Forex Reserves: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी देखने को मिली है. सोने की वैल्यू में बढ़ोतरी होने से इस हफ्ते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 6.3 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. विदेशी मुद्रा भंडार को किसी देश की आर्थिक स्थिरता के सबसे मजबूत संकेतकों में से एक माना जाता है. ये अर्थव्यवस्था में विश्वास बनाए रखने, वैश्विक अनिश्चितता के दौरान मुद्रा को स्थिर करने और वित्तीय संकट के दौरान इंपोर्ट में सहायता करने में मदद करते हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कौन-कौन सी करेंसी हैं और सबसे ज्यादा क्या रिजर्व है.

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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कई अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं और  रिजर्व संपत्तियों से बना है. इनका रखरखाव भारतीय रिजर्व बैंक करता है. इन रिजर्व में मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर, यूरो, ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग, जापानी येन और ऑस्ट्रेलिया डॉलर शामिल हैं. हालांकि रिजर्व बास्केट में कई वैश्विक मुद्राएं शामिल हैं फिर भी रिजर्व का कुल मूल्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर के रूप में ही व्यक्त किया जाता है.

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विदेशी मुद्रा संपत्तियों का सबसे बड़ा हिस्सा 

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा संपत्तियां हैं.  इस श्रेणी का कुल रिजर्व में लगभग 80% हिस्सा है जो इस देश के रिजर्व पोर्टफोलियो की रीढ़ बनाता है. भारत के पास वर्तमान में विदेशी मुद्रा संपत्तियों के तहत लगभग $552.38 बिलियन हैं. इन संपत्तियों में फॉरेन गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के पास जमा राशि और प्रमुख विदेशी मुद्राओं में हिस्सेदारी शामिल है. क्योंकि रिजर्व में विदेशी मुद्रा संपत्तियों का ही ज्यादातर हिस्सा है इस वजह से वैश्विक मुद्राओं के मूल्य में उतार चढ़ाव रिजर्व के कुल आंकड़ों पर काफी असर डाल सकता है. 

सोने का भंडार मजबूत हो रहा 

भारत के रिजर्व का दूसरा सबसे बड़ा घटक सोने का भंडार है. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक भारत के सोने के भंडार का मूल्य लगभग 120.85 बिलियन डॉलर है. भारतीय रिजर्व बैंक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, इन्फ्लेशन और मुद्रा में उतार चढ़ाव के खिलाफ एक वित्तीय सुरक्षा कवच के रूप में सोना रखता है. सोने को सबसे सुरक्षित रिजर्व संपत्तियों में से एक माना जाता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अस्थिरता का दौरान अक्सर इसका मूल्य बढ़ जाता है.

स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स 

भारत के भंडार में स्पेशल ड्राइंग राइट्स भी शामिल हैं. ये अंतर्राष्ट्रीय आरक्षित संपत्तियां हैं जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने सदस्य देशों के आधिकारिक भंडारों को सहारा देने के लिए बनाया है. ये कोई भौतिक मुद्रा नहीं हैं बल्कि इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के सदस्य देशों द्वारा रखी गई स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल की जाने वाली मुद्राओं पर संभावित दावों को दर्शाते हैं. देश वित्तीय संकट या फिर नकदी की कमी के समय इनका इस्तेमाल कर सकते हैं. 

भारत की रिजर्व ट्रांच पोजीशन

भारत के भंडार का एक और छोटा लेकिन जरूरी हिस्सा आईएमएफ के पास मौजूद रिजर्व ट्रांच पोजीशन है. यह उस राशि को दर्शाता है जिसे भारत किसी आर्थिक आपातकाल के दौरान  बिना किसी शर्त के आईएमएफ से तुरंत निकाल सकता है. यह वैश्विक संकट के दौरान इस्तेमाल की जा सकती है.

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