कौन हैं नोबेल प्राइज पाने वाले पांचवें मैरिड कपल, जानें उनके अलावा कितने जोड़ों को मिल चुका यह पुरस्कार
Nobel Winning Couples: दुनिया में कुछ ही ऐसे कपल्स हैं जिन्हें नोबेल प्राइज मिल चुका है. आइए जानते हैं उन कपल्स के बारे में और साथ ही यह भी कि उन्हें किस चीज में नोबेल पुरस्कार मिला.

Nobel Winning Couples: नोबेल प्राइज दुनिया के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है. यह साइंस, लिटरेचर, शांति और इकोनॉमिक्स में जबरदस्त योगदान के लिए दिया जाता है. वैसे तो कई लोगों को यह अवार्ड मिल चुका है लेकिन कुछ ही शादीशुदा जोड़ों को यह खास पहचान मिली है. आइए जानते हैं कि कौन हैं नोबेल प्राइज पाने वाले पांचवें मैरिड कपल और उनके अलावा कितने जोड़ों को यह पुरस्कार मिल चुका है.
अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो
नोबेल पुरस्कार पाने वाले पांचवें कपल अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो हैं. इन्हें यह पुरस्कार 2019 में मिला था. इन्हें गरीबी कम करने के लिए इनके एक्सपेरिमेंट तरीके के लिए सम्मानित किया गया. इनकी रिसर्च ने बड़ी डेवलपमेंट चुनौतियों को छोटी और टेस्ट की जा सकने वाली समस्याओं में तोड़ दिया. जैसे स्कूल में अटेंडेंस या फिर हेल्थ केयर एक्सेस में सुधार.
जमीनी लेवल पर रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल्स का इस्तेमाल करके उन्होंने पॉलिसी बनाने वालों के गरीबी से निपटने के तरीकों को बदल दिया. उनकी असरदार किताब पुअर इकोनॉमिक्स इस बात को समझाती है कि गरीब लोग इकोनामिक फैसला कैसे लेते हैं. इतना ही नहीं वे इकोनॉमिक्स में नोबेल प्राइज जीतने वाले पहले शादीशुदा कपल भी हैं.
मैरी क्यूरी और पियरे क्यूरी
मैरी क्यूरी और पियरे क्यूरी नोबेल प्राइज जीतने वाले पहले शादीशुदा कपल थे. उन्हें रेडियोएक्टिविटी पर अपनी पायनियरिंग रिसर्च के लिए 1903 में फिजिक्स में नोबेल प्राइज मिला था. उनकी खोजों में पोलोनियम और रेडियम एलिमेंट शामिल थे. मैरी क्यूरी ने बाद में 1911 में केमिस्ट्री में दूसरा नोबेल प्राइज जीतकर फिर से इतिहास रच दिया. वे दो अलग-अलग साइंटिफिक फील्ड में नोबेल प्राइज पानी वाली एकमात्र व्यक्ति बन गई. उनके काम ने कैंसर के इलाज में रेडियोथेरेपी की नींव रखी.
इरेन जोलियट-क्यूरी और फ्रेडरिक जोलियट
मैरी और पियरे क्यूरी की सबसे बड़ी बेटी इरेन जोलियट-क्यूरी और उनके पति फ्रेडरिक जोलियट कोल्ड 1935 में केमिस्ट्री का नोबेल प्राइज दिया गया था. उन्होंने आर्टिफिशियल रेडियोएक्टिविटी की खोज की. इससे यह साबित हुआ कि स्टेबल एलिमेंट्स पर अल्फा पार्टिकल्स की बमबारी करके उन्हें रेडियोएक्टिव बनाया जा सकता है. उनके काम ने डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होने वाली रेडियोएक्टिव आइसोटोप्स के सस्ते प्रोडक्शन को मुमकिन किया और मेडिसिन में क्रांति ला दी.
गर्टी कोरी और कार्ल कोरी
गर्टी कोरी और कार्ल कोरी इन 1947 में फिजियोलॉजी/ मेडिसिन में नोबेल प्राइज जीता था. उन्होंने कोरी साइकिल की खोज की. इससे यह पता चलता है कि शरीर में जमा ग्लाइकोजन कैसे टूटता है और ग्लूकोज में बदलता है. उनकी रिसर्च में डायबिटीज जैसी मेटाबोलिक बीमारियों की समझ को काफी बढ़ाया. इसी के साथ गर्टी कोरी मेडिसिन में नोबेल प्राइज जीतने वाली पहली महिला भी बनीं.
मे ब्रिट मोजर और एडवर्ड मोजर
मे ब्रिट मोजर और एडवर्ड मोजर को 2014 में फिजियोलॉजी का नोबेल प्राइज दिया गया. उन्होंने दिमाग में ग्रिड सेल्स खोजें. इन ग्रिड सेल्स को दिमाग का इनर जीपीएस भी कहा जाता है. ये सेल्स इंसानों को जगहों को नेविगेट करने और पोजिशनिंग को समझने में मदद करते हैं. उनकी इस खोज की मदद से अल्जाइमर बीमारी जैसी न्यूरोलॉजिकल कंडीशन की स्टडी में काफी मदद मिली.
अल्वा मिर्डल और गुन्नार मिर्डल
अल्वा मिर्डल और गुन्नार मिर्डल अकेले ऐसे शादीशुदा कपल है जिन्हें अलग-अलग सालों और कैटेगरी में नोबेल प्राइज मिला है. गुन्नार मिर्डल इन 1974 में इकोनॉमिक और सोशल इंटरडिपेंडेंस के अपने एनालिसिस के लिए इकोनामिक साइंसेज में नोबेल प्राइज जीता था. इसी के साथ अल्वा मिर्डल को न्यूक्लियर डिसआर्मामेंट और इंटरनेशनल पीस एफर्ट्स में उनके काम के लिए 1982 में नोबेल पीस प्राइज मिला था.
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Source: IOCL


























