Iran External Debt: मिडिल ईस्ट में फरवरी महीने से ही अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लगातार तनाव चल रहा है. तीनों ही देश के बीच चल रहे हैं, इस तनाव का असर दुनिया भर पर देखने को मिला है. वहीं बताया जाता है कि इस जंग से ईरान को भी काफी नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर चल रहा है. दोनों देशों के बीच बैठकों का दौर जारी है. वहीं दुनिया भर के देश उम्मीद लगा रहे हैं कि यह तनाव शांत हो, क्योंकि दुनिया भर के कई देशों में तेल और गैस की सप्लाई ईरान के रास्ते होर्मुज स्ट्रेट से होती है. वहीं इस जंग के चलते इस रास्ते पर भी असर पड़ा, जिससे कई देशों में तेल और गैस से जुड़ी दिक्कतें झेलनी पड़ी. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ईरान पर सबसे ज्यादा कर्ज किस देश का है और ईरान ने कहां-कहां से उधार लिया हुआ है.

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कितना है ईरान पर कुल बाहरी कर्ज?

ईरान के केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 तक देश का कुल बाहरी कर्ज करीब 4.9 अरब डॉलर रहा. इससे पहले यह आंकड़ा 2024 में 5.0 अरब डॉलर था. यानी पिछले 1 साल में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई है. दिलचस्प बात यह है कि यह आंकड़ा पिछले कई दशकों में सबसे निचले स्तर पर है. इससे पहले 2008 में ईरान का बाहरी कर्ज अपने हाई स्तर 28.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. ये भी पढ़ें-क्या होने जा रहा तीसरा विश्व युद्ध, जानें अब कौन किधर होगा खड़ा; अमेरिका-ईरान के साथ कौन?

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किस देश का है सबसे ज्यादा कर्ज?

ईरान का बाहरी कर्ज दूसरे देशों की तुलना में बहुत कम है और यह किसी एक देश पर ज्यादा निर्भर नहीं है. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण पश्चिमी देशों से कर्ज मिलना पहले ही सीमित हो चुका था. ऐसे में मौजूदा कर्ज मुख्य रूप से कुछ एशियाई और क्षेत्रीय साझेदारों से जुड़ा माना जाता है. यही वजह है कि माना जा रहा था कि अगर सरकार बदलती भी है तो किसी एक देश को बड़ा आर्थिक झटका लगने की संभावना कम है.

क्या कहते हैं ईरान के आंकड़े?

राजनीतिक तनाव के बीच भी ईरान की अर्थव्यवस्था अभी फिलहाल पूरी तरह कमजोर नहीं दिखाई देती है. मार्च 2025 में देश के चालू खाते में 13.2 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया था. वहीं दिसंबर 2021 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 838.3 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई. इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश और विदेशों में निवेश के आंकड़ों में भी वृद्धि देखने को मिली थी. इसके अलावा जून 2025 में ईरान की जीडीपी करीब 119.7 अरब डॉलर आंकी गई थी, जो बताती है कि प्रतिबंधों और राजनीतिक संकट के बावजूद देश के अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप नहीं हुई है.

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