Dubai Gold Price: दुबई को बड़े पैमाने पर सोने के व्यापार, गहनों के बड़े बाजार और प्रतिस्पर्धी कीमतों की वजह से सोने का शहर कहा जाता है. कई भारतीय खरीदार सोचते हैं कि दुबई में सोना अक्सर भारत की तुलना में सस्ता क्यों मिलता है.

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दरअसल यह अंतर मुख्य रूप से टैक्स, अंतरराष्ट्रीय कीमतों, मेकिंग चार्ज, सख्त क्वालिटी कंट्रोल और दुबई के एक बड़े ग्लोबल री एक्सपोर्ट हब होने की वजह से होता है. 

भारत की तुलना में दुबई का टैक्स स्ट्रक्चर 

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दुबई और भारत के बीच कीमतों में अंतर की एक मुख्य वजह टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी में अंतर है.  दुबई में इंपोर्ट किया जाने वाले कच्चे सोने पर कोई कस्टम ड्यूटी नहीं लगती जिस वजह से मेटल की शुरुआती लागत कम हो जाती है. दुबई ने 2018 में सोने पर 5% वैल्यू एडेड टैक्स लागू किया था. हालांकि पर्यटक टूरिस्ट के लिए टैक्स रिफंड स्कीम के तहत रिफंड का दावा कर सकते हैं. जब योग्य पर्यटक रजिस्टर्ड रिटेलर से सोना खरीदते हैं तो उन्हें एक डिजिटल टैक्स फ्री टैग मिलता है. 

दुबई से जाते समय वे जरूरी डॉक्यूमेंट दिखाकर वैल्यू एडेड टैक्स रिफंड का दावा कर सकते हैं. इस पर लागू एडमिनिस्ट्रेटिव कटौती की जा सकती है. भारत में सोने के इंपोर्ट पर कई तरह के चार्ज लगते हैं. इनमें कस्टम ड्यूटी,  एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस और तीन प्रतिशत जीएसटी शामिल हैं. कुल टैक्स का बोझ लगभग 11% से 13% तक हो सकता है. इस वजह से सोने की आखिरी कीमत बढ़ जाती है. 

दुबई में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत 

दुबई में सोने का बाजार अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों को बारीकी से फॉलो करता है. दुबई गोल्ड एंड ज्वेलरी ग्रुप ग्लोबल मार्केट की गतिविधि के आधार पर दिन में कई बार स्टैंडर्ड गोल्ड रेट अपडेट करता है. 

रिटेलर से सोना बेचते समय मौजूदा मार्केट रेट का इस्तेमाल करते हैं. भारत में कीमतें अंतरराष्ट्रीय दर, करेंसी एक्सचेंज में उतार-चढ़ाव, घरेलू मांग और स्थानीय बुलियन एसोसिएशन के फैसलों से प्रभावित होती हैं. यह अतिरिक्त वजह अंतिम बिक्री मूल्य में अंतर की वजह बन सकती है. हालांकि कीमत में वास्तविक अंतर उस दिन के अंतरराष्ट्रीय सोने की दर, करेंसी की वैल्यू, टैक्स, रिटेल मार्जिन और दूसरे लागू चार्ज पर निर्भर करता है.

ज्वैलरी बनाने की लागत में अंतर 

सोने के गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज एक और जरूरी कारक है. इन चार्ज में गहने बनाने में लगने वाली मेहनत और कारीगरी शामिल होती है. भारत में कई ज्वेलर्स सोने की कीमत के प्रतिशत के रूप में मेकिंग चार्ज की गणना करते हैं. यह चार्ज डिजाइन और ज्वेलरी के आधार पर 8% से 25% तक हो सकते हैं. जैसे-जैसे सोने की कीमत बढ़ती है, प्रतिशत के आधार पर लगने वाला मेकिंग चार्ज भी महंगा हो जाता है. 

दुबई में मेकिंग चार्ज अक्सर प्रति ग्राम एक निश्चित दर पर तय किए जाते हैं. यह तरीका खासकर बड़ी मात्रा में सोना खरीदने वालों के लिए ज्यादा किफायती हो सकता है. इसके अलावा रिटेलर्स के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा की वजह से ग्राहक मेकिंग चार्ज पर छूट के लिए मोलभाव कर सकते हैं.

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सोने की शुद्धता और सरकारी निगरानी 

कम कीमत का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि सोना घटिया क्वालिटी का ही है. दुबई का गोल्ड उद्योग सरकारी निगरानी में काम करता है और अधिकारी उपभोक्ता सुरक्षा और प्रोडक्ट स्टैंडर्ड की निगरानी के लिए जिम्मेदार होते हैं. 

दुबई की सेंट्रल लैबोरेटरी और डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर प्रोटेक्शन द्वारा जांच की जाती है. जो रिटेलर बताए गए स्टैंडर्ड से कम शुद्धता वाला सोना बेचते पाए जाते हैं उन्हें उल्लंघन और लागू कानून के आधार पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द होने या फिर जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है. खरीदारों को खरीदारी करने से पहले हॉलमार्किंग, शुद्धता, वजन, इनवॉइस और रिटेलर की विश्वसनीयता की जांच जरूर करनी चाहिए.

इसी के साथ दुबई अंतरराष्ट्रीय गोल्ड व्यापार का एक बड़ा केंद्र है. रिफाइनिंग, व्यापार या फिर री एक्सपोर्ट होने से पहले सोना अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों से इस शहर में आता है.

क्योंकि बाजार में सोने का बड़े पैमाने पर कारोबार होता है इस वजह से रिफाइनर और थोक विक्रेता कम मार्जिन पर काम कर सकते हैं.

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