Cat Worship: प्राचीन मिस्र में बिल्लियों को आम जानवर नहीं माना जाता था. बिल्लियों को पूजा जाता था. उन्हें पवित्र रक्षक, दैवीय ऊर्जा के प्रतीक और शक्तिशाली देवी देवताओं की धरती पर मौजूद प्रतिनिधि माना जाता था. मिस्र का समाज बिल्लियों के साथ असाधारण सम्मान का व्यवहार करता था. साथ ही समय के साथ वे धर्म, संस्कृति, रोजमर्रा की जिंदगी और यहां तक की मृत्यु के बाद के जीवन से जुड़ी मान्यताओं में भी गहराई से रच बस गईं.

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बिल्लियां देवी बास्टेट से जुड़ी 

प्राचीन मिस्र में बिल्लियों की पूजा के पीछे सबसे बड़ी वजह उनका देवी बास्टेट के साथ जुड़ाव था. बास्टेट मिस्र की पौराणिक कथाओं में सबसे प्रिय देवी देवताओं में से एक थीं. बास्टेट को आमतौर पर एक ऐसी महिला के रूप में दर्शाया जाता था जिसका सिर बिल्ली जैसा होता था या फिर कभी-कभी उन्हें पूरी तरह से बिल्ली के रूप में ही दिखाया जाता था. उनकी पूजा घर, मातृत्व, संतान जन्म, संगीत, आनंद और सुरक्षा की देवी के रूप में की जाती थी. मिस्र के लोगों का यह मानना था कि घर के अंदर बिल्लियों को रखने से देवी बास्टेट का आशीर्वाद और सुरक्षा मिलती है. 

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बिल्लियों ने मिस्र के अनाज और खाद्य भंडारों की रक्षा की 

प्राचीन मिस्र की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि पर निर्भर थी. खास तौर से नील नदी के किनारे होने वाली अनाज की खेती पर. गेहूं और दूसरी फसलों को जमा करने वाले बड़े-बड़े गोदाम को लगातार चूहों और कुतरने वाले दूसरे जीवों से खतरा बना रहता था.  बिल्लियां स्वाभाविक रूप से इन कीटों का शिकार करती थीं. इससे अनाज के भंडारों को नुकसान और दूषित होने से बचाने में मदद मिलती थी.

इसी के साथ प्राचीन मिस्र के रेगिस्तान और बस्तियां कोबरा और बिच्छू जैसे खतरनाक और जहरीले जीवों का घर थी. बिल्लियां अपनी निडर शिकार करने की क्षमता और सांपों के साथ-साथ दूसरे हानिकारक जीवों पर हमला करने की ताकत की वजह से काफी पसंद की जाती थी. मिस्र के लोग इस बहादुरी को रहस्यमयी मानते थे. उन्हें लगता था कि बिल्लियों के पास जादुई शक्तियां हैं.

बिल्लियों को मारना एक गंभीर अपराध 

प्राचीन मिस्र के समाज में बिल्लियों को काफी ज्यादा मजबूत कानूनी और सामाजिक सुरक्षा दी गई थी. ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक किसी बिल्ली को नुकसान पहुंचाना या फिर उसे मार डालना एक गंभीर अपराध माना जाता था. इसके लिए कठोर दंड दिया जाता था और कुछ मामलों में तो इसके लिए मृत्युदंड तक दिया जाता था. 

इसी के साथ जब पालतू बिल्ली मर जाती थी तो उनमें से कई को इंसानों की ही तरह ममी बनाया जाता था. अमीर परिवार अक्सर बिल्लियों को गहनों, सजावटी सामान और चढ़ावों के साथ दफनाते थे. उनका मानना था कि वे  मृत्यु के बाद के जीवन में अपने मालिकों के साथ जा सकती हैं.

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