पुरुषों में निपल्स क्यों होते हैं, इसका जवाब इंसानी विकास की शुरुआती अवस्था में छिपा है. दरअसल, गर्भ में नर और मादा भ्रूण की शुरुआती बनावट एक जैसी होती है. पहले कुछ हफ्तों तक दोनों का जेनेटिक ब्लूप्रिंट समान रहता है. इसी दौरान शरीर के कई हिस्से बनना शुरू हो जाते हैं, जिनमें निपल्स भी शामिल हैं. आइए जानें कि नेचर ने इसे क्यों नहीं हटाया.

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Y क्रोमोसोम और पुरुष शरीर का विकास

गर्भधारण के लगभग छह से सात हफ्ते बाद Y Chromosome सक्रिय होता है, जो भ्रूण को पुरुष दिशा में विकसित करना शुरू करता है. सबसे पहले टेस्टेस का विकास होता है. यही अंग आगे चलकर स्पर्म बनाता और स्टोर करता है. इसके साथ ही टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन बनना शुरू होता है, जो पुरुष शरीर की पहचान तय करता है. करीब नौवें हफ्ते से यह हॉर्मोन भ्रूण के जननांग और दिमाग के विकास में बदलाव लाता है. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि निपल्स का विकास Y Chromosome के सक्रिय होने से पहले ही हो चुका होता है, इसलिए वे पुरुष शरीर में बने रहते हैं.

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वेस्टिजियल अंग क्या होता है?

वैज्ञानिक भाषा में पुरुषों के निपल्स को वेस्टिजियल ऑर्गन कहा जाता है. इसका मतलब है ऐसा अंग, जिसका वर्तमान शरीर में कोई खास उपयोग नहीं है. Ian Tattersall के अनुसार, पुरुषों में निपल्स किसी जरूरी मेटाबॉलिक गतिविधि से जुड़े नहीं हैं. अगर ये न हों तो भी शरीर के कामकाज पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा.

क्या पुरुषों में निपल्स का कोई काम है?

पुरुषों में निपल्स से स्तनपान संभव नहीं होता है, क्योंकि उनके शरीर में वह हार्मोनल बदलाव नहीं होते जो महिलाओं में होते हैं. पुरुषों में स्तन ऊतक मौजूद तो होता है, लेकिन वह विकसित नहीं होता है. इसी कारण इसे शरीर का ऐसा हिस्सा माना जाता है जो बना तो रहता है, पर सक्रिय भूमिका नहीं निभाता है.

शरीर में ऐसे और भी अंग

निपल्स अकेला उदाहरण नहीं है. इंसान के शरीर में कई ऐसे अंग हैं जिनका आज के समय में सीमित या लगभग कोई उपयोग नहीं है. जैसे अपेंडिक्स, विस्डम टीथ और रीढ़ की हड्डी का आखिरी हिस्सा जिसे टेलबोन कहा जाता है. विकास की प्रक्रिया में ये अंग बने रहे, लेकिन समय के साथ इनकी अहमियत कम हो गई है.

आम लोगों के लिए जरूरी बात

पुरुषों में निपल्स होना किसी बीमारी या असामान्यता का संकेत नहीं है. यह पूरी तरह प्राकृतिक और सामान्य जैविक प्रक्रिया का हिस्सा है. यह इसलिए मौजूद हैं क्योंकि भ्रूण की शुरुआती बनावट समान होती है और बाद में लिंग के आधार पर बदलाव होते हैं.

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