Viscera Test: सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भाई और कारोबारी प्रतीक यादव की अचानक मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि प्रतीक यादव को पत्नी अपर्णा यादव के भाई अमन सिंह बिष्ट सुबह 6:00 बजे लखनऊ के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है. अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार जब प्रतीक यादव को अस्पताल लाया गया था, तब उनकी पल्स पूरी तरह डाउन थी. प्रतीक यादव की उम्र 38 साल थी. रिपोर्ट के अनुसार प्रतीक यादव का पोस्टमार्टम हो चुका है. लखनऊ में पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने उनका बिसरा सुरक्षित रखा है, क्योंकि शुरुआती जांच में मौत की वजह स्पष्ट सामने नहीं आ सकी. ऐसे में बिसरा जांच एक बार फिर चर्चा में आ गई है. आज हम आपको बताते हैं कि बिसरा जांच कैसे होती है और इसमें शरीर के किन अंगों को सुरक्षित रखा जाता है?
क्या होती है बिसरा जांच?
बिसरा शरीर के अंदरूनी अंगों और उनसे जुड़े सैंपल को कहा जाता है, जिन्हें पोस्टमार्टम के दौरान सुरक्षित रखा जाता है. आमतौर पर जब डॉक्टरों को पोस्टमार्टम से मौत की असली वजह साफ तौर पर पता नहीं चलती, तब वह आगे की जांच के लिए बिसरा प्रिजर्व कर लेते हैं. इसमें शरीर के ऐसे हिस्सों को सुरक्षित रखा जाता है, जिससे यह पता चल सके कि मौत किसी बीमारी, जहरीले पदार्थ, ड्रग्स या केमिकल के कारण हुई है या नहीं. फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स बाद में इन सैंपल्स की लैब में गहन जांच करते हैं.
पोस्टमार्टम के दौरान किन अंगों के सैंपल लिए जाते हैं?
पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जांच करते हैं. इसके लिए छाती और पेट के हिस्से को खोलकर आंतरिक अंगों की स्थिति देखी जाती है. इसी दौरान कुछ अंगो और फ्लूड्स के सैंपल सुरक्षित रखे जाते हैं. आमतौर पर इनमें पेट और उसकी सामग्री, आंतों का हिस्सा, लिवर, किडनी, दिल, फेफड़े और खून के सैंपल शामिल हो सकते हैं. कई मामलों में यूरिन, वीर्य और अन्य जैविक नमूने भी लिए जाते हैं. फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स इन सैंपल्स की केमिकल जांच करके यह पता लगाते हैं कि शरीर में किसी जहरीले पदार्थ या दवा का असर तो नहीं था.
कैसे की जाती है बिसरा जांच?
बिसरा जांच फॉरेंसिक साइंस का हिस्सा होती है. पोस्टमार्टम के दौरान सुरक्षित किए गए सैंपल को सील करके फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा जाता है. जहां एक्सपर्ट्स रासायनिक परीक्षण करते हैं. अगर किसी व्यक्ति ने जहरीला पदार्थ खाया पिया या सूंघा हो तो उसका असर शरीर के अंदरूनी अंगों पर दिखाई देता है. जांच के दौरान यही पता लगाया जाता है कि शरीर में कौन सा केमिकल या टॉक्सिक पदार्थ मौजूद था और उसका असर कितना था. एक्सपर्ट के अनुसार बिसरा सैंपल की जांच तय समय सीमा के अंदर की जाती है, ताकि रिपोर्ट ज्यादा सटीक आ सके.
संदिग्ध मौत में क्यों जरूरी होती है बिसरा रिपोर्ट?
हर पोस्टमार्टम में मौत की वजह तुरंत साफ नहीं हो पाती है. कई बार शुरुआती जांच में हार्ट अटैक, सांस रूकना और दूसरी मेडिकल वजह सामने आती है. लेकिन बाद में बिसरा रिपोर्ट कुछ और संकेत देती है. इसी वजह से हत्या, आत्महत्या, जहर देने या विवादित मौत के मामलों में बिसरा जांच अहम मानी जाती है. अगर किसी व्यक्ति की मौत को लेकर परिवार या पुलिस को संदेह हो तो फोरेंसिक रिपोर्ट से असली कारण सामने लाने में मदद मिलती है.
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