Banana Peel Slip: केले के छिलके पर अगर गलती से पैर आ जाए तो आदमी फिसलकर गिर सकता है. जब भी कोई व्यक्ति केले के छिलके पर पैर रखता है तो छिलके और जमीन के बीच की रगड़ काफी कम हो जाती है. इस वजह से पैर का फिसलना आसान हो जाता है. लेकिन शोधकर्ताओं ने पाया कि केले के छिलके में एक खास चिकना पदार्थ होता है. 

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पॉलीसैकराइड जेल की भूमिका 

केले के छिलके की बाहरी सतह पर एक जेल जैसे पदार्थ से भरी हुई छोटी-छोटी थैलियां होती हैं. जब भी किसी का पैर छिलके पर पड़ता है तो दबाव की वजह से ये छोटी थैलियां फट जाती हैं. फटने के बाद यह जेल छिलके और जमीन के बीच फैल जाता है. यह जेल पानी, शुगर और प्रोटीन से बना होता है. इस वजह से यह एक चिकना मिश्रण बन जाता है. यही वजह है कि पैर की सतह पर पकड़ अचानक से खत्म हो जाती है.

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काफी कम रगड़ 

फिसलने की मुख्य वजह रगड़ है. जापान के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध में पता चला है कि केले के छिलके का रगड़ गुणांक लगभग 0.07 होता है.  यह खोज इतनी अनोखी थी कि शोधकर्ताओं को Ig Nobel Prize से सम्मानित किया गया.  जब भी आदमी केले के छिलके पर पैर रखता है तो वह चिकना जेल जूते और जमीन के बीच की रगड़ को तुरंत कम कर देता है. आमतौर पर चलते समय रगड़ ही हमारे पैरों को जमीन पर पकड़ और संतुलन बनाए रखने में मदद करती है. लेकिन जब फ्रिक्शन अचानक से कम होता है तो पैर अचानक आगे की तरफ फिसल जाते हैं.

केले के छिलके बाकी फलों के छिलकों से अलग क्यों होते हैं? 

सभी फलों के छिलके एक जैसे नहीं होते. सेब और संतरे के छिलकों में भी नमी होती है. लेकिन उनमें केले के छिलकों में पाया जाने वाला पॉलीसैकराइड युक्त जेल नहीं होता. इस अंतर की वजह से उनमें रगड़ का स्तर थोड़ा ज्यादा होता है. सेब के छिलके का रगड़ गुणांक लगभग 0.1 होता है. 

शरीर के गुरुत्वाकर्षण केंद्र में बदलाव 

इंसानी शरीर तब तक संतुलित रहता है जब तक उसका गुरुत्वाकर्षण केंद्र आधार क्षेत्र के अंदर रहता है. इस मामले में यह क्षेत्र पैरों के नीचे का हिस्सा होता है. जब केले के छिलके की वजह से पैर आगे की ओर फिसल जाता है तो गुरुत्वाकर्षण केंद्र इस जमी हुई जगह से बाहर चला जाता है. एक बार ऐसा हो जाने पर शरीर इतनी तेजी से अपना संतुलन दोबारा नहीं हासिल कर पाता और व्यक्ति गिर जाता है.

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