Black Hole: ब्लैक होल ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली चीजों में से एक है. उनका गुरुत्वाकर्षण खिंचाव इतना जबरदस्त होता है कि एक निश्चित सीमा पार करने के बाद रोशनी भी उससे बच नहीं पाती. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि अगर हमारा सूरज किसी ब्लैक होल के काफी ज्यादा करीब चला जाए तो क्या होगा? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
सूरज के टुकड़े-टुकड़े
इसका पहला बड़ा असर ब्लैक होल की जबरदस्त गुरुत्वाकर्षण शक्ति की वजह से होगा. जैसे-जैसे सूरज करीब जाएगा उसका जो हिस्सा ब्लैक होल की तरफ होगा उस पर दूसरी तरफ के मुकाबले कहीं ज्यादा खिंचाव महसूस होगा. गुरुत्वाकर्षण शक्ति में इस अंतर को टाइडल फोर्स कहते हैं. यह सूरज को खींचकर एक लंबी और पतली आकृति में बदलना शुरू कर देगा. वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को स्पैगेटीफिकेशन कहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि खिंचने वाली चीज स्पैगेटी के एक धागे जैसी दिखने लगती है.
एक विशाल एक्रिशन डिस्क बनेगी
सूरज की गैस तुरंत निगलने के बजाय वह ब्लैक होल के चारों तरफ चक्कर लगने लगेगी और एक ऐसी चीज बनेगी जिसे खगोलविद एक्रिशन डिस्क कहते हैं. यह डिस्क काफी तेज रफ्तार से घूमेगी और इसका तापमान काफी ज्यादा बढ़ जाएगा. जैसे-जैसे डिस्क में मौजूद पदार्थ आपस में टकराएंगे और सिकुड़ेंगे वे X-किरणों, गामा किरणों और दूसरी तेज ऊर्जा वाली विकिरणों के रूप में भारी मात्रा में ऊर्जा छोड़ेंगे.
पृथ्वी की कक्षा बिगड़ जाएगी
सूरज का गुरुत्वाकर्षण ही पृथ्वी और दूसरे ग्रहों को उनकी स्थिर कक्षाओं में बनाए रखता है. अगर सूरज नष्ट हो जाए या फिर किसी ब्लैक होल की वजह से अपनी जगह से काफी हट जाए तो यह संतुलन बिगड़ जाएगा. पृथ्वी के पास अब सूरज के चारों तरफ घूमने का कोई स्थिर रास्ता नहीं बचेगा. उसे गहरे अंतरिक्ष में फेंका जा सकता है. इसी के साथ ब्लैक होल की तरफ खींचा भी जा सकता है या फिर किसी ऐसी कक्षा में फेंका जा सकता है जिसके बारे में कुछ भी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.
ग्रह पर जानलेवा विकिरणें पड़ेंगी
एक्रिशन डिस्क से निकलने वाली तेज रेडिएशन पृथ्वी के लिए तुरंत खतरा पैदा कर देगी. इनसे वायुमंडल को बुरी तरह से नुकसान पहुंच सकता है और वायुमंडल पूरी तरह से नष्ट भी हो सकता है.
हमेशा के लिए छा जाएगा अंधेरा
भले ही पृथ्वी रेडिएशन और गर्मी के सबसे बुरे प्रभाव से बच भी जाए लेकिन सूरज के खत्म होने से एक और जानलेवा समस्या खड़ी हो जाएगी. सूरज की रोशनी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. बिना सूरज की रोशनी के फोटोसिंथेसिस लगभग तुरंत रुक जाएगा. इसी के साथ खाद्य श्रृंखलाएं टूट जाएंगी और तापमान तेजी से गिरने लगेगा. काफी कम समय में ही पृथ्वी अंतरिक्ष में भटकता हुआ एक जमा हुआ बेजान ग्रह बन जाएगी.
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