Global Debt: ग्लोबल कर्ज अपने रिकार्ड स्तर पर पहुंच चुका है. इस वजह से सरकारों, अर्थशास्त्रियों और वित्तीय संसाधनों में चिंता बढ़ चुकी है. जनवरी 2026 के डेटा और इकोनामिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारी कर्ज के बोझ दबी हुई हैं. कुछ युद्धों की वजह से, कुछ बढ़ती आबादी, कल्याणकारी खर्च या फिर लंबे समय तक राजकोषीय घाटे की वजह से परेशानी का सामना कर रही हैं. ऐसे में एक आम सवाल उठ रहा है कि दुनिया में सबसे ज्यादा कर्ज किस देश पर है और इस मामले में भारत किस स्थान पर है. आइए जानते हैं.

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कौन सा देश कर्ज के मामले में सबसे ऊपर 

संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया का सबसे ज्यादा कर्जदार देश बना हुआ है. इसके कुल सरकारी कर्ज का अनुमान लगभग 38.3 ट्रिलियन डॉलर है. यह वैश्विक सार्वजनिक कर्ज का लगभग एक तिहाई है. इस चौंकाने वाली संख्या के बावजूद अमेरिका अपनी रिजर्व करेंसी की स्थिति, उच्च सैन्य खर्च, कल्याणकारी योजनाओं और बार-बार होने वाले बजट घाटे की वजह से भारी मात्रा में उधार लेना जारी रखे हुए है.

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चीन, जापान और यूरोप की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं 

अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर चीन है. इसका सरकारी कर्ज लगभग 18.7 ट्रिलियन डॉलर है. यह इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च स्थानीय सरकार के उधार और आर्थिक प्रोत्साहन उपायों की वजह से है. जापान लगभग 9.8 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज के साथ तीसरे स्थान पर है. इसी के साथ यूनाइटेड किंगडम पर लगभग 4.1 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है और फ्रांस पर भी 3.9 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज है. इटली अपने 3.5 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज के साथ इसके ठीक पीछे है. 

भारत की क्या है स्थिति 

कुल सरकारी कर्ज के मामले में भारत सातवें स्थान पर है. भारत के कुल कर्ज और देनदारी का अनुमान लगभग 3.8 ट्रिलियन डॉलर का है. केवल कुल कर्ज वास्तविक बोझ को नहीं दर्शाता है. कर्ज से जीडीपी अनुपात पर भी भरोसा किया जाता है. इस पैमाने पर सूडान सबसे ज्यादा तनाव वाली अर्थव्यवस्था है. इसका कर्ज जीडीपी का 221% से 252% के बीच है. बड़ी अर्थव्यवस्था में जापान का कर्ज से जीडीपी अनुपात लगभग 237 प्रतिशत है. 

कर्ज से जीडीपी अनुपात में भारत की स्थिति 

भारत का कर्ज से जीडीपी अनुपात लगभग 81.9% है. यह इस दुनिया भर में 31वें और 35वें स्थान के बीच रखता है. सरकार ने 2031 तक इस अनुपात को घटाकर लगभग 50% करने का लक्ष्य रखा है. भारत के कर्ज प्रोफाइल की एक मुख्य ताकत यह है किसका 95% से ज्यादा कर्ज घरेलू है. इससे करेंसी और बाहरी भुगतान का जोखिम काफी कम हो जाता है. कुल देनदारी में बाहरी कर्ज 5% से भी कम है.

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