दुनिया के किस देश को सबसे सस्ता मिल रहा राफेल, जानें भारत से कीमत कितनी कम?
राफेल की कीमत को लेकर भारत और इंडोनेशिया की डील की सीधी तुलना हो रही है. आंकड़े बताते हैं कि प्रति विमान लागत में बड़ा अंतर है, जिसने सवाल खड़े कर दिए हैं कि किस देश को यह सबसे सस्ता मिला है.

राफेल लड़ाकू विमान एक बार फिर सुर्खियों में है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों भारत दौरे पर हैं और इसी बीच 114 राफेल की संभावित मेगा डील चर्चा के केंद्र में आ गई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत दुनिया में सबसे महंगे राफेल खरीद रहा है? और अगर हां, तो किस देश को यह विमान सबसे सस्ती कीमत पर मिला? आइए समझ लेते हैं कीमत का पूरा गुणा-गणित.
भारत की मेगा डील पर नजर
भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है. इस डील की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है. अगर यह सौदा अंतिम रूप लेता है, तो यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद में से एक होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये विमान साल 2030 तक भारतीय वायुसेना को मिल सकते हैं. अगर कुल कीमत को 114 विमानों से बांटें, तो एक राफेल की औसत कीमत करीब 2,850 करोड़ रुपये बैठती है. यही आंकड़ा चर्चा की वजह बना हुआ है. आम लोगों के मन में सवाल है कि क्या भारत को राफेल महंगा मिल रहा है?
इंडोनेशिया को कितने में मिला राफेल?
अब इंडोनेशिया पर एक नजर डालें तो, इंडोनेशिया ने साल 2022 में फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation से 42 राफेल जेट खरीदने की डील की थी. उस समय देश के रक्षा मंत्री (अब राष्ट्रपति) प्रबोवो सुबियांतो की अगुवाई में यह समझौता हुआ था. उस वक्त इंडोनेशिया ने 8.1 बिलियन डॉलर यानी करीब 68 हजार करोड़ रुपये में 42 विमान खरीदे. इसका मतलब हुआ कि एक राफेल की कीमत करीब 1,747 करोड़ रुपये पड़ी. वहीं अगर भारत के अनुमानित 2,850 करोड़ रुपये प्रति विमान से तुलना करें, तो अंतर करीब 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का दिखाई देता है.
कीमत में इतना फर्क क्यों और किस देश को सस्ते पड़े राफेल?
यहां एक बात साफ समझनी जरूरी है कि हर देश को मिलने वाले राफेल एक जैसे पैकेज में नहीं आते हैं. कीमत सिर्फ विमान की बेस कॉस्ट नहीं होती है, उसमें कई चीजें शामिल होती हैं, जैसे हथियार सिस्टम, मिसाइलें, स्पेयर पार्ट्स, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस पैकेज और तकनीकी सपोर्ट. भारत पहले भी फ्रांस से 36 राफेल खरीद चुका है. उस डील में भी एडवांस हथियार सिस्टम, जैसे हवा से हवा में मार करने वाली और हवा से जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलें शामिल थीं.
ऐसे में संभावना है कि नई डील में भी भारत अपने हिसाब से खास तकनीक और हथियार जोड़ रहा हो, जिससे कीमत बढ़ जाती है. दूसरी तरफ, इंडोनेशिया की डील का कॉन्फिगरेशन अलग हो सकता है. हर देश अपनी जरूरत के हिसाब से विमान में बदलाव करवाता है, इसलिए सिर्फ प्रति विमान औसत कीमत देखकर सीधी तुलना करना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता है. ऐसे में देखा जाए तो भारत को ही राफेल सस्ते मिले हैं.
क्या इंडोनेशिया को सबसे सस्ता राफेल मिला?
आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो फिलहाल इंडोनेशिया की प्रति विमान लागत भारत की संभावित लागत से कम दिखाई देती है. लेकिन ऐसा है नहीं. इंडोनेशिया के मुकाबले भारत को राफेल ज्यादा सस्ते पड़े हैं, क्योंकि भारत सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं ले रहा, बल्कि उसके साथ अत्याधुनिक हथियार और पूरी सपोर्ट व्यवस्था भी शामिल कर रहा है.
इन विमानों में मेटियोर और स्कैल्प जैसी लंबी दूरी की ताकतवर मिसाइलें, हैमर जैसे सटीक निशाना साधने वाले स्मार्ट बम, पायलटों की ट्रेनिंग के लिए एडवांस फुल मिशन सिम्युलेटर, कई सालों तक सर्विस और रखरखाव की सुविधा, जरूरी स्पेयर पार्ट्स और तकनीक साझा करने का प्रावधान भी शामिल है. यानी सौदा सिर्फ विमान की कीमत का नहीं, बल्कि उसके पूरे संचालन और रखरखाव के जीवनकाल की कुल लागत का है. इसी व्यापक पैकेज को देखें तो कुल मिलाकर यह सौदा भारत के लिए फायदे का माना जा रहा है.
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Source: IOCL



























