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गुड फ्राईडे के बाद ईस्टर क्यों मनाते हैं ईसाई लोग, क्या इस दिन सच में जिंदा हो गए थे ईसा मसीह?

कविता गाडरी   |  05 Apr 2026 08:36 AM (IST)

ईसाई मान्यताओं के अनुसार गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. यह दिन उनके बलिदान और मानवता के लिए दिए गए त्याग और उनकी याद में शोक और प्रार्थना के रूप में मनाया जाता है.

गुड फ्राईडे के बाद ईस्टर क्यों मनाते हैं ईसाई लोग, क्या इस दिन सच में जिंदा हो गए थे ईसा मसीह?

गुड फ्राइडे और ईस्टर संडे

ईसाई धर्म में गुड फ्राइडे और ईस्टर दो बहुत महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व माने जाते हैं. हर साल मार्च या अप्रैल के महीने में यह दोनों दिन आस्था, शोक और फिर उत्सव के रूप में मनाया जाते हैं. वहीं इस बार 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे मनाया गया है, इसके बाद कल यानी 5 अप्रैल को ईस्टर संडे मनाया जाएगा. ऐसे में लोगों के मन में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर गुड फ्राइडे के बाद ही ईस्टर क्यों मनाया जाता है और इसका धार्मिक महत्व क्या है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि गुड फ्राइडे के बाद ईस्टर क्यों मनाते हैं और क्या इस दिन सच में ईसा मसीह जिंदा हो गए थे?

गुड फ्राइडे के बाद ही क्यों आता है ईस्टर?

ईसाई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. यह दिन उनके बलिदान और मानवता के लिए दिए गए त्याग और उनकी याद में शौक और प्रार्थना के रूप में मनाया जाता है. माना जाता है कि उन्होंने मानव जाति को पापों से मुक्ति दिलाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया. इसके ठीक दो दिन बाद यानी रविवार को यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की मान्यता है. इस घटना की खुशी में ईस्टर संडे मनाया जाता है. यही वजह है कि गुड फ्राइडे के बाद आने वाला रविवार ईसाई समुदाय के लिए सबसे बड़ा उत्सव बन जाता है. यह दिन दुख के बाद आशा और जीवन की वापसी का प्रतीक माना जाता है.

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क्या सच में वापस जिंदा हो गए थे यीशु?

बाइबल और ईसाई धर्म ग्रंथो के अनुसार सूली पर चढ़ाए जाने के तीसरे दिन यीशु मसीह फिर से जीवित हो गए थे. धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि पुनर्जीवित होने के बाद भी करीब 40 दिनों तक यीशु अपने शिष्यों के बीच रहे और उन्हें प्रेम, क्षमा, दया और मानवता का संदेश दिया. इसके बाद वे स्वर्ग लौट गए. हालांकि यह पूरी तरह आस्था और विश्वास का विषय है, जिसे ईसाई धर्म के अनुयायी पूरी श्रद्धा के साथ मनाते हैं. इस विश्वास के कारण ईस्टर को चमत्कार और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.

क्यों बदलती है ईस्टर की तारीख हर साल?

ईस्टर संडे हर साल एक ही तारीख को नहीं आता. इसकी तारीख वसंत विषुव के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा के आधार पर तय की जाती है. इसी वजह से यह  हर साल मार्च-अप्रैल में अलग-अलग दिन पड़ता है. वहीं गुड फ्राइडे से लेकर ईस्टर तक का समय ईसाई धर्म में बहुत खास माना जाता है. इस दौरान लोग यीशु मसीह के जीवन की अंतिम घटनाओं को याद करते हैं. गुड फ्राइडे शौक प्रार्थना और आत्मचिंतन का दिन होता है, जबकि ईस्टर संडे खुशी, उत्साह और नए जीवन का संदेश लेकर आता है.

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Published at: 05 Apr 2026 08:36 AM (IST)
Tags:Good FridayEaster SundayBible storyJesus resurrectionChristianity beliefs
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