Board Of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई ग्लोबल बॉडी के लिए प्लान पेश किए हैं. इसे वह यूनाइटेड नेशंस के विकल्प के तौर पर पेश करना चाहते हैं. इस प्रस्तावित संगठन को बोर्ड ऑफ पीस कहा जा रहा है. यह संगठन अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए तेज, ज्यादा निर्णायक प्लेटफार्म के तौर पर पेश किया जा रहा है. इस संगठन के लिए लगभग 50 देशों को पहले ही आमंत्रित किया जा चुका है.

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बोर्ड ऑफ पीस क्या है और इसे क्यों बनाया जा रहा है 

इस संगठन के पीछे का विचार ट्रंप की यूनाइटेड नेशंस की लंबे समय से चली आ रही आलोचना से आया है. यूनाइटेड नेशंस को उन्होंने बार-बार धीमा, अप्रभावी और वीटो की राजनीति से पैरालाइज्ड बताया है. अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक यह नई बॉडी लंबी राजनयिक बातचीत में फंसे बिना एक्शन ओरिएंटेड शांति स्थापना, पुनर्निर्माण और विवाद समाधान पर ध्यान केंद्रित करेगी.

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मुस्लिम देशों ने दिखाया समर्थन 

ट्रंप को पहली बड़ी राजनयिक सफलता मुस्लिम देशों से मिली है. आठ मुस्लिम बहुल देशों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि करते हुए इस बोर्ड का हिस्सा होने में रुचि दिखाई है. पाकिस्तान, मिस्त्र और संयुक्त अरब अमीरात समर्थन की घोषणा करने वाले पहले देशों में से थे. सऊदी अरब शुरुआत में चुप रहा जिस वजह से ट्रंप को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से सार्वजनिक रूप से अपील करनी पड़ी. इसके तुरंत बाद सऊदी अरब, तुर्की, जॉर्डन, इंडोनेशिया और कतर के विदेश मंत्रियों के एक संयुक्त बयान ने उनकी भागीदारी की घोषणा की.

शामिल होने पर सहमत हुए बाकी देश 

मुस्लिम देशों के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों के कई देशों ने शामिल होने की इच्छा जताई है. इसमें मोरक्को, कजाकिस्तान, वियतनाम, हंगरी, अर्जेंटीना और बेलारूस शामिल हैं. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है. 

जिन देशों ने इनकार किया या खुद को दूर रखा 

सभी अमेरिकी सहयोगी साथ नहीं हैं. फ्रांस, डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन ने साफ तौर से भाग लेने से निकाल कर दिया है. फ्रांस के इनकार से वाशिंगटन के साथ संबंध और ज्यादा तनाव पूर्ण हो चुके हैं. ट्रंप ने खुले तौर पर राष्ट्रपति मैनुअल मैक्रों की आलोचना की और यहां तक की निजी बातचीत के विवरण भी बता दिए.

बड़े देश जो अभी तय नहीं कर पाए 

कई प्रभावशाली देश अभी भी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. भारत, चीन, रूस, जापान, थाईलैंड, यूके, जर्मनी और इटली ने अभी तक भी साफ नहीं किया है कि वह इसमें शामिल होंगे या फिर नहीं. चीन ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के लिए अपने समर्थन को दोहराया है. 

बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र की तुलना में कितना शक्तिशाली

शांति बोर्ड की प्रस्तावित संरचना संयुक्त राष्ट्र मॉडल से काफी अलग है. संयुक्त राष्ट्र के उलट जहां पर फसलों के लिए एक बड़ी सहमति की जरूरत होती है या फिर अक्सर सुरक्षा परिषद में वीटो द्वारा उन्हें रोक दिया जाता है, इस बोर्ड को काफी ज्यादा केंद्रीकृत बनाया गया है. डोनाल्ड ट्रंप को इसका आजीवन अध्यक्ष बनाया गया है और उनके पास एक तरफा फैसला लेने की शक्तियां है.

इसी के साथ आर्थिक रूप से बोर्ड एक कॉर्पोरेट शैली मॉडल का पालन करता है. स्थायी सदस्यता चाहने वाले देशों को एक बिलियन डॉलर का योगदान देना होगा. इससे यह संयुक्त राष्ट्र की योगदान आधारित बजट प्रणाली की तुलना में काफी ज्यादा संसाधन समृद्ध हो सकता है. 

समर्थकों का कहना है कि शांति बोर्ड संयुक्त राष्ट्र की तुलना में ज्यादा प्रभावित हो सकता है. क्योंकि यह गति, फंडिंग और ताकत के जरिए से प्रवर्तन को प्राथमिकता देता है. वही आलोचकों का कहना है की शक्ति का एक ऐसा केंद्रीकरण अंतरराष्ट्रीय कानून, बहुपक्षवाद और संप्रभु समानता के सिद्धांत को कमजोर करता है.

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