Blood Moon Reason: ब्लड मून रात के समय में दिखने वाले सबसे शानदार नजारों में से एक है. टोटल लूनर एक्लिप्स के दौरान चांद पूरी तरह से गायब नहीं होता बल्कि यह गहरे लाल, कॉपर या नारंगी रंग में चमकने लगता है. लेकिन ऐसा आखिर क्यों होता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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टोटल लूनर एक्लिप्स की भूमिका 

ब्लड मून टोटल लूनर एक्लिप्स के दौरान होता है. जब पृथ्वी सूरज और चांद की सीधी रेखा के बीच आ जाती है तब ब्लड मून होता है. इस अलाइनमेंट में पृथ्वी चांद तक सीधी धूप पहुंचने से रोकती है. हालांकि चंद पूरी तरह से अंधेरे में नहीं डूबता. इसके बजाय कुछ धूप अभी भी उस तक पहुंचती है. लेकिन यह धूप सिर्फ पृथ्वी के एटमॉस्फियर से गुजरने के बाद चांद तक पहुंचती है.

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रेड लाइट क्यों बची रहती है? 

सूरज की रोशनी सफेद दिख सकती है लेकिन यह असल में सात रंगों से बनी होती है. जब सूरज की रोशनी पृथ्वी के एटमॉस्फियर में आती है तो छोटी वेवलेंथ वाले नीले और बैंगनी रंग हवा के मॉलिक्यूल से टकराने के बाद आसानी से बिखर जाते हैं. इस प्रक्रिया को रेले स्कैटरिंग कहते हैं. यही वजह है कि दिन में आसमान नीला दिखता है. 

हालांकि लाल और नारंगी रोशनी की वेवलेंथ लंबी होती है. वे काफी कम स्कैटर करती हैं और एटमॉस्फियर में ज्यादा अच्छे से ट्रेवल कर सकती हैं. इस वजह से चंद्र ग्रहण के दौरान चांद की तरफ झुकने वाली ज्यादातर रोशनी लाल या नारंगी होती है.

चांद की तरफ रोशनी का झुकना 

भले ही धरती सीधी धूप को रोकती है लेकिन इसका एटमॉस्फियर एक बड़े लेंस की तरह काम करता है. एटमॉस्फियर धरती के किनारों के आसपास बची हुई लाल रोशनी को मोड़ता है और उसे चांद की सतह की तरफ रीडायरेक्ट करता है. इस वजह से सीधी धूप से रोशन होने के बजाय चंद उस धूप से रोशन होता है जो धरती के एटमॉस्फियर से फिल्टर होकर मुड़ी होती है.

लाल रंग का शेड क्यों बदलता है?

दरअसल हर ब्लड मून एक जैसा नहीं दिखता. कभी-कभी यह चमकीला नारंगी दिखता है. कभी यह गहरा लाल या फिर भूरा भी दिखता है. 

यह अंतर पृथ्वी के वायुमंडल में धूल, धुएं और प्रदूषण की मात्रा पर निर्भर करता है. बड़े ज्वालामुखी विस्फोटों के बाद या भारी वायुमंडलीय कणों के समय ज्यादा रोशनी रुक जाती है या फिर फिल्टर हो जाती है. इससे चांद ज्यादा गहरा और ज्यादा खून जैसा लाल दिखाई देता है.

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