Umar Khalid and Sharjeel Imam: दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है. वहीं पांच दूसरे आरोपियों को जमानत दे दी गई है. कोर्ट ने खालिद और इमाम को राहत देने से इनकार करने की बड़ी वजह यूएपीए की धारा 43D(5)  को बताया. आइए जानते हैं कि आखिर यूएपीए क्या है और इसका इस्तेमाल सबसे पहले किसके खिलाफ किया गया था. 

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क्या है यूएपीए? (What is UAPA)

गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम जिसे आमतौर पर यूएपीए के नाम से जाना जाता है भारत का मुख्य आतंकवाद विरोधी और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून है. इसे उन गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया है जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं. इसमें अलगाववादी आंदोलन और आतंकवाद शामिल है. 

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यूएपीए कब लागू किया गया था?

यूएपीए को 1967 में इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान भारतीय संसद द्वारा लागू किया गया था. शुरुआत में है कानून गैर कानूनी और अलगाववादी गतिविधियों को निपटाने के लिए पेश किया गया था. 

यूएपीए के तहत सबसे पहले किन लोगों पर आरोप लगाए गए थे?

अपने शुरुआती सालों में यूएपीए का इस्तेमाल वामपंथी चरमपंथी और अलगाववादी आंदोलनों के खिलाफ किया गया था. इसका सबसे बड़ा उदाहरण पश्चिम बंगाल में नक्सलबाड़ी आंदोलन था. यह आंदोलन 1967 में शुरू हुआ था. इस सशस्त्र किसान विद्रोह से जुड़े व्यक्ति और समूह यूएपीए के तहत कार्रवाई का सामना करने वाले पहले लोगों में से थे. 

इसके लागू होने से पहले भी अलगाववादी मांगों, जैसे कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम द्वारा एक स्वतंत्र राज्य के लिए शुरुआत ने  इस तरह के कानून को बनाने के लिए प्रभावित किया. यूएपीए ने इसी तरह के आंदोलन से निपटने के लिए ताकत दी.

इस कानून में 2004 में बड़ा बदलाव आया. पीओटीए को खत्म करने के बाद यूएपीए में आतंकवादी गतिविधियों की परिभाषा को औपचारिक रूप से जोड़ा गया. इसने इस कानून को भारत का मुख्य आतंकवादी विरोधी कानून बनाया. इसके बाद 2008, 2012 और 2019 में भी कई संशोधन किए गए. 2019 में सरकार को न सिर्फ संगठनों बल्कि एक अकेले व्यक्ति को भी आतंकवादी घोषित करने की अनुमति मिली.

यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने वाला पहला व्यक्ति 

2019 के संशोधन के बाद कई विश्व स्तर पर पहचाने जाने वाले आतंकवादी यूएपीए के तहत आतंकवादी नामित किए जाने वाले पहले व्यक्तियों में से थे. इनमें हाफिज सईद, मसूद अजहर, जकी उर रहमान लखवी और दाऊद इब्राहिम शामिल थे.

यूएपीए के तहत जांच, हिरासत और सजा

यूएपीए के तहत मामलों की जांच आमतौर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी या फिर विशेष राज्य पुलिस इकाइयों द्वारा की जाती है. यह कानून अधिकारियों को सामान्य आपराधिक कानून के अंदर  60 से 90 दिनों की तुलना में चार्ज शीट दाखिल के बिना आरोपी को 180 दिनों तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है. यूएपीए के तहत अपराधी को अपराध के आधार पर आजीवन कारावास या मृत्यु दंड भी हो सकता है.

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