Mount Everest: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट दुनिया भर के पर्वतारोहियों के लिए सपनों की जगह है. हालांकि यह शानदार पहाड़ एक दुखद सच्चाई के लिए भी जाना जाता है. इसकी ढलानों पर 200 से भी ज्यादा शव बिखरे पड़े हैं. चोटी पर चढ़ने की कोशिश में जान गंवाने वाले कई पर्वतारोहियों के शव कभी वापस नहीं लाए जाते. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

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डेथ जोन की जानलेवा सच्चाई 

माउंट एवरेस्ट पर 8000 मीटर से भी ऊपर के इलाके को डेथ जोन कहा जाता है. इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर समुद्र तल पर मिलने वाली ऑक्सीजन का लगभग एक तिहाई रह जाता है. तापमान अक्सर -30 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है. इसी के साथ तेज हवाएं और बर्फीले तूफान काफी खतरनाक हालात पैदा कर देते हैं. पर्वतारोहियों को ऊंचाई से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. जैसे हाई एल्टीट्यूड सेरेब्रल एडिमा और हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा. 

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जमे हुए शवों को हटाना काफी मुश्किल 

शव को वापस लाने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है कड़ाके की ठंड. एवरेस्ट के जीरो से नीचे के तापमान में इंसानी शब पूरी तरह से जम जाते हैं. बर्फ और भारी कपड़ों में लिपटे होने की वजह से उनका वजन अक्सर 100 से 150 किलोग्राम के बीच हो जाता है. इतनी ऊंचाई पर इतना वजन ले जाने के लिए काफी ज्यादा शारीरिक मेहनत की जरूरत होती है. 

संकरे रास्ते बचाव कार्यों को असंभव बना देते हैं 

एवरेस्ट पर चढ़ाई के रास्ते के कई हिस्से काफी ज्यादा संकरे हैं. इसी के साथ कुछ रास्ते तो बस कुछ फीट चौड़े हैं. इन खतरनाक रास्तों पर हिलने-डुलने की काफी कम जगह होती है. इससे स्ट्रेचर का इस्तेमाल करना असंभव हो जाता है. खड़ी बर्फीली जमीन पर जमे हुए शव को घसीटकर ले जाने से बचाव दल के लिए खतरा काफी बढ़ जाता है. 

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हेलीकॉप्टर नहीं कर सकते काम 

पहाड़ों पर बचाव के कई मिशनों के उलट एवरेस्ट पर हेलीकॉप्टर की क्षमता सीमित हो जाती है. काफी ज्यादा ऊंचाई पर हवा पतली होने की वजह से हेलीकॉप्टर के ब्लेड सुरक्षित उड़ान के लिए जरूरी लिफ्ट पैदा नहीं कर पाते. यही वजह है कि कुछ ऊंचाई से ऊपर शवों को वापस लाने का मिशन पूरी तरह से काफी अच्छी तरह से प्रशिक्षित शेरपा पर्वतारोहियों की टीम पर निर्भर करता है. 

शब को लाने का खर्चा 

डेथ जोन से शव को वापस लाना काफी महंगा होता है. एक बार शब लाने के ऑपरेशन में 60 लाख रुपये से 90 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है. कई परिवारों के लिए इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करना मुमकिन नहीं होता.

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