India China Oil Trade: ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा व्यापार में तेजी से बदलाव आने लगा है. भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात पहले से ही बढ़ा दिया है और यहां तक कि उन खेपों का रास्ता भी बदल दिया है जो मूल रूप से चीन की तरफ जा रही थी. ऐसी स्थिति में एक सवाल लोगों के बीच उठ रहा है कि क्या भारत वास्तव में चीन से तेल आयात करता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
भारत की तेल जरूरतें और चीन की भूमिका
इसे साफ तौर से समझने के लिए इस बात को ध्यान रखना जरूरी है कि चीन खुद दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल इंपोर्टर है. इसका मतलब है कि वह भारत जैसे देशों को कच्चे तेल के आपूर्तिकर्ता के रूप में काम नहीं करता है. भारत अपने कच्चे तेल की मांग प्रमुख तेल उत्पादक देश से पूरी करता है ना कि चीन से. इस वजह से जब पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों की बारी आती है तो चीन भारत की आपूर्ति श्रृंखला में कोई सीधी भूमिका नहीं निभाता.
चीन से मुख्य आयात
भारत चीन से जिस प्राथमिक तेल का आयात करता है वह है सोयाबीन तेल. इसका इस्तेमाल खाना पकाने और फूड प्रोसेसिंग में बड़े पैमाने पर किया जाता है. 2025 में भारत ने चीन से लगभग 1,50,000 मीट्रिक टन सोयाबीन तेल की बड़ी खरीद की. यह सौदा मुख्य रूप से व्यावहारिक लाभ की वजह से हुआ. चीन ने रियायती कीमतों पर तेल की पेशकश की और कम शिपिंग अवधि का विकल्प बना दिया. इससे पता चलता है कि इस तरह के आयात लंबे समय की निर्भरता के बजाय बाजार की स्थिति से ज्यादा प्रेरित होते हैं.
रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का आयात
खाने के तेल के अलावा भारत चीन से कुछ रिफाइंड पेट्रोलियम आधारित उत्पादों का भी आयात करता है. इनमें लुब्रिकेंट, बेस ऑयल और बिटुमिनस खनिजों से प्राप्त तेल शामिल है. ये पेट्रोल जैसे दैनिक उपभोग में इस्तेमाल होने वाले ईंधन नहीं हैं बल्कि यह औद्योगिक और यांत्रिक अनुप्रयोगों के लिए जरूरी हैं. कीमत के मामले में यह इंपोर्ट छोटे रहते हैं. व्यापार डेटा के मुताबिक भारत चीन से सालाना लगभग 55 से 60 मिलियन डॉलर के पेट्रोलियम से संबंधित उत्पादों का आयात करता है.
हर साल कितना तेल आयात किया जाता है?
चीन से तेल आयात की कोई मात्रा तय नहीं है और यह बाजार की स्थिति के आधार पर बदलती रहती है. 2025 में 1,50,000 टन सोयाबीन तेल का आयात एक नियमित पैटर्न के बजाय एक बार का बड़ा सौदा था. इसी तरह पेट्रोलियम उत्पादों का आयात हर साल घटता-बढ़ता रहता है.
भारत तेल के लिए चीन पर निर्भर क्यों नहीं?
ऐसे कई मजबूत आर्थिक और राजनीतिक कारण हैं. चीन खुद भी आयात पर निर्भर है इस वजह से वह एक स्थिर आपूर्तिकर्ता के तौर पर काम नहीं कर सकता. इसके अलावा भारत कच्चे तेल का आयात सीधे उत्पादक देशों से करना पसंद करता है.
यह भी पढ़ें: कितनी है अमेरिका के B-1B लांसर की कीमत, जिसने ईरान में मचा दी तबाही?
