Black Hole: ब्लैक होल ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमय और डरावनी सच्चाई में से एक है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर कोई इंसान ब्लैक होल के करीब पहुंच जाए तो काफी ज्यादा गुरुत्वाकर्षण खिंचाव की वजह से उसका जीवित रहना असंभव होगा.  न सिर्फ शरीर पहचान से परे खिंच जाएगा बल्कि समय भी अलग तरह से व्यवहार करेगा. 

Continues below advertisement

ब्लैक होल क्या है? 

ब्लैक होल अंतरिक्ष में एक ऐसा क्षेत्र है जहां गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली है कि एक निश्चित सीमा को पार करने के बाद कुछ भी नहीं यहां तक की प्रकाश भी नहीं बच सकता. यह तब बनता है जब विशाल तारे अपने गुरुत्वाकर्षण के तहत ढह जाते हैं. इससे एक अविश्वसनीय रूप से डैंस पॉइंट बनता है जिसे सिंगुलेरिटी के रूप में जाना जाता है.

Continues below advertisement

पहला खतरा 

ब्लैक होल के करीब पहुंचने के सबसे भयानक प्रभावों में से एक स्पैगेटिफिकेशन नाम की घटना है. जैसे ही कोई व्यक्ति ब्लैक होल की तरफ गिरेगा उसके पैरों पर गुरुत्वाकर्षण खिंचाव उसके सिर पर खिंचाव से कहीं ज्यादा मजबूत होगा. गुरुत्वाकर्षण में यह अंतर शरीर को काफी ज्यादा फैला देगा. वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि शरीर स्पेगेटी के धागे के समान लंबा और पतला हो जाएगा. अंत में बल इतना ज्यादा हो जाएगा की हड्डियां, अंग, कोशिकाएं और यहां तक कि परमाणु भी टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे.

समय धीमा हो जाएगा 

ब्लैक होल के पास एक और अजीब प्रभाव समय फैलाव है. आइंस्टीन की रिलेटिविटी थ्योरी के मुताबिक मजबूत गुरुत्वाकर्षण समय बीतने को धीमा कर देता है. हालांकि पृथ्वी से देखने वाले किसी व्यक्ति की रफ्तार धीमी होती लगेगी. जैसे-जैसे इंसान ब्लैक होल की सीमा के करीब आता जाएगा बाहर से देखने वाले लोगों को वह समय के साथ लगभग जमे हुए दिखाई देंगे. 

इवेंट होराइजन क्या है? 

इवेंट होराइजन को अक्सर बिना वापसी के बिंदु के रूप में बताया जाता है. एक बार जब कोई वस्तु इस अदृश्य सीमा को पार कर जाती है तो ब्लैक होल से बचना असंभव हो जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि गुरुत्वाकर्षण खिंचाव उस रफ्तार से ज्यादा हो जाता है जिस रफ्तार से कोई भी वस्तु यात्रा कर सकती है. 

आखरी मंजिल 

इवेंट होराइजन से परे सिंगुलेरिटी ब्लैक होल का एक रहस्यमय केंद्र है. वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि यह एक ऐसा बिंदु है जहां पदार्थ अकल्पनीय घनत्व के साथ काफी छोटी जगह में कंप्रेस्ड हो जाते हैं.  सिंगुलेरिटी पर भौतिकी के वर्तमान नियम टूट जाते हैं जिस वजह से यह भविष्यवाणी करना असंभव हो जाता है कि आगे क्या होगा.

यह भी पढ़ेंः हमेशा दोपहर या शाम के समय ही क्यों आती है आंधी, कभी सुबह-सुबह क्यों नहीं आती?