RBI Plastic Currency: भारतीय रिजर्व बैंक देश की अर्थव्यवस्था और नकदी व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक बड़े बदलाव पर काम कर रहा है. बाजार में नकदी की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्रीय बैंक अब पारंपरिक कागजी नोटों के स्थान पर प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट जारी करने की योजना बना रहा है. आरबीआई की उच्च स्तरीय बैठकों में इस बात पर गंभीर चर्चा हुई है कि कागज के मुकाबले प्लास्टिक के नोट बहुत लंबे समय तक चलते हैं और लंबे समय में इनकी छपाई लागत भी काफी कम बैठती है. इसी वजह से देश में जल्द ही एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने की उम्मीद है. चलिए इसी क्रम में जानें कि भारत के कितने पड़ोसी देश इस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर चुके हैं या कर रहे हैं. 

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मालदीव की पूरी तैयारी

भारत के समुद्री पड़ोसी देश मालदीव ने इस दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया है. मालदीव मोनेटरी अथॉरिटी ने देश के भीतर चलने वाली अपनी पूरी करेंसी यानी 'रुफिया' को पूरी तरह से पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोट में बदल दिया है. मालदीव ने अपनी अर्थव्यवस्था में कागजी नोटों के चलन को लगभग समाप्त सा कर दिया है. यह नया प्लास्टिक नोट पूरी तरह से वॉटरप्रूफ है, जिस पर पानी या नमी का कोई असर नहीं होता. समुद्र से घिरे होने के कारण मालदीव के लिए यह बदलाव बेहद जरूरी था, जिससे वहां की नकदी की उम्र काफी बढ़ गई है और बार-बार नोट छापने का सरकारी खर्च बच गया है.

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भूटान का अनूठा कदम

भारत के बेहद करीबी और खूबसूरत पड़ोसी देश भूटान ने भी अपनी नकदी व्यवस्था को आधुनिक रूप दिया है. रॉयल मोनेटरी अथॉरिटी ऑफ भूटान ने देश के आम नागरिकों के बीच इस्तेमाल के लिए प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोटों को सामान्य सर्कुलेशन में उतारा था. भूटान द्वारा इस तकनीक को अपनाने के पीछे मुख्य वजह नोटों की लाइफ को बढ़ाना और उनकी साफ-सफाई यानी हाइजीन को बेहतर करना था. पहाड़ी देश होने के कारण वहां के मौसम में नोटों के खराब होने का खतरा ज्यादा रहता था, जिससे निपटने के लिए भूटान ने यह सफल प्रयोग किया.

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बांग्लादेश का प्रयोग

भारत के एक और पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश ने प्लास्टिक करेंसी के मामले में एक सीमित लेकिन बेहद महत्वपूर्ण प्रयोग किया है. बांग्लादेश की सरकार ने देश के भीतर 10 टका का एक विशेष पॉलीमर यानी प्लास्टिक का नोट जारी किया था. हालांकि, यह नोट एक स्मारक नोट (कमेमोरेटिव बैंकनोट) के रूप में पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य किसी खास अवसर को यादगार बनाना था. वर्तमान समय की जमीनी हकीकत यह है कि बांग्लादेश के आम बाजार में अभी भी प्राथमिक मुद्रा के तौर पर कपास से बने कागज के नोट ही पूरी तरह चलन में हैं.

श्रीलंका की ऐतिहासिक पहल

हिंद महासागर में स्थित पड़ोसी देश श्रीलंका ने भी प्लास्टिक करेंसी की दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका ने देश की आजादी के 50 साल पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए एक विशेष कदम उठाया था. इस महत्वपूर्ण मौके पर श्रीलंका सरकार ने 200 रुपये का एक खास पॉलीमर यानी प्लास्टिक का स्मारक नोट जारी किया था. हालांकि, बांग्लादेश की तरह ही श्रीलंका ने भी इसे केवल एक विशेष प्रतीक के रूप में ही छापा था और आज भी वहां के आम कामकाज में कागज के नोट ही मुख्य रूप से इस्तेमाल होते हैं.

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