Unemployment Rate: रोजगार के ताजा आंकड़ों से यह पता चलता है कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में युवाओं में बेरोजगारी एक बड़ी चिंता बनती जा रही है. केरल, लक्षद्वीप और हरियाणा जैसे क्षेत्रों में यह दर काफी ज्यादा है. केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के मुताबिक देश के कई हिस्सों में 15 से 29 साल के लोगों के बीच बेरोजगारी काफी ज्यादा है. 

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लक्षद्वीप और केरल सबसे ज्यादा युवा बेरोजगारी वाले क्षेत्रों में शामिल

रिपोर्ट्स के मुताबिक कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में युवाओं के बीच काफी ज्यादा बेरोजगारी है. लक्षद्वीप में युवा बेरोजगारी दर लगभग 36.2 प्रतिशत दर्ज की गई. इससे यह 15 से 29 आयु वर्ग के लिए सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाले क्षेत्रों में शामिल हो गया. 

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केरल में भी युवा बेरोजगारी दर ज्यादा रही. समय और मापने के तरीके के आधार पर यह आंकड़े लगभग 29% से 36.2 प्रतिशत के बीच रहे. ज्यादा युवा बेरोजगारी वाले दूसरे क्षेत्र में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (33.6%), जम्मू और कश्मीर (28.4%), नागालैंड (27.4%) और छत्तीसगढ़ (26.3%) शामिल हैं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि बेहतर शैक्षणिक योग्यता और नौकरी चाहने वालों की बढ़ती संख्या के बावजूद कई युवाओं को सही नौकरी पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. 

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़े 

जिस तरफ पीएलएफएस सरकारी रोजगार के आधिकारिक आंकड़े देते हैं वहीं सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं. आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में बेरोजगारी दर 37.4% दर्ज की गई. इससे यह देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाले राज्यों में शामिल हो गया. 

अलग-अलग डेटासेट के बीच का अंतर जरूरी है क्योंकि बेरोजगारी के आंकड़े मापने के तरीके, संदर्भ अवधि और आबादी के समूह के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं. इस वजह से राज्य की रैंकिंग को हमेशा इस्तेमाल किया जा रहे खास डाटा सेट के संदर्भ में ही समझ जाना चाहिए.

शहरी युवाओं को ज्यादा बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है 

यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है. राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के बीच बेरोजगारी में शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच भी साफ अंतर दिखता है. आंकड़ों के मुताबिक शहरी युवाओं में बेरोजगारी दर लगभग 18.2% है. इसी के साथ ग्रामीण युवाओं में यह 15.1% है. एक वजह यह है कि शहरों में युवा अक्सर मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, टेक्नोलॉजी और फाइनेंस जैसे सेक्टर में फॉर्मल नौकरियों की तलाश करते हैं. 

युवा महिलाओं के सामने रोजगार की बड़ी चुनौती 

युवाओं में बेरोजगारी को लेकर जेंडर गैप काफी ज्यादा है. युवा पुरुषों में बेरोजगारी की दर लगभग 14.6% है और युवा महिलाओं में यह दर लगभग 20.7% है. इस अंतर के पीछे कई वजह हैं. जैसे रोजगार के कम मौके, कुछ इलाकों में आने जाने पर पाबंदी, घर परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी और सही वर्कप्लेस की सीमित उपलब्धता. 

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युवाओं में बेरोजगारी क्यों बढ़ रही है?

इसकी मुख्य वजह शिक्षा और उपलब्ध नौकरी के बीच स्किल का मेल ना होना है. बहुत से युवा स्कूल या फिर यूनिवर्सिटी की डिग्री तो पूरी कर लेते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि वह आधुनिक उद्योग के लिए जरूरी टेक्निकल, डिजिटल या वोकेशनल स्किल भी हासिल कर लें. यही वजह है कि कंपनियों को सही स्किल वाले उम्मीदवार खोजने में मुश्किल हो सकती है. इसी के साथ बड़ी संख्या में युवा काम की तलाश में होते हैं.

खेती में घटते मौके और बढ़ता दबाव 

एक और कारण भारत के कृषि सेक्टर का बदलता स्वरूप है. पारंपरिक खेती से अक्सर सीमित और अनिश्चित इनकम होती है. खासकर उन युवा कामगारों के लिए जो बेहतर कमाई वाले करियर की तलाश में हैं. यही वजह है कि कई युवा खेती से दूर होकर मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और दूसरे सेक्टर की तरफ रुख कर रहे हैं. हालांकि अगर खेती के अलावा दूसरे क्षेत्र में पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं होती तो खेती छोड़ने वाले कामगारों को वैकल्पिक रोजगार खोजने में मुश्किल हो सकती है.

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