India Most Successful PM: भारत के सबसे सफल प्रधानमंत्री कौन रहे हैं? इसका जवाब कई वजहों के कारण अलग-अलग हो सकता है. इन वजहों में राजनीतिक विचार और ऐतिहासिक नजरिया शामिल है. लेकिन इंडिया टुडे मूड ऑफ द नेशन के हालिया सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का सबसे सफल प्रधानमंत्री माना गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 50.7% वोट मिले हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 10.3% वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं और अटल बिहारी वाजपेई ने तीसरा स्थान प्राप्त किया. बीते कुछ दशकों में कई प्रधानमंत्रियों ने कुछ ऐसे बड़े फैसले लिए जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि, बुनियादी ढांचा, शिक्षा और सैन्य ताकत के साथ-साथ वैश्विक स्थिति को बदल दिया है. आइए जानते हैं उन सभी प्रधानमंत्रियों के बारे में.

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नरेंद्र मोदी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में डिजिटल बदलाव, कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर खास जोर दिया गया. डिजिटल इंडिया पहला और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के विस्तार ने पूरे देश में वित्तीय लेन-देन के तरीकों को एक बड़े पैमाने पर बदल दिया. आज भारत डिजिटल पेमेंट के मामले में दुनिया में सबसे आगे है और यहां रोजाना एक बड़ी मात्रा में लेन-देन होता है.

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इसी के साथ जन-धन आधार मोबाइल फ्रेमवर्क ने नागरिकों को सीधी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा. जन-धन योजना के तहत 58 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए. इस योजना के जरिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए लीकेज और भ्रष्टाचार को कम करने में मदद मिली. 

इतना ही नहीं बल्कि भारत के हाईवे नेटवर्क का भी काफी विस्तार किया गया. यह लगभग 91000 किलोमीटर से बढ़कर 1,50,000 किलोमीटर से ज्यादा हो गया है. सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है और साथ ही देश की आर्थिक नींव को भी मजबूत किया जा रहा है.

पी वी नरसिम्हा राव 

पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव को भारत को उसके सबसे बड़े आर्थिक बदलाव में से एक से गुजारने का क्रेडिट दिया जाता है. 1991 में भुगतान संतुलन के गंभीर संकट का सामना करते हुए नरसिम्हा राव सरकार ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण से जुड़े सुधार शुरू किए. उपाय ने लाइसेंस राज को खत्म किया और भारतीय अर्थव्यवस्था को कंपटीशन और निजी व्यवस्थाओं के लिए खोल दिया. 

इन सुधारों से विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला, औद्योगिक विकास में भी बढ़ोतरी हुई और भारत को दशकों से चली आ रही धीमी आर्थिक वृद्धि से आगे बढ़ने में मदद मिली. 

लाल बहादुर शास्त्री 

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भारत की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में बड़ी भूमिका निभाई. 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान जय किसान का नारा दिया. इस नारे में देश के सैनिकों और किसानों, दोनों के महत्व पर जोर दिया गया था. 

लाल बहादुर शास्त्री की नीतियों ने हरित क्रांति की नींव रखी. इस क्रांति के बाद अनाज के उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई. इसी के साथ डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार की कोशिशों ने श्वेत क्रांति में योगदान दिया. इससे भारत दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में से एक बन गया.

इंदिरा गांधी 

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आजाद भारत के इतिहास के कुछ सबसे बड़े फैसलों को अंजाम दिया. 1969 में इंदिरा गांधी सरकार ने 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया. इस फैसले से बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ी. इसका फायदा ग्रामीण समुदाय, किसान और छोटे व्यवसायों को मिला.

पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में भारत की जीत से बांग्लादेश बना. इस जंग ने भारत को एक बड़ी क्षेत्रीय सैन्य शक्ति के तौर पर स्थापित किया और दक्षिण एशिया के भू राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया. 

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अटल बिहारी वाजपेई 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को भारत की रणनीतिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए पहचाना जाता है. 1998 में देश ने पोखरण में कई परमाणु परीक्षण किए और इंटरनेशनल प्रेशर व प्रतिबंध के बावजूद भी आधिकारिक तौर पर खुद को परमाणु हथियार संपन्न देश घोषित किया.

इतना ही नहीं बल्कि स्वर्णिम चतुर्भुज हाईवे परियोजना भी शुरू की गई. इसने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को एक आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ा. साथ ही वाजपेई सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान भी शुरू किया. 

जवाहरलाल नेहरू 

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संस्थाओं के निर्माण और औद्योगिक विकास पर ध्यान दिया. उनकी लीडरशिप में IIT, IIM और AIIMS जैसे संस्थान स्थापित किए गए. इन्होंने भारत की शैक्षिक और तकनीकी प्रगति में एक बड़ी भूमिका निभाई और आज तक निभाते आ रहे हैं. इसी के साथ उन्होंने बड़े सार्वजनिक क्षेत्रों के उद्यमों और प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बढ़ावा दिया. इनमें भाखड़ा नांगल परियोजना जैसे बांध भी शामिल थे.

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