Most Powerful Air Force: अमेरिका दुनिया की सबसे ताकतवर वायु सेना के तौर पर अपनी जगह बनाए हुए है. इसी के साथ भारत हालिया ग्लोबल रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. यह उपलब्धि भारतीय वायुसेना की बढ़ती ताकत और क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा में उसकी बढ़ती भूमिका को दिखाती है. वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलट्री एयरक्राफ्ट के मुताबिक भारत ने कुल हवाई ताकत के मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया है.

Continues below advertisement

अमेरिका सबसे ऊपर 

हवाई ताकत के मामले में अमेरिका का कोई भी मुकाबला नहीं है. अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा आधुनिक लड़ाकू विमानों, स्टील्थ फाइटर्स, रणनीतिक बॉम्बर्स‌, हवाई चेतावनी प्रणाली और हवा में ईंधन भरने की क्षमताओं का एक बड़ा बेड़ा है. एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, वैश्विक पहुंच और व्यापक युद्ध अनुभव का मेल अमेरिका को सैन्य विमानन में अपना दबदबा बनाए रखने में मदद करता है. 

Continues below advertisement

रूस दूसरे स्थान पर 

रूस इस सूची में दूसरे स्थान पर आता है. रूस के पास लड़ाकू विमान, बॉम्बर्स और रणनीतिक विमानन संपत्ति का एक बड़ा भंडार है. बीते कुछ सालों में कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद रूस दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सक्षम वायु सेना में से एक को चला रहा है. रूस के बेड़े में Su-35, Su-57 और MiG सीरीज के लड़ाकू विमान जैसे आधुनिक विमान शामिल हैं. 

भारत तीसरे स्थान पर 

भारत का तीसरे स्थान पर पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. भारतीय वायु सेना ने आधुनिकीकरण कार्यक्रम और आधुनिक विमान को शामिल करके अपनी क्षमता को काफी मजबूत किया है. इसी के साथ अब इसके बेड़े में फ्रांस में बने राफेल लड़ाकू विमान, सुखोई 30 MKI मल्टी रोल फाइटर और स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस शामिल है.

यह भी पढ़ेंः भारत के पंखों में तीन और अमेरिका के पंखों में चार ब्लेड क्यों होते हैं, जानें क्या है वजह?

चीन चौथे स्थान पर 

चीन ने  पिछले दो दशकों में सैन्य आधुनिकीकरण में भारी निवेश किया है. हालांकि चीन के पास बड़ी संख्या में विमान हैं और वह स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित कर रहा है लेकिन रैंकिंग के मुताबिक वह अभी चौथे स्थान पर है. 

जापान पांचवें स्थान पर 

इस लिस्ट में जापान पांचवें नंबर पर आता है. इसे तकनीकी रूप से एडवांस्ड वायु सेना और मजबूत हवाई रक्षा नेटवर्क का समर्थन प्राप्त है. आधुनिक लड़ाकू विमान, निगरानी प्रणाली और मिसाइल डिफेंस क्षमता के एक बेड़े की वजह से जापान एशिया पेसिफिक क्षेत्र में काफी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सक्षम है.

यह भी पढ़ेंः कैसे काम करता है आकाशतीर, जिसे भारत से खरीदकर अपना 'कवच' बनाना चाहता है यूएई?