Mughal Emperor: मुगल इतिहास में हमने बहुत से बादशाहों के नाम सुने, जो आए, शासन किया और अपनी उम्र पूरी कर इस दुनिया से चले गए. हालांकि, एक शासक ऐसा भी था जिसकी मौत बिल्कुल भी सामान्य रूप से नहीं हुई थी, बल्कि उसकी हत्या की गई थी. यह बादशाह थे आलमगीर द्वितीय. उनका असली नाम अजीज़ुद्दीन था और वह 1754 में मुगल गद्दी पर बैठे थे.

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उस समय तक मुगल साम्राज्य काफी कमजोर हो चुका था और बादशाह के पास सिर्फ नाम के लिए ही शक्ति बची थी. आलमगीर द्वितीय भी उन्हीं बादशाहों में से एक थे, जो परिस्थितियों के कारण गद्दी तक तो पहुंच गए, लेकिन पूर्ण रूप से शासन नहीं कर पाए. उनका नियंत्रण काफी सीमित था.

कैसे बना था बादशाह?

आलमगीर द्वितीय के गद्दी पर बैठने में सबसे अहम भूमिका उनके वजीर गाजीउद्दीन इमाद-उल-मुल्क की रही. उस समय दिल्ली की राजनीति पूरी तरह साजिशों से भरी हुई थी. वजीर इमाद-उल-मुल्क ने अपने फायदे के लिए उन्हें गद्दी पर बैठाया, जिससे सत्ता उसके ही हाथ में रहे. आलमगीर द्वितीय एक कमजोर शासक साबित हुए और हर फैसले के लिए वजीर पर निर्भर रहते थे. उसी समय मराठों और अन्य शक्तियों का प्रभाव भी तेजी से बढ़ता जा रहा था, जिससे मुगल साम्राज्य की स्थिति और भी खराब होती चली गई.

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कब और कैसे हुआ अंत?

आलमगीर द्वितीय का शासन लगभग 5 साल तक चला, यानी 1754 से 1759 तक. यह समय बिल्कुल भी शांतिपूर्ण नहीं था, बल्कि साजिशों और संघर्षों से भरा हुआ था. आखिरकार 1759 में उनका अंत हो गया. उनकी हत्या एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी. माना जाता है कि इसमें उनके वजीर गाजीउद्दीन इमाद-उल-मुल्क का हाथ था. एक दिन उन्हें किसी काम के बहाने से बाहर बुलाया गया और वहीं उनकी हत्या कर दी गई. यह घटना काफी चौंकाने वाली थी. इस तरह अचानक साजिश के तहत एक मुगल बादशाह का अंत हुआ.

इतिहास में क्यों है यह घटना खास

यह घटना मुगल इतिहास के पतन की सबसे बड़ी निशानियों में से एक मानी जाती है. यह दिखाती है कि उस समय बादशाह की ताकत कितनी कम हो चुकी थी और असली नियंत्रण अन्य लोगों के हाथ में चला गया था. इसके बाद मुगल साम्राज्य और भी कमजोर हो गया और आगे चलकर पूरी तरह समाप्त हो गया. आलमगीर के अलावा अन्य जितने भी मुगल बादशाह हुए उन्होंने या तो अपनी उम्र पूरी की या फिर किसी बीमारी या हादसे से उनकी मौत हो गई. सिर्फ आलमगीर ऐसा बादशाह रहा, जिसकी हत्या की गई थी. 

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