Greeting Traditions: नमस्ते करने के तरीके ऊपर से देखने में भले ही आसान लगते हैं लेकिन उनमें अक्सर सदियों का इतिहास और कल्चरल मतलब होता है. जापान में लोग झुकते हैं जिसे ओजिगी कहा जाता है और यूरोप और ज्यादातर पश्चिमी देशों में लोग हाथ मिलाते हैं. दोनों इशारे शांति, सम्मान और अच्छी भावना दिखाने के लिए हैं फिर भी वे काफी अलग-अलग तरीकों से विकसित हुए हैं. 

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जापान में झुकना 

जापान में झुकना परंपरा और सामाजिक शिष्टाचार में गहराई से जुड़ा हुआ है. यह रिवाज पांचवी और आठवीं सदी के बीच आम हो चुका है. यह चीन से बौद्ध रीति रिवाजों के आने से प्रभावित था. समय के साथ झुकना जापानी बातचीत का एक अहम हिस्सा बन गया. झुकने के पीछे सबसे मजबूत मतलबों में से एक है कमजोरी और भरोसे का विचार. जब कोई व्यक्ति झुकता है तो वह अपना सिर्फ शरीर के सबसे सेंसिटिव और कमजोर हिस्सा दूसरे व्यक्ति की ओर झुकाता है. यह शांतिपूर्ण इरादों और दुश्मनी की कमी का संकेत देता था. 

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जापान के फ्यूडल युग में खासकर समुराई सिस्टम के तहत झुकना हायरार्की की एक सटीक भाषा बन गई थी. झुकाने की गहराई और समय से सम्मान का लेवल पता चलता था. कैजुअल ग्रीटिंग के लिए हल्का सा सिर हिलाना इस्तेमाल किया जा सकता था और गहरा झुकना गहरा सम्मान या फिर माफी दिखता था. इसी के साथ जापानी कल्चर में पर्सनल स्पेस को काफी महत्व दिया जाता है और फिजिकली टच को अक्सर प्राइवेट माना जाता है. झुकने से लोग बिना फिजिकल कॉन्टैक्ट के सम्मान और तहजीब दिखा सकते हैं.

यूरोप में हाथ मिलाना 

यूरोप में हाथ मिलाने की शुरुआत प्रैक्टिकल और सिक्योरिटी से जुड़ी एक अलग वजह से हुई है. इसका इतिहास काफी पुराने समय से है और यह मिडल एज के दौरान खासतौर पर जरूरी बन गया था. उस समय पुरुष आमतौर पर तलवार या फिर खंजर रखते थे. किसी दूसरे व्यक्ति की ओर दाहिना हाथ बढ़ाना इस बात का साफ इशारा था कि कोई हथियार नहीं पकड़ा जा रहा है. यह शांतिपूर्ण इरादे और खुलेपन को दिखाता था. 

हाथ मिलाने का भी एक मकसद था. हाथ ऊपर नीचे करने से यह पक्का हो जाता था कि दूसरा इंसान अपनी आस्तीन में कोई हथियार तो नहीं छुपा रहा है. जो एक सेफ्टी चेक के तौर पर शुरू हुआ था वह धीरे-धीरे अच्छी नियत की रस्म में बदल गया.  झुकने के उलट जो अक्सर हायरार्की दिखाता है हाथ मिलाना बराबरी का प्रतीक बन गया. दो लोग अपने सामने खड़े होते हैं और एक ही लेवल पर मिलते हैं.

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