Ocean Exploration: वैज्ञानिकों ने पूरी तरह से महासागरों की खोज करना बंद नहीं किया है. लेकिन गहरे समुद्र में रिसर्च की रफ्तार अंतरिक्ष की खोज के मुकाबले काफी धीमी है. आज भी दुनिया के 80% से ज्यादा महासागरों का नक्शा नहीं बनाया गया है. इससे गहरा समुद्र पृथ्वी के सबसे कम समझे जाने वाले इलाकों में से एक बन गया है.  अंतरिक्ष में जाना अक्सर समुद्र के सबसे गहरे हिस्सों में जाने से आसान होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि समुद्र की सतह के नीचे काफी ज्यादा दबाव, अंधेरा, बातचीत में मुश्किलें और जमा देने वाली ठंड होती है. 

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पानी का काफी ज्यादा दबाव 

गहरे समुद्र की खोज में सबसे बड़ी रूकावटों में से एक है पानी का काफी ज्यादा दबाव. अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों को मुख्य रूप से वैक्यूम वाले माहौल का सामना करना पड़ता है जहां दबाव शून्य हो जाता है. लेकिन जैसे-जैसे वैज्ञानिक समुद्र में गहराई तक जाते हैं दबाव तेजी से बढ़ता है. मारियाना ट्रेंच पर दबाव समुद्र तल की तुलना में लगभग 1000 गुना ज्यादा होता है. यह पृथ्वी का सबसे गहरा ज्ञात बिंदु है. इतना ज्यादा दबाव आम पनडुब्बी और उपकरण को कुछ ही सेकंड में कुचल सकता है. 

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देखने की क्षमता सीमित 

अंतरिक्ष के उलट जहां सूरज और तारों की रोशनी काफी दूर तक जा सकती है गहरा समुद्र पूरी तरह अंधेरे में डूबा होता है. सूरज की रोशनी सतह के नीचे सिर्फ 200 मीटर तक ही जा पाती है. उस बिंदु के आगे हमेशा अंधेरा रहता है.

बातचीत बनाए रखना बड़ी चुनौती 

पानी के नीचे बातचीत बनाए रखना अंतरिक्ष की तुलना में काफी ज्यादा मुश्किल है. रेडियो तरंगे अंतरिक्ष में आसानी से यात्रा करती हैं. इससे वैज्ञानिक अंतरिक्ष यान और लाखों किलोमीटर दूर काम कर रहे हैं रोवर के संपर्क में रह पाते हैं. हालांकि पानी के नीचे रेडियो सिग्नल ज्यादातर बेअसर होते हैं.

जमा देने वाला तापमान 

समुद्र की तलहटी का माहौल काफी ठंडा होता है. सबसे गहरे इलाकों में तापमान आमतौर पर जीरो डिग्री सेल्सियस से 3 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है.  ऐसे हालात बैटरी की क्षमता को कम कर सकते हैं, मैकेनिकल सिस्टम को धीमा कर सकते हैं और उपकरणों के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है.

काफी महंगे मिशन 

गहरे समुद्र के हर अभियान के लिए काफी ज्यादा खास पनडुब्बियों, दूर से चलाए जाने वाले वाहन, सेंसर और सहायता करने वाले जहाजों की जरूरत होती है. इन सिस्टम को काफी ज्यादा दबाव झेलना पड़ता है और साथ ही अंधेरे और ठंडे तापमान में भी काम करते रहना पड़ता है.

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