पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए जनवरी 2026 से मुख्यमंत्री सेहत योजना लागू करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का कहना है कि इस योजना के तहत राज्य के हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक का इलाज पूरी तरह मुफ्त मिलेगा. यह पूरा इलाज कैशलेस होगा. इसी क्रम में आइए जान लेते हैं कि आखिर भारत में इलाज के लिए सबसे ज्यादा पैसा कौन सी सरकार देती है.

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तेलंगाना

अगर इलाज के लिए सबसे ज्यादा आर्थिक मदद देने वाले राज्यों की बात करें, तो तेलंगाना इस समय सबसे आगे नजर आता है. यहां राजीव आरोग्यश्री योजना के तहत प्रति परिवार सालाना 10 लाख रुपये तक का इलाज कवर किया जाता है. यह योजना खासतौर पर महंगे और गंभीर इलाज के लिए जानी जाती है और गरीब व जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत देती है.

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ओडिशा की खास पहल

ओडिशा सरकार की बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना भी देश की प्रमुख योजनाओं में शामिल है. इस योजना के तहत सामान्य रूप से हर परिवार को 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त मिलता है, लेकिन महिलाओं के लिए यह सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है. इससे महिलाओं को गंभीर बीमारियों में बेहतर इलाज का भरोसा मिलता है.

महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और केरल का मॉडल

महाराष्ट्र में महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना के तहत सभी नागरिकों को सालाना 5 लाख रुपये तक का इलाज कवर मिलता है. पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य साथी योजना भी हर परिवार को 5 लाख रुपये तक की सुविधा देती है और इसका लाभ राज्य के करोड़ों लोग उठा रहे हैं. वहीं केरल में करुण्य आरोग्य सुरक्षा पद्धति के जरिए गरीब और कमजोर वर्गों को 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त दिया जाता है.

केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना

केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पूरे देश में पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक का सालाना स्वास्थ्य कवर मिलता है. कई राज्य इस योजना के साथ अपनी अतिरिक्त राशि जोड़कर कुल कवरेज को और बढ़ा रहे हैं.

बजट खर्च में कौन आगे?

इलाज की सीमा के साथ-साथ स्वास्थ्य पर बजट खर्च भी अहम है. हालिया आंकड़ों के मुताबिक मेघालय ऐसा राज्य है, जिसने अपने कुल बजट का सबसे ज्यादा हिस्सा, करीब 8 प्रतिशत, स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने का फैसला किया है.

जनता को क्या फायदा?

इन योजनाओं का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब गंभीर बीमारी की हालत में लोगों को जमीन-जायदाद बेचने या कर्ज लेने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ती है. अलग-अलग राज्यों की ये योजनाएं मिलकर भारत में हेल्थ सिक्योरिटी को पहले से ज्यादा मजबूत बना रही हैं.

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