Solar Eclipse Eye Damage: सूर्य ग्रहण प्रकृति की सबसे दिलचस्प घटनाओं में से एक है. लेकिन इसमें इंसानी आंखों के लिए एक गंभीर खतरा भी होता है. काफी लोगों का ऐसा मानना है कि सूरज आंशिक रूप से ढका होता है इस वजह से उसे देखना सुरक्षित है. लेकिन विज्ञान कुछ और ही कहता है. ग्रहण के दौरान आंखों को नुकसान का खतरा असल में ज्यादा होता है.
सोलर रेटिनोपैथी क्या है?
ग्रहण के दौरान आंखों को होने वाले नुकसान को मेडिकल साइंस में सोलर रेटिनोपैथी कहा जाता है. ऐसा तब होता है जब तेज सूरज की रोशनी सीधे रेटिना को चोट पहुंचती है. रेटिना आंख के पीछे की रोशनी के प्रति संवेदनशील परत होती है जो रोशनी को विजुअल सिग्नल में बदलती है. यहां तक कि जब सूरज हल्का दिखता है तब भी उसकी अल्ट्रावायलेट और इंफ्रारेड रेडिएशन इतनी तेज होती है कि केमिकल और थर्मल रिएक्शन के जरिए रेटिना की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
ग्रहण के दौरान क्यों नहीं देखना चाहिए सूरज?
सूर्य ग्रहण के दौरान सूरज की दिखने वाली चमक कम हो जाती है. लेकिन हानिकारक अल्ट्रावायलेट और इंफ्रारेड किरण कम नहीं होती. यह अदृश्य किरण सीधे आंख में जाती हैं और रेटिना पर तेजी से फोकस होता है. अब क्योंकि सूरज दर्दनाक रूप से चमकदार नहीं लगता, लोग इसे ज्यादा समय तक घूरते रहते हैं. जिस वजह से ज्यादा रेडिएशन जमा होती है और नुकसान होता है.
पुतलियों के फैलने की समस्या
आमतौर पर तेज सूरज की रोशनी से हमारी पुतलियां सिकुड़ जाती हैं. जिस वजह से आंख में जाने वाली रोशनी की मात्रा सीमित हो जाती है. ग्रहण के दौरान आसपास का माहौल ज्यादा अंधेरा हो जाता है जिस वजह से पुतलियां फैल जाती हैं. जब कोई इस स्थिति में सूरज को देखा है तो काफी ज्यादा मात्रा में हानिकारक रेडिएशन अंदर चली जाती है और सीधे रेटिना के सबसे नाजुक हिस्से पर केंद्रित हो जाती है.
आम सनग्लासेस बेकार क्यों होते हैं?
आम सनग्लासेस दिखने वाली चमक को कम कर सकते हैं लेकिन वह खतरनाक अल्ट्रावायलेट और इंफ्रारेड रेडिएशन को ब्लॉक नहीं करते हैं. इससे सुरक्षा का झूठा एहसास होता है और हानिकारक किरण रेटिना तक पहुंचती रहती है. सिर्फ सर्टिफाइड आइएसओ 12312-2 सोलर व्यूइंग ग्लासेस ही सूरज की रोशनी को सुरक्षित लेवल तक कम करते हैं.
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