First King Of India: चंद्रगुप्त मौर्य को आमतौर पर पहले ऐसी शासक के रूप में माना जाता है जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के ज्यादातर हिस्से को एक केंद्रीय साम्राज्य के तहत एकजुट किया. 322 ईसा पूर्व में चाणक्य के मार्गदर्शन में उन्होंने शक्तिशाली मौर्य साम्राज्य की स्थापना की और भारत में एक एकीकृत राजनीतिक व्यवस्था की नींव रखी. चंद्रगुप्त मौर्य के उदय से पहले भारतीय उपमहाद्वीप कई राज्यों, गणराज्यों और क्षेत्रीय शक्तियों में बंटा हुआ था.

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महाजनपदों में बंटा हुआ भारत 

मौर्य साम्राज्य से पहले भारत राजनीतिक रूप से 16 प्रमुख राज्यों में बंटा हुआ था. इन्हें महाजनपद कहा जाता था. इनके अलावा कई छोटे राज्य और गणराज्य भी थे. पूरे क्षेत्र पर किसी एक शासक का कंट्रोल नहीं था और अलग-अलग राज्य अपने-अपने क्षेत्र और प्रभाव को बढ़ाने के लिए लगातार एक दूसरे से लड़ते रहते थे. 

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शासन की दो प्रणालियों 

उस दौर में शासन के दो मुख्य रूप होते थे. पहला था राजतंत्र. इसमें सत्ता राजा से उसके बेटे को मिलती थी. मगध, कोसल और वत्स जैसे शक्तिशाली राज्य इसी प्रणाली का पालन करते थे. दूसरी प्रणाली थी गणराज्य. इसमें फैसले कबीलाई नेताओं या फिर बुजुर्गों की परिषदों द्वारा सामूहिक रूप से लिए जाते थे. वज्जी और मल्ल जैसे राज्यों को गणराज्य ही कहा जाता था. 

कैसे हुआ क्षेत्र कमजोर? 

ज्यादातर राज्य और गणराज्य अपने पड़ोसी राज्यों के साथ संघर्ष में उलझे रहते थे. क्योंकि कोई केंद्रीय सत्ता नहीं थी, इस वजह से यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से अस्थिर बना रहा. इस आंतरिक विभाजन ने भारत की उत्तर पश्चिमी सीमा को कमजोर कर दिया और उसे विदेशी आक्रमणों के प्रति संवेदनशील बना दिया. 

सिकंदर के आक्रमण ने बदला सब कुछ 

एक एकीकृत प्रशासन के अभाव की वजह से सिकंदर महान को उत्तर पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों पर हमला करने का मौका मिल गया. सिकंदर कई छोटे राज्यों को हराने में सफल रहा. इस वजह से इस क्षेत्र की राजनीतिक फुट सामने आ गई और भविष्य में होने वाले विदेशी आक्रमणों का डर बढ़ गया. 

मौर्यों से पहले मगध पर नंद वंश का शासन 

उस समय भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य मगध था. इस राज्य पर नंद वंश का शासन था. इतिहासकार धनानंद को एक धनी लेकिन अलोकप्रिय शासक के रूप में बताते हैं. उनकी भारी टैक्सेशन पॉलिसी की वजह से जनता में असंतोष था. ऐसा कहा जाता है कि चाणक्य ने इस राजनीतिक अस्थिरता को भारत के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा माना था. चंद्रगुप्त मौर्य ने एक एकीकृत साम्राज्य की स्थापना की. चाणक्य के नेतृत्व में उन्होंने शक्तिशाली सेना खड़ी की और धीरे-धीरे अलग-अलग छोटे राज्यों और सीमावर्ती इलाकों को इकट्ठा किया. अंत में उन्होंने धनानंद को हराकर मगध पर अधिकार कर लिया और मौर्य साम्राज्य की स्थापना की. बाद में चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस प्रथम निकेटर को भी हराया.

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