Paper Invention: कागज मानवता के सबसे जरूरी आविष्कारों में से एक है. इसने ज्ञान, इतिहास, साहित्य और संचार को संरक्षित करने के तरीके को बदल दिया. वैसे तो आज कागज रोजमर्रा की जरूरत है लेकिन इसकी उत्पत्ति लगभग 2000 साल पहले हुई थी. आधुनिक कागज के आविष्कार का क्रेडिट चीन को दिया जाता है. त्साई लुन नामक एक अदालत के अधिकारी ने एक कागज बनाने की प्रक्रिया विकसित की जिसने मानव सभ्यता की दिशा बदल दी. ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक त्साई लुन ने पूर्वी हान राजवंश के शासनकाल के दौरान 105 ईस्वी में कागज के पहले वास्तविक रूप का आविष्कार किया था. 

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कौन थे त्साई लुन?

त्साई लुन एक चीनी सरकारी अधिकारी थे जो पूर्वी हान राजवंश के शाही दरबार में काम करते थे. उनके आविष्कार से पहले लोग बांस की पट्टियों, रेशमी कपड़े, लकड़ी की पट्टी और जानवरों की खाल जैसी चीजों पर लिखते थे. यह सब चीज या तो महंगी होती थी या फिर भारी थी. लुन ने एक बेहतर समाधान की तलाश की और एक ऐसी विधि तैयार की जिसमें लिखने के लिए उपयुक्त पतली चादरें बनाने के लिए रीसायकल और नेचुरल फाइबर का इस्तेमाल किया गया. 

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पहला पेपर किससे बना था?

सबसे पहला कागज आज की तरह लकड़ी की लुगदी से नहीं बनाया जाता था. इसके बजाय लुन ने प्राकृतिक और रीसाइकिल्ड चीजों के मिश्रण का इस्तेमाल किया जो आसानी से मौजूद थे. प्राथमिक कच्चे माल में शहतूत के पेड़ की छाल, भांग के रेशे, पुराने सूती कपड़े और फटे पुराने चिथड़े, फेंके गए मछली पकड़ने के जाल और बांस के रेशों का इस्तेमाल किया गया. 

प्राचीन काल में कागज कैसे बनाया जाता था? 

पहले चरण में छाल, कपड़ा, भांग और पुराने मछली पकड़ने के जाल को पानी के साथ मिलाया जाता था. इन सामग्री को तब तक कुचला, पीटा और उबाला गया जब तक कि वे नरम रेशेदार गूदे में ना बदल जाएं.

इसके बाद तैयार गूदे को एक महीन जालीदार स्क्रीन या फिर सांचे में बराबर फैलाया गया. इससे रेशों की एक पतली परत बनी. ज्यादा पानी को निचोड़ने के लिए स्क्रीन को सावधानी से दबाया गया. इससे आपस में गुंथे हुए रेशों की एक पतली चादर निकल गई. आखरी शीट को पूरी तरह सूखने के लिए धूप में रखा गया. एक बार सूखने के बाद यह लिखने और रिकॉर्ड करने के लिए तैयार कागज की एक शीट बन गई.

चीन ने सदियों तक रहस्य बनाए रखा 

कागज के इतिहास के सबसे आकर्षक पहलुओं में से एक यह है कि चीन ने कागज बनाने की तकनीक को रहस्य के रूप में छिपा कर रखा था. लगभग 700 सालों तक यह प्रक्रिया चीन के बाहर काफी हद तक अनजान ही थी. इससे चीनी सभ्यता को प्रशासन, शिक्षा, साहित्य और रिकॉर्ड रखने में बड़ा फायदा मिला.

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