ITC Owner Religion: आईटीसी लिमिटेड को अक्सर भारत की सबसे बड़ी सिगरेट बनाने वाली कंपनी के रूप में पहचाना जाता है. आपको बता दें कि इस कंपनी का कोई एक मालिक, प्रमोटर परिवार या फिर कंट्रोल करने वाला व्यक्ति नहीं है. यह कंपनी भारत की सबसे ज्यादा शेयर होल्डिंग वाली और प्रोफेशनली मैनेज्ड कंपनियों में से एक है. 

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आईटीसी का कोई प्रमोटर या अकेला मालिक नहीं है 

आईटीसी लिमिटेड 0% प्रमोटर शेयर होल्डिंग के साथ काम करती है. इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति, परिवार या संस्थापक समूह इसके कंट्रोल में हिस्सेदारी नहीं है. कंपनी का मालिकाना  हक संस्थागत निवेशकों, सरकार से जुड़ी संस्थाओं, विदेशी शेयरधारकों और आम जनता के पास ही है.

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कौन है आईटीसी के प्रमुख शेयरधारक 

ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको यूके की तंबाकू मल्टीनेशनल कंपनी है. यह कंपनी आईटीसी में लगभग 22.9% से 23.1% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक है. लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन ऑफ इंडिया जो की एक सरकारी संस्था है इस कंपनी में 15.5% की हिस्सेदारी रखती है. यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया का स्पेसिफाइड अंडरटेकिंग इस कंपनी में 7.8% की हिस्सेदारी रखता है. आपको बता दें कि बाकी शेयर म्युचुअल फंड, विदेशी संस्थागत निवेशकों और रिटेल शेयरधारकों के बीच बंटे हुए हैं.

कौन चलाता है आईटीसी कंपनी 

इस कंपनी की रोजाना की लीडरशिप संजीव पुरी के पास है. ये इस कंपनी के अध्यक्ष और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं.  संजीव पुरी 1986 में आईटीसी में शामिल हुए और लगभग 4 दशकों में रैंक में ऊपर चढ़ते गए. वह 2019 में अध्यक्ष बने और उन्होंने आईटीसी को सिगरेट से आगे एफएमसीजी, कृषि और डिजिटल व्यवसाय में डायवर्सिफाई किया. आपको बता दें कि संजीव पुरी एक हिंदू पंजाबी फैमिली से आते हैं. 

सिगरेट से एफएमसीजी पावर हाउस तक 

वैसे तो सिगरेट अभी भी आईटीसी के मुनाफे में एक बड़ा योगदान देती है लेकिन आज कंपनी सिर्फ एक तंबाकू निर्माता से काफी ज्यादा है. इसके एफएमसीजी पोर्टफोलियो में आशीर्वाद, सनफीस्ट, बिंगो, यिप्पी, सैवलॉन, फियामा और क्लासमेट जैसे घरेलू ब्रांड शामिल हैं. यह प्रोडक्ट्स रोजाना लाखों भारतीय घरों में पहुंचते हैं. 2026 की शुरुआत में आईटीसी लिमिटेड का मार्केट कैपिटलाइजेशन 4.22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा था. हालांकि फरवरी 2026 में सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद कंपनी को शॉर्ट टर्म मार्केट दबाव का सामना करना पड़ा. एक बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव में आईटीसी का होटल बिजनेस 1 जनवरी 2025 से डीमर्ज हो गया. जिससे आईटीसी होटल्स लिमिटेड नाम की अलग लिस्टेड कंपनी बनी.

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