Internet Origin: आज के समय में इंटरनेट लगभग मुफ्त जैसा लगता है. यह मोबाइल प्लान और वाई-फाई कनेक्शन के साथ बंडल में मिलता है. लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. असल में जब इंटरनेट पहली बार आया तो यह काफी महंगा, धीमा और कुछ ही लोगों तक सीमित था. मिलिट्री रिसर्च में अपनी शुरुआत से लेकर घरों में महंगे डायल-अप कनेक्शन तक इंटरनेट का सफर काफी ज्यादा दिलचस्प रहा है.
इंटरनेट का जन्मस्थान
इंटरनेट की शुरुआत सबसे पहले यूनाइटेड स्टेट्स में हुई थी. इसकी नींव 1969 में ARPANET नाम के एक प्रोजेक्ट के जरिए रखी गई थी. इसे यूएस डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस ने बनाया था. शुरुआत में इसे रिसर्च संस्थान और मिलिट्री सिस्टम के बीच बातचीत मुमकिन बनाने के लिए डिजाइन किया गया था आम लोगों के इस्तेमाल के लिए नहीं.
शुरुआती इंटरनेट बिल्कुल भी सस्ता नहीं था
1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत तक जब इंटरनेट आम लोगों तक पहुंचने लगा तब इसकी कीमत काफी ज्यादा थी. यूनाइटेड स्टेट्स में औसत मासिक सब्सक्रिप्शन लगभग 17.50 डॉलर था. लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई. यूजर्स को सिर्फ कनेक्टेड रहने के लिए हर घंटे $3 से $4 का अतिरिक्त चार्ज भी देना पड़ता था.
डायल अप कनेक्शन
उस समय इंटरनेट एक्सेस डायल अप कनेक्शन पर निर्भर था. ये टेलीफोन लाइनों का इस्तेमाल करते थे. इसका मतलब था कि यूजर्स से ना सिर्फ इंटरनेट इस्तेमाल करने का चार्ज लिया जाता था बल्कि फोन कॉल का भी. इससे काफी ज्यादा बिल आता था. अगर स्पीड की बात करें तो वह काफी धीमी होती थी. एक साधारण वेब पेज लोड होने में भी कई मिनट लग जाते थे.
भारत में इंटरनेट की एंट्री
भारत में आम लोगों के लिए इंटरनेट सेवा 15 अगस्त 1995 को वीएसएनएल द्वारा शुरू की गई थी. हालांकि यह आम आदमी की पहुंच से काफी बाहर थी. सिर्फ 9.6 केबीपीएस की स्पीड वाला एक बेसिक प्रोफेशनल प्लान सालाना लगभग ₹15000 का पड़ता था. इससे यह जरूरत से ज्यादा एक लग्जरी चीज बन चुका था.
कंपनियों के लिए भारी लागत
कंपनियों और संस्थानों के लिए लागत और भी ज्यादा थी. 128 केबीपीएस की एक लीज्ड लाइन की सालाना लागत 30 लाख रुपये तक हो सकती थी. इसका मतलब था कि सिर्फ बड़े संगठन ही भरोसेमंद इंटरनेट एक्सेस का खर्चा उठा सकते थे.
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