार, यदि आपको आसमान में बिजली चमकने और उसके गरजने की आवाज सुनाई देने के बीच का समय 30 सेकंड से कम महसूस होता है, तो समझ लें कि बिजली आपके बहुत करीब है और खतरा अत्यधिक बढ़ चुका है. ऐसी स्थिति में बिना एक पल गंवाए तुरंत किसी सुरक्षित स्थान पर शरण लें और वहां तब तक रुके रहें जब तक कि आखिरी गड़गड़ाहट के बाद पूरे 30 मिनट न बीत जाएं.

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