Russia Rocket Launch: रूस के स्पेस प्रोग्राम का कजाकिस्तान के साथ एक खास संबंध है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी सबसे जरूरी लॉन्च साइट बैकोनूर कॉस्मोड्रोम रूस की मौजूदा सीमाओं से बाहर स्थित है. इसकी वजह सोवियत दौड़ में छिपी है. उस वक्त कजाकिस्तान यूएसएसआर का हिस्सा था. आज भी बैकोनूर अपनी लोकेशन, भूगोल, मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और दोनों देशों के बीच लंबे समय के समझौता की वजह से रूसी स्पेस मिशन में बड़ी भूमिका निभाता है.

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इक्वेटर के करीब होने का फायदा 

बैकोनूर का एक बड़ा फायदा यह है कि यह रूस की ज्यादातर लॉन्च साइटों के मुकाबले दक्षिण में स्थित है. इक्वेटर के करीब रॉकेट लॉन्च करने से पृथ्वी के घूमने से ज्यादा बूस्ट मिल सकता है. पृथ्वी की सतह अपने रोटेशन की वजह से पहले से ही पूर्व की तरफ घूम रही है. इस रोटेशन की दिशा में लॉन्च किया गया रॉकेट इस प्राकृतिक रफ्तार का फायदा उठा सकता है. इससे सही मिशन के लिए ऑर्बिट तक पहुंचने में लगने वाली ऊर्जा और ईंधन की मात्रा कम हो जाती है. बैकोनूर सीधे इक्वेटर पर तो नहीं है लेकिन इसकी लोकेशन उत्तर में स्थित कई जगहों की तुलना में एक उपयोगी भौगोलिक फायदा देती है.

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सोवियत संघ की विरासत 

बैकोनूर का इतिहास सोवियत स्पेस प्रोग्राम में गहराई से जुड़ा है. यह कॉस्मोड्रोम 1955 में बनाया गया था. उस वक्त कजाकिस्तान सोवियत संघ के गणराज्यों में से एक था. कोल्ड वॉर के दौरान बैकोनूर सोवियत रॉकेट लॉन्च और स्पेस एक्सप्लोरेशन का एक बड़ा केंद्र बन गया. इसका इस्तेमाल जरूरी मिशनों के लिए किया गया. इसमें दुनिया का पहला आर्टिफिशियल सैटेलाइट स्पुतनिक 1 का लॉन्च और शुरुआती मानव स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम शामिल हैं.

जब 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ तो कजाकिस्तान एक आजाद देश बन गया. लेकिन बैकोनूर में लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर कजाकिस्तान में ही रहा. इसके बाद रूस ने कजाख सरकार के साथ एक समझौते के जरिए इस सुविधा का इस्तेमाल जारी रखा. 

यह लोकेशन रॉकेट लॉन्च के लिए क्यों सही है?

रॉकेट लॉन्च के लिए काफी ज्यादा जगह की जरूरत होती है क्योंकि इस्तेमाल हो चुके रॉकेट स्टेज और दूसरे हिस्से वापस पृथ्वी पर गिर सकते हैं. बड़ी और कम आबादी वाले इलाकों के ऊपर लॉन्च करने से लोगों और संपत्ति को होने वाला खतरा कम हो जाता है. 

बैकोनूर बड़े कजाख स्टेप से घिरा हुआ है. इससे लॉन्च परिसर के आसपास काफी खुली जगह मिलती है. इस इलाके की भौगोलिक स्थिति उन वजहों में से एक थी जिसने इसे एक बड़े स्पेसपोर्ट के विकास के लिए उपयुक्त बनाया.

रूस ने कजाकिस्तान से बैकोनूर को लीज पर लिया है 

क्योंकि बैकोनूर कजाकिस्तान में है इस वजह से रूस का इस इलाके पर वैसा मालिकाना नहीं है जैसा अपनी सीमा के अंदर किसी लॉन्च साइट पर होता है.  इसके बजाय दोनों देश एक लंबी अवधि के लीज समझौते के तहत काम करते हैं. इस समझौते के तहत रूस कजाकिस्तान को सालाना लगभग 115 मिलियन डॉलर की लीज फीस देता है. यह व्यवस्था 2050 तक लागू रहेगी. 

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रूस वोस्तोचन्य कॉस्मोड्रोम क्यों बना रहा है? 

हालांकि बैकोनूर का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन किसी दूसरे देश में स्थित लॉन्च सुविधा पर निर्भर रहने से रूस के लिए लंबे समय की रणनीतिक चिंता पैदा होती है. बैकोनूर पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए रूस अपनी जमीन पर वोस्तोचन्य कॉस्मोड्रोम विकसित कर रहा है. 

वोस्तोचन्य कॉस्मोड्रोम रूस के फार ईस्ट में स्थित है और रूस को अपने सीधे कंट्रोल में एक और लॉन्च सुविधा देता है. वहां कामकाज बढ़ाने से रूस धीरे-धीरे कजाकिस्तान स्थित स्पेसपोर्ट पर अपनी निर्भरता को कम कर सकता है.

बैकोनूर दुनिया के सबसे ऐतिहासिक रूप से जरूरी स्पेस पोर्ट में से एक बना हुआ है. सोवियत युग का इंफ्रास्ट्रक्चर, भौगोलिक स्थिति और पहले से बनी लॉन्च सुविधाओं ने इस रूस के अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक जरूरी हिस्सा बना दिया है. रूस कजाकिस्तान से रोकेट इस वजह से लॉन्च नहीं करता की कजाकिस्तान रूस का हिस्सा है बल्कि इस वजह से करता है क्योंकि बैकोनूर सोवियत युग के दौरान वहां बनाया गया था और इस लंबी अवधि के लीज समझौते के तहत इस्तेमाल किया जा रहा है.

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