Cricket bat: आप भी अक्सर आईपीएल या फिर दूसरे इंटरनेशनल क्रिकेट मैच देखते होंगे. अपने पसंदीदा बल्लेबाज को बल्ले से शॉट मारते देखना हर फैन के लिए एक अलग एक्सपीरियंस होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका पसंदीदा बल्लेबाज जिस बल्ले से बैटिंग करता है वह बैट कैसे बनता है. क्रिकेट बैट देखने में भले ही लकड़ी का एक साधारण बैट लगता हो, लेकिन इसके पीछे गजब की इंजीनियरिंग और फिजिक्स छिपी होती है. अगर आप गौर करें तो विराट कोहली, रोहित शर्मा या वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों के बैट दो हिस्सों से मिलकर बने होते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि वैभव सूर्यवंशी का बैट हो या कोहली का एक ही लकड़ी से पूरा बैट क्यों नहीं बनाया जाता है. 

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150 किमी प्रति घंटे की गेंद से जुड़ा है जवाब 

खिलाड़ियों का बैट एक ही लकड़ी के दो हिस्सों से बना होता है. नीचे का ब्लेड एक लकड़ी का होता है, जबकि ऊपर का हैंडल दूसरी लकड़ी से बनाकर जोड़ा जाता है. इस थ्योरी के पीछे 150 किलोमीटर प्रति घंटे की गेंद का चुनाव माना जाता है. क्रिकेट में गेंद की रफ्तार 140 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. जब इतनी तेज गेंद बैट से टकराती है, तो बहुत ज्यादा ऊर्जा और वाइब्रेशन पैदा होता है. अगर पूरा बैट लकड़ी से बना हो तो यह सारा झटका सीधे बल्लेबाज के हाथों पर पहुंचता है, जिससे हाथ, कलाई और बाजू में चोट लग सकती है. 

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क्यों अलग लकड़ी से बनता है हैंडल? 

बैट का ब्लेड आमतौर पर इंग्लिश विलो या कश्मीरी विलो लकड़ी से बनाया जाता है, क्योंकि यह गेंद के प्रभाव को बेहतर तरीके से झेल सकता है. वहीं हैंडल के लिए केन नाम की खास लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है. यह लकड़ी काफी लचीली होती है और स्प्रिंग की तरह काम करती है. जब गेंद बैट से टकराती है, तो हैंडल का केन हिस्सा झटकों को काफी हद तक सोख लेता है. इस वजह से बल्लेबाज को कम वाइब्रेशन महसूस होता है और चोट लगने का खतरा भी घट जाता है. 

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वी शेप जॉइंट की थ्योरी करती है काम 

बैट बनाने के दौरान ब्लेड के ऊपरी हिस्से में वी आकार की कटिंग की जाती है, जिससे स्प्लाइस कहा जाता है. इसी हिस्से में हैंडल फिट किया जाता है. यह डिजाइन सिर्फ जोड़ने के लिए नहीं होती, बल्कि इसके पीछे भी साइंस छिपा है. गेंद बल्ले पर लगने पर जो दबाव पैदा होता है, वी शेप जॉइंट उसे पूरे बैट में समान रूप से बांट देता है. इससे किसी एक हिस्से पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और बैट जल्दी टूटने से बच जाता है. वहीं इसके उलट अगर पूरे बैट का एक ही लकड़ी से बनाया जाए तो उसका वजन और बैलेंस बिगड़ सकता है. अलग हैंडल लगाने से बैट का वजन सही जगह पर केंद्रित रहता है. यही कारण है कि बल्लेबाज आसानी से बैट स्विंग कर पाते हैं और बड़े शॉट लगा पाते हैं. 

आईसीसी के नियम भी है वजह 

क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के अनुसार बैट का ब्लेड पूरी तरह लकड़ी का होना चाहिए और उसका हैंडल मुख्य रूप से केन तथा लकड़ी से बना होना चाहिए. यही वजह है कि एल्युमिनियम, स्टील या दूसरी धातु के बैट इंटरनेशनल क्रिकेट में इस्तेमाल नहीं किया जा सकते हैं. 

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